भारतीयों की 10 गंदी बातें, जिन्हें है बदलने की जरूरत
भारत बहुत बड़ा देश है। चीन के बाद भारत ही ऐसा देश है जहाँ कि जनसंख्या विश्व स्तर पर सार्वधिक है। वैसे तो भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण विश्व प्रसिद्ध है और इसकी इसी विशेषता के कारण लाखों की संख्या में विदेशों से पर्यटक भारत भ्रमण के लिए आते हैं। लेकिन यहां कुछ कमियां भी हैं। या यह कहा जाए कि कमियां भारत में नहीं बल्कि भारतीयों में हैं जिनकी कुछ बुरी आदतों के कारण अन्य देशों के समक्ष भारत की गरिमा को नुकसान भी पहुंचता है।
इन बुरी आदतों के कारण ही कई बार विदेशी भारतीयों को असभ्य तक कहने में सकुचाते नहीं हैं। जब हम विकास की बात करते हैं तो इसका अर्थ केवल आर्थिक सन्दर्भ तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह विकास शब्द बहुआयामी सन्दर्भों से जुडा हुआ है। विकास के लिए व्यक्तिगत जीवन में भी एक व्यवस्था और सलीके की जरूरत है और सामाजिक तौर पर भी एक सभ्यता और आचरण की जरूरत है जिसे हम मैनर्स कहते हैं।
स्लाइडर में देखें भारतीयों की गंदी अादतें और उसके बाद अगर मन करे तो पढ़ें- भारत की गंदी बातें जो बन गईं कमाई का जरिया

घूरने की आदत
भारतीयों में घूरने की आदत बहुत बुरी है। किसी लड़की को देख कर घूरना, सड़क पर लोगों को घूरना, किसी विदेशी महिला को देख कर घूरना। बस में घूरना, मेट्रों में घूरना। अरे कितना घूरोगे के भईया अब इस आदत को बदल भी दो।

सड़क पर थूकना
हम रोज़ाना देखते हैं लोगों को जो राह चलते, सफर करते कहीं भी थूकते फिरते हैं और गंदगी फैलाते हैं। खास तौर पर पान गुटका खाने वाले हर तरफ थूकते रहते हैं। यह अशोभनीय है और देश की छवि बिगाड़ने वाली आदत है। सरकार को इस पर जुर्माना लगाना चाहिए।

गन्दगी फैलाना
भारत में लोग अपने घर के अलावा कहीं भी कूड़ा करने से हिचकिचाते नहीं हैं। अब भी ऐसे बहुत कम लोग हैं जो कूडा कूड़ेदान में फेंकते हैं। पर्यटन क्षेत्रों पर, रेलवे स्टेशन पर, ट्रैन में, सड़क पर, गलियों में हर नुक्कड़ पर कूडे़ का ढेर मिलना आम बात हैं।

ऐतिहासिक इमारतों के प्रति लापरवाही
ऐसा लगता है भारतीयों में अपनी ऐतिहासिक धरोहर के प्रति गर्व की भावना नहीं दिखती। इसीलिए वे इन ऐतिहासिक स्थलों के प्रति कर्तव्यनिष्ठ भी नहीं दिखते। इन इमारतों पर खुरच के अपना नाम लिखना इसके आस पास गन्दगी फैलाना बुरी आदत है जो विदेशी पर्यटकों पर भी बुरा प्रभाव डालती है।

जल्दबाजी
हर काम के लिए पहले 'मैं' और जल्दबाज़ी अधिकतर भारतीयों में देखी जा सकती है। इसी कारण सड़क पर मेट्रों में बसों में धक्का मुक्की और भीड़ भाड़, होरनों की पों पों रोज़ाना देखने और सुनने को मिलती है।

फब्तियां कसना
भारत में ऐसे कई लोग हैं जो राह चलती लड़कियों पर, महिलाओं पर विदेशी महिलाओं पर फब्तियां कसते हैं जो कि बहुत बुरी आदत है और असभ्य भी।

दूसरों की नकल करना
भारत में विशेष रूप से महिलाओं में दूसरी महिलाओं को देखकर नकल करने की प्रवृत्ति बहुत मिलती है। चाहे वो हेयर स्टाइल को या फिर ड्रेसिंग स्टाइल हो महिलाएं दूसरों की नकल बहुत करती हैं।

खाने पीने के सलीके को अनदेखा करना
भारत में लोग खानेपीने के सलीके का ख्याल नहीं रखते। बल्कि कई शिक्षित लोग भी इन सलीकों की परवाह नहीं करते. खाना चबाते समय मुंह का खोल के खाना, चबाने की आवाज आना, प्लेट में चम्मच का बजना, पानी पीते समय गले से आवाज आना सलीके की अनदेखी है.

जोर जोर से बात करना
भारत में कई ऐसे लोग हैं जो रास्ते में, बसों में, रेस्टोरेंट में, फोन पर जोर जोर से बात करते हैं, जोर जोर से हंसते हैं जो कि अच्छी आदत नहीं है।

नशा करना
भारत में बहुत कम ऐसे लोग हैं जो किसी नशे के गिरफ्त में न हो. हर साल लाखों की की संख्या में लोग नशे के कारण मरते हैं। गरीब से लेकर अमीर तक सब नशे के शिकार हैं. रात में फुटपाथ पर बेशुध हालत में जिस तरह लोग चरस अौर गान्जा पीकर पडे़ होते है वो देश को शर्मशार करता है।

जूते चप्पल कहीं भी उतार देना
भारत में लोगों की बुरी आदत हैं कि वे जूते चप्पल लापरवाही से कहीं भी उतार के फेंक देते हैं फिर चाहे घर हो या बाहर।












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