11 घंटे तक छोटे से तहखाने में 21 बच्चों को बनाया था बंधक, देखकर सिहर उठे परिजन

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में 21 बच्चों को बंधक बनाने वाले शख्स सुभाष बाथम को पुलिस ने मार गिराया। कई घंटे चले ऑपरेशन के बाद जब पुलिस के साथ मौके पर गए बच्चों के परिजनों की नजर छोटे से तहखाने पर पड़ी तो सभी के होश उड़ गए। छोटे से तहखाने में 11 घंटे तक छोटे-छोटे 21 बच्चे को रखा गया था। फिलहाल पुलिस ने सभी बच्चों को सकुशल बरामद भी कर लिया है। वहीं, दूसरी तरफ सुभाष बाथम की पत्नी रूबी बाथम की भी ग्रामीणों ने जमकर पिटाई की थी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।

तहखाने में सुभाष अंकर ने किया था बंद

तहखाने में सुभाष अंकर ने किया था बंद

12 साल के विनीत ने बताया कि सुभाष अंकल के घर जब हम सब लोग पहुंचे तो उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया। हम सभी बच्चों को तहखाने में लेकर चला गया। वहां पर उसने सभी से कहा कि कोई रोया तो बारूद से उड़ा दूंगा। कुछ बच्चे रोने लगे तो उसकी पत्नी बच्चे को समझाती थी। यही नहीं, जब सुभाष बच्चों पर गुस्सा करता तो वह उसे भी समझाने की कोशिश करती थी। उसने बच्चों के साथ मारपीट नहीं की। उसने गांव के व्यक्ति से बच्चों के नाम पर बिस्किट और अपने लिए शराब मंगाई थी। कुछ बिस्किट बच्चों को दिए तो कुछ खुद खाए। बच्चों के सामने ही लगातार शराब भी पीता रहा।

बड़ी घटना को अंजाम दे सकता था सुभाष बाथम

बड़ी घटना को अंजाम दे सकता था सुभाष बाथम

उधर ऑपरेशन के बाद पुलिस ने सुभाष बाथम के घर से एक बोरी में सुतली बम समेत छोटे गैस सिलेंडर में भरा बारूद बरामद किया है। मौके पर बीडीएस टीम विस्फोटकों की जांच कर रही है और उन्हें डिफ्यूज कर रही है। घर की तलाशी के दौरान पुलिस ने 315 बोर की रायफल समेत तमंचा सहित एक दर्जन कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि मौजूदा गोला बारूद से आरोपी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता था। वहीं मौके पर डॉग स्क्वायड भी पहुंची है और सैम्पलिंग की कार्रवाई की जा रही है।

सबको मारकर घर उड़ा दूंगा

सबको मारकर घर उड़ा दूंगा

बता दें गुरुवार दोपहर घटना की जानकारी तब हुई, जब बच्चे अपने घर नहीं पहुंचे। काफी देर तक जब बच्चे घर नहीं लौटे तो पड़ोसी आदेश की पत्नी बबली अपनी पुत्री खुशी और बेटे आदित्य को बुलाने के लिए उसके घर पहुंच गई। उसने दरवाजा खटखटाया तो सुभाष ने खोलने से मना कर दिया। साथ ही कहा तुम्हारे ही नहीं सारे बच्चों को बंधक बना लिया है, सबको मार कर घर उड़ा दूंगा। वहीं, गांव वालों ने बात करने की कोशिश की तो सुभाष ने एक ग्रामीण के पैर में गोली मार दी।

पुलिस को दी सूचना

पुलिस को दी सूचना

लोगों को समझ नहीं आया क्या करें? आखिरकार पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। पुलिस के लिए 21 मासूमों को सही सलामत वापस निकालना चुनौती थी। मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई, सुभाष ने पुलिस पर भी फायरिंग शुरू कर दी। इतना ही नहीं उसने हथगोले भी फेंके। इस हमले में पुलिस के दो जवान घायल हो गए। हालांकि आठ घंटो के लंबे संघर्ष और सुभाष के एनकाउंटर के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन यह मामला बढ़ भी सकता था।

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