Train Accidents: स्वतंत्र भारत के 10 सबसे दर्दनाक रेल हादसे

आजादी के बाद देश में रेल मार्गों का विस्तार और आधुनिकीकरण किया गया। इसी के साथ देश ने कई भयंकर और दर्दनाक रेल दुर्घटनाएं भी देखी हैं।

10 most painful train accidents of independent India

2 जून 2023 को ओडिशा में रेल दुर्घटना में 280 लोग मारे गये और 900 से अधिक के घायल होने की खबर है। इसमें एक मालगाड़ी सहित दो सवारी गाड़ियों के कोच एक दूसरे से टकरा गये। जिसके चलते हताहतों की संख्या और बढ़ गयी। यह दुर्घटना बेहद दर्दनाक थी। मगर इससे पहले भी देश में कई हादसे हो चुके हैं।

रामेश्वरम ट्रेन हादसा (1964)
23 दिसंबर 1964 को तमिलनाडु के धनुषकोडी में एक शक्तिशाली चक्रवात आया हुआ था। जब यह चक्रवात आया तब पंबन-धनुष्कोड़ी यात्री ट्रेन पंबन ब्रिज पार कर रही थी। जैसे ही ट्रेन पुल पर आई तभी 25 फीट ऊंची एक समुद्री लहर ने पूरी ट्रेन को समुद्र में पलट दिया। इस घटना में ट्रेन में सफर कर रहे सभी 200 यात्रियों की मौत हो गयी। आपको बता दें कि पंबन पुल तमिलनाडु के मंडपम शहर को पंबन द्वीप पर रामेश्वरम से जोड़ता है।

बिहार ट्रेन डिरेलमेंट (1981)
6 जून 1981 को सहरसा और मानसी (धामरा पुल) के बीच लगभग 800 से अधिक यात्रियों को ले जा रही एक ट्रेन पटरी से उतर गई और बागमती नदी में गिर गयी। ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी और नौ में से सात डिब्बे पटरी से उतरकर नदी में समा गये। इस घटना में अनुमानित 700 से ज्यादा यात्रियों की मौत हो गयी। दुर्घटना का कारण पता नहीं चला क्योंकि इसकी सही से जांच नहीं की गई थी। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि यह हादसा अचानक बाढ़ और ट्रेन के ब्रेक फेल होने के कारण हुआ था।

पेरूमन रेल हादसा (1988)
पेरुमन रेल हादसा 8 जुलाई 1988 को हुआ था। इस दिन आइलैंड एक्सप्रेस बेंगलुरु से तिरुवनंतपुरम जा रही थी और केरल के अष्टमुडी झील पर बने पेरुमन पुल पर पटरी से उतर गयी। इस हादसे में ट्रेन की 10 बोगियां पानी में समा गयी। जिसके कारण 105 लोग मारे गये और लगभग 200 यात्री घायल हुए थे। इस पूरी घटना की कभी ठीक से जांच नहीं की गयी लेकिन दावा किया जाता है कि पटरी के खराब एलाइनमेंट के कारण और ट्रेन के पहियों में कुछ खराबी के कारण यह दुर्घटना हुई थी।

फिरोजाबाद रेल हादसा (1995)
20 अगस्त 1995 को कानपुर से नई दिल्ली जा रही कालिंदी एक्सप्रेस फिरोजाबाद के पास एक नीलगाय से टकरा गयी। इससे ट्रेन के ब्रेक खराब हो गये और वह वहीं जाम हो गयी। तभी पुरी से नई दिल्ली जा रही पुरुषोत्तम एक्सप्रेस ने कालिंदी एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी। दोनों ट्रेनों में लगभग 2,200 लोग सफर कर रहे थे। टक्कर की वजह से 400 लोगों की मौत हो गयी।

गैसल रेल हादसा (1999)
यह हादसा 2 अगस्त 1999 को पश्चिम बंगाल के गैसल रेलवे स्टेशन पर हुआ था। दुर्घटना तब हुई जब ब्रह्मपुत्र मेल और अवध-असम एक्सप्रेस दोनों ट्रेनें आपस में टकरा गयी। इस हादसे में 285 से अधिक लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हो गये। इस दौरान कई डिब्बों को आग ने भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ गयी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक यह हादसा सिग्नल में खराबी के कारण हुआ था।

खन्ना रेल हादसा (1998)
यह दुर्घटना 26 नवंबर 1998 को खन्ना-लुधियाना खंड पर खन्ना के निकट हुई थी। इस दुर्घटना में फ्रंटियर मेल के पटरी से उतरे छह डिब्बों से जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस टकरा गयी। कुल मिलाकर, दोनों ट्रेनों में लगभग 2,500 से अधिक यात्री सफर कर रहे थे और इस हादसे में कम-से-कम 212 मारे गये।

रफीगंज रेल हादसा (2002)
रफीगंज रेल दुर्घटना 10 सितंबर 2002 को हुई थी। इस दिन हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस, गया के पास रफीगंज शहर के पास धवे नदी पर बने एक पुल पर पटरी से उतर गयी। ट्रेन 130 किमी/घंटा की गति से चल रही थी। दुर्घटना में कम-से-कम 130 लोगों की मौत हो गयी। जबकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने यह आंकड़ा 200 तक बताया था। दावा किया जाता है कि यह हादसा स्थानीय माओवादी समूह द्वारा पटरी पर की गयी तोड़फोड़ के कारण हुआ था।

वेलिगोंडा रेल हादसा (2005)
वेलिगोंडा रेल हादसा 29 अक्टूबर 2005 को आंध्र प्रदेश के वेलिगोंडा शहर के पास हुआ था। यह दुर्घटना बाढ़ के कारण हुई थी क्योंकि पानी पटरियों को बहा ले गया। जिसके चलते डेल्टा फास्ट पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतर गयी। ट्रेन हैदराबाद से कुरनूल जा रही थी। ट्रेन में लगभग 600 यात्री सवार थे। इस दुर्घटना में 114 लोग मारे गये और लगभग 200 घायल हुए।

ज्ञानेश्वरी रेल हादसा (2010)
28 मई 2010 को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस मिदनापुर जिले में पटरी से उतर गयी। ऐसा माना जाता है कि ट्रैक को बम से उड़ाया गया था। इस घटना से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने उस इलाके में चार दिनों के बंद का ऐलान किया था। बंगाल पुलिस का आरोप था कि माओवादी-नक्सलियों द्वारा लगभग 46 सेंटीमीटर का ट्रैक हटा दिया गया था जिसकी वजह से ट्रेन के सभी 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में लगभग 148 लोग मारे गये और 200 से अधिक घायल हुए। जब ट्रेन पटरी से उतरी तो उसके डिब्बों को दूसरी पटरी पर सामने से आ रही मालगाड़ी ने भी टक्कर मार दी।

इंदौर-पटना रेल हादसा (2016)
20 नवंबर 2016 को इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन पुखरायां, कानपुर के पास पटरी से उतर गयी। हादसे में लगभग 120 लोगों की मौत हो गयी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गये। ट्रेन इंदौर से पटना जा रही थी। हादसा कानपुर देहात जिले के पुखरायां में सुबह के समय हुआ जब ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गये। इस दुर्घटना की जांच रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दुर्घटना रेल ट्रैक में किसी खराबी के कारण हुई थी।

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