जानिए 9 बातें कि क्यों और कैसे फटते हैं बादल?

नई दिल्ली। उत्तराखंड में एक बार फिर बादल फटने से भारी तबाही मच गई है। वहां के टिहरी जिले में बादल फटने से 5 लोगों की मौत हो गई है। बादल फटने के इस कहर के बाद टिहरी-रुद्रप्रयाग मार्ग बंद कर दिया गया। यही नहीं मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में देश के सात बड़े शहरों में बादल फटने की आशंका व्यक्त की है।

कहते हैं, प्रकृति के कहर से बच पाना नामुमकिन है। भूस्खलन हो, भूकंप, सूनामी, बाढ़ या बादल का फटना, प्रकृति कई प्रकार से हम पर कहर बरपाती है। जिसमें हजारों लाखों लोग हर साल काल में मुंह में समा जाते हैं। हम यहां बात करेंगे उस भयावह आपदा की जिसमें बदल फट जाते हैं।

आखि‍र क्या होता है इसमें

जब वातावरण में दबाव बेहद कम हो जाता है और बादल अचानक एक दूसरे से या फिर किसी पहाड़ी से टकराते हैं, तब अचानक भारी मात्रा में पानी बरसता है। इसे बादल फटना कहते हैं। यह प्रक्रिया ज्यादा ऊंचाई पर नहीं होती, इसमें 100 मिलीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बारिश होती है और बाढ़ जैसा मंजर दिखने लगता है।

स्लाइडर में तस्वीरों के साथ देखें बादल फटने से जुड़े 9 महत्वपूर्ण तथ्य।

क्या होता है ?

क्या होता है ?

बादल का फटना एक प्राकृतिक घटना है, जब बादल फटता है तो अचानक तेज बारिश होती है और हालात बाढ़ और तूफान की तरह के हो जाते हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में होता है खतरा

पहाड़ी क्षेत्रों में होता है खतरा

बादल फटने की अधिकतर आपदाएं पहाड़ी क्षेत्रों में ही होती हैं। जैसे की हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर आदि।

100 मिलीमीटर प्रति घंटा से बारिश

100 मिलीमीटर प्रति घंटा से बारिश

बादल फटने का कारण होने वाली वर्षा लगभग १०० मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से होती है।

भारी बारिश से मचती है तबाही

भारी बारिश से मचती है तबाही

बादल फटने पर चंद मिनटों के दौरान ही 2 सेंटीमीटर से भी ज्यादा बारिश हो जाती है। जिस कारण भारी तबाही होती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में होता है

पहाड़ी क्षेत्रों में होता है

इसमें भारी नमी से लदी हवा अपने रास्ते में खड़ी पहाड़ियों से टकराती है जिससे एक खास तरह के बादलों का निर्माण होता है।

वायु जब कमजोर पड़ जाती है

वायु जब कमजोर पड़ जाती है

जब इन बादलों को ऊपर की ओर धकेलने वाली वायु जब कमजोर पड़ जाती है तो अचानक ही इन बादलों से मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है जिसे बादल का फटना कहते हैं।

15 किलोमीटर की ऊंचाई पर

15 किलोमीटर की ऊंचाई पर

बादल के फटने की घटना हमेशा धरती से लगभग 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर घटती है।

बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है

बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है

बादल फटने के दौरान आमतौर पर गरज और बिजली चमकने के साथ तेज आंधी के साथ भारी बारिश होती है। ऐसी भीषण बारिश से बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है और चारों तरफ तबाही मच जाती है।

क्या है उपाय

क्या है उपाय

आवश्यकता है प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के प्रयासों की और ऐसी जगहों पर बचाव कार्यों के ज्यादा इंतजामों की जहां बादल फटने की घटना होने की संभावनाएं अधिक हैं।

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