Adani Group: फिर पुराना रुतबा हासिल करने की ओर अडानी समूह
अडानी समूह एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह अडानी समूह की कंपनियों पर लोगों का बढ़ता भरोसा है। पिछले शुक्रवार यानी शेयर बाजार के कारोबार के हफ्ते के आखिरी दिन निवेशकों के बढ़ते विश्वास की बदौलत अडानी समूह के शेयरों का बाजार मूल्य 11 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। अच्छी बात ये सामने आई कि निवेशकों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों के निवेशक शामिल थे।
दुनिया भर में अमीरों की रैंकिंग जारी करने वाली फ़ोर्ब्स पत्रिका ने 1 सितंबर की रिपोर्ट में गौतम अडानी को 24वें नंबर पर रखा है। अडानी पिछले सितंबर में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अमीर के पायदान पर थे, लेकिन इस साल जनवरी में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह के शेयरों में जबर्दस्त गिरावट आई थी और खुद गौतम अडानी दुनिया के 30 अमीरों की सूची से बाहर हो गए थे।

कांग्रेस के निशाने पर अडानी समूह
अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी की पारिवारिक पृष्ठभूमि गुजरात की होने की वजह से उन्हें केंद्र सरकार के करीब माना जाता है। कांग्रेस यह आरोप लगाती रही है कि वह प्रधानमंत्री के करीबी है और वह मोदी के कारण ही देश और विदेशों में अपना व्यवसाय तेजी से बढ़ा पा रहे हैं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद तो कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल सरकार पर टूट पड़े और जेपीसी की मांग पर देश देश भर में आंदोलन किए। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सेबी ने सौंपी जांच रिपोर्ट
सुप्रीम ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) से अडानी-हिंडनबर्ग मामले में जांच रिपोर्ट 14 अगस्त 2023 तक दाखिल करने के लिए कहा, लेकिन सेबी ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में एक स्टेटस रिपोर्ट फाइल की है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में अभी सुनवाई होनी है।
रिकवरी की राह पर अडानी
जनवरी में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह के कुल शेयरों की कीमत 19 लाख करोड़ से घटकर 6 लाख करोड़ तक पहुंच गई थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में अडानी ने अपने बाजार पूंजीकरण में 5 लाख करोड़ का इजाफा कर लिया है, जिससे स्पष्ट होता है कि बाजार का विश्वास अडानी की तरफ लौट आया है। अडानी ग्रुप लगभग 5 लाख करोड़ रुपये अपनी पूंजी जोड़ते हुए फिर 11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
कांग्रेस के दुबारा हल्ला मचाने का नहीं पड़ा प्रभाव
संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग परियोजना (ओसीसीआरपी ) नाम की खोजी पत्रकारों की वैश्विक संस्था ने पिछले माह के आखिरी हफ्ते में हिंडनबर्ग के आरोपों को आगे बढ़ाते हुए अडानी समूह पर शेयरों की हेराफेरी करने के आरोप लगाए तो काग्रेस ने उन आरोपों को लेकर फिर से अडानी समूह और क्रेंद्र सरकार के बीच सांठगांठ होने का आरोप लगाते हुए हमला बोला। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संवाददाता सम्मेलन भी किया, लेकिन शेयर बाजार पर इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। बल्कि समूह के शेयरों को लेकर निवेशकों में सकारात्मक रुख देखा जा रहा है।
एक दिन में जुड़े 7 हजार करोड़
अडानी समूह के शेयरों का प्रदर्शन उन क्षेत्रों के प्रदर्शन से निकटता से जुड़ा है जिनमें वह काम करता है। बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा, या लॉजिस्टिक्स, अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे कंपनी के शेयर मूल्य बढ़ रहे हैं। खासकर ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सरकारी नीतियों और नियम का कंपनियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव दिख रहा है। कंपनी के अनुकूल नीतियां या सरकारी समर्थन स्टॉक की कीमतों को बढ़ावा दे रहे हैं। यही वजह है कि बुनियादी संरचना, एयरपोर्ट से लेकर बंदरगाहों के अलावा बिजली तक में निवेश करने वाले वाला ये समूह शुक्रवार को शेयर बाजार में 7,039 करोड़ जोडने में कामयाब रहा जिससे इसकी 10 सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य ₹ 11.02 लाख करोड़ रुपये हो गया, ये एक दिन पहले 10.96 लाख करोड़ रुपये था।
ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच समूह के रणनीतिक फोकस, धन जुटाने की पहल और इसके बुनियादी ढांचे और बिजली व्यवसायों में विकास के लिए परियोजनाओं को लगातार लागू करने की वजह से इसके शेयरों को खरीदने में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। उदाहरण के लिए अदानी पावर के शेयर शुक्रवार को 2.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। ये पिछले 10 महीने के उच्चतम स्तर 369.15 रुपये तक पहुंच गए। इसके स्टॉक में बहुत अधिक खरीददारी हुई। अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड और अदानी विल्मर सहित समूह की चार कंपनियों ने शुक्रवार को जमकर मुनाफा कमाया।












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