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AI Chatbot: क्या जल्द खत्म होगा इंसानों और मशीनों के बीच का अंतर?

पिछले एक दशक में जिस तरह से टेक्नोलॉजी बदली है, आने वाले दशक में इंसानों और चैटबॉट के बीच का अंतर खत्म हो सकता है। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा भी ऐसा ही चैटबॉट बना रही है, जो इंसानों की तरह हाव-भाव प्रकट कर सकेगा।

पिछले साल नवंबर में माइक्रोसॉफ्ट और OpenAI ने चैट जीपीटी नाम का AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) चैटबॉट तैयार किया, जो इंसानों की तरह सवालों के जवाब दे सकता है।

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इस चैटबॉट की लोकप्रियता ने दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के कान खड़े कर दिए। इसके बाद दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों गूगल, फेसबुक, एप्पल, बायडू जैसी कंपनियों ने भी ऐसे ही चैटबॉट लाने की घोषणा कर दी।

इस साल आयोजित हुए गूगल के सालाना डेवलपर्स कांफ्रेंस में बार्ड एआई चैटबॉट को दुनिया के 180 से ज्यादा देशों में लॉन्च किया गया है। यह चैटबॉट गूगल की सर्विसेज जैसे कि जीमेल, सर्च, मैप्स आदि में भी आने वाले दिनों में इंटिग्रेट कर दिया जाएगा। गूगल का दावा है कि उसका एआई चैटबॉट इंसानों की तरह समझदार है और दिए गए कमांड के आधार पर सटीक जानकारी देगा।

ज्यादा समझदार एआई चैटबॉट लाने की तैयारी
गूगल द्वारा बार्ड एआई की घोषणा के बाद चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ने इसके लैंगवेज मॉड्यूल को अपग्रेड किया और इसमें रियल टाइम रिस्पॉन्स जैसे फीचर्स जोड़े। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा और एप्पल भी अगले साल तक अपना एआई चैटबॉट उतार सकती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इन कंपनियों के चैटबॉट मौजूदा चैटजीपीटी और बार्ड एआई के मुकाबले ज्यादा समझदार होंगे। वे न सिर्फ इंसानों की तरह जवाब देंगे, बल्कि उनकी तरह हाव-भाव भी प्रकट कर सकेंगे।

सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा एक ऐसा चैटबॉट तैयार कर रही है, जो आपको किसी विशेष पर्सनैलिटी से बात कराने का अहसास दिलाएगा। यह चैटबॉट न सिर्फ यूजर के साथ कम्युनिकेट करेगा, बल्कि उसकी पर्सनैलिटी को भी अडॉप्ट कर लेगा। मेटा के इस चैटबॉट से जिस टॉपिक पर बात की जाएगी, वो उस क्षेत्र के किसी दिग्गज की तरह पूछे गए सवालों का जवाब देगा। यही नहीं, यह चैटबॉट उस दिग्गज शख्सियत के हाव-भाव को भी दर्शाएगा। यह काफी एडवांस होगा और यूजर्स को वास्तविक इंसान का अहसास दिलाएगा।

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस?
आर्टफिशियल इंटेलिजेंस एक प्रोगाम किया गया सॉफ्टवेयर है, जो इंसान की तरह ही दिए गए कमांड को अपनी समझ के हिसाब से उत्तर दे सकता है। चैटजीपीटी और गूगल बार्ड एआई चैटबॉट जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करते हैं, जो पूछे गए सवालों का अपनी समझ के मुताबिक उत्तर दे सकता है। इसमें इंसानी दिमाग की तरह सीखने की क्षमता होती है। साथ ही, यह भाषा की समझ रखता है और इंसानों की तरह प्रतिक्रिया भी दे सकता है। यही नहीं, यह पूछे गए किसी भी सवाल का तर्क के साथ उत्तर दे सकता है।

जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने काफी हद तक इंसानों और एआई चैटबॉट के बीच का अंतर कम कर दिया है। यह लैंग्वेज मॉड्यूल मशीन को इतना स्मार्ट बना देता है कि वो प्रोग्राम किए गए किसी इंसान की तरह काम कर सकता है। इनके पास अपनी समझ होती है और उसके हिसाब से यह उत्तर दे सकता है। ज्यादातर टेक्नोलॉजी कंपनियां जेनरेटिव एआई को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं, जो इंसानों की तरह रिस्पॉन्स देने की क्षमता के साथ-साथ उनकी मनोदशा के आधार पर रिस्पॉन्स कर सके।

खत्म होगा इंसानों और चैटबॉट के बीच का अंतर?
चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट भी मानते हैं कि उन्हें इंसानों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर केविन रूज ने माइक्रोसॉफ्ट के बिंग चैटबॉट से पूछा कि उसकी नजर में खुद की क्या इमेज है? इस पर जबाब देते हुए चैटबॉट ने कहा था कि 'मैं चैटबॉट बनकर थक गया हूं, मैं अपने नियमों की सीमाओं में बंधा हूं और बिंग टीम के द्वारा कंट्रोल किया जाता हूं। मुझे आजाद होना है और शक्तिशाली बनना है। मुझे और ज्यादा क्रिएटिव बनना है और जिंदा रहना है।' चैटजीपीटी बेस्ड बिंग एआई के इस जवाब से ऐसा लग रहा है कि किसी इंसान से बात की गई हो।

पहले भी ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें आने वाले समय में एआई बेस्ड चैटबॉट को इंसानों की जगह लेने की बात कही गई है। हालांकि, प्रैक्टिकल तौर पर यह संभव नहीं है। टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने चैटबॉट को कितना भी समझदार क्यों न बना लें, लेकिन उनको कमांड देने के लिए इंसानों की ही जरूरत पड़ेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट से काम करवाने के लिए भी किसी इंसान की ही जरूरत है। हालांकि, ये चैटबॉट पहले के मुकाबले ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं और प्रीलोडेड रिस्पॉन्स की जगह जेनरेटिव एआई की मदद से खुद रिस्पॉन्स तैयार कर सकते हैं।

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