अभी तक नहीं धोई है पति की वर्दी, पढ़ें शहीद की पत्नी का भावुक पोस्ट

जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में हुए आतंकी हमले में मेजर गिरीश देश के लिए शहीद हो गए। उनके साथ सात जवान भी शहीद हुए। मेजर अक्षय के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी संगीता ने फेसबुक पर भावुक पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कहानी को लिखा है।

अभी तक नहीं धोई है पति की वर्दी, पढ़ें शहीद की पत्नी का भावुक पोस्ट

संगीता लिखती हैं- साल 2009 की बात है। मैं अक्षय के साथ चंडीगढ़ में आई थी, वहां से हम शिमला गए, लेकिन वहां कर्फ्यू लगा था। कर्फ्यू लगने की वजह से होटल जल्दी बंद हो गया था, जिसकी वजह से अक्षय ने मुझे घुटनों पर बैठकर लाल रंग की पेन ड्राइव देकर प्रपोज किया।

 साल 2011 में हुई थी शादी

साल 2011 में हुई थी शादी

संगीता आगे लिखती हैं, '' साल 2011 में हमारी शादी हो गई और हम दोनों पुणे में रहने लगे। शादी के दो साल बाद नैना ने जन्म लिया। सेना के काम अक्षय बाहर चले गए, मेरे ससुराल वालों मुझे बेंगलुरु आकर रहने की सलाह दी, लेकिन मैं वहीं रही।
संगीता के लिखा, साल 2016 में अक्षय की जम्मू कश्मीर के नगरोटा में पोस्टिंग हो गई और मैं और मेरी बेटी वहां रहने चले गए। हमें घर अलॉट नहीं हुआ था इसलिए ऑफिसर्स मेस में ही ठहरे।

सुनाई दी फायरिंग की आवाज

सुनाई दी फायरिंग की आवाज

संगीता ने आगे लिखा है कि कुछ समय बाद , ''29 नवंबर की सुबह 5.30 बजे फायरिंग की आवाज सुनाई दी और उठ गए। पहले हमें अंदाजा लगाया कि ये ट्रेनिंग का हिस्सा है। बाद में पता चला कि ये ट्रेनिंग नहीं है।

''हम सोच ही रहे थे कि कुछ जूनियर हमारे पास आए अक्षय को बोला कि आतंकियों ने तोपखाने की रेजिमेंट को बंधक बना लिया है। हमे जल्दी जाना होगा। सभी बच्चों और महिलाओं को एक कमरे में रखा गया था। हम लगातार फायरिंग सुन रहे थे। मैंने इस बारे में मेरी सास को मैसेज किया। मेरी ननद और मेरी सास से इस बारे में बातचीत होती रही। सुबह होती ही हमें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।''

दोपहर हो चुकी थी लेकिन अक्षय की कोई खबर नहीं थी, मैं अपने आपको नहीं रोक सकी और सुबह 11:30 बजे एक कॉल कराई। फोन किसी ओर ने उठाया और मुझसे कहा कि मेजर अक्षय को दूसरी जगह पर ले जाया गया है। करीब शाम 6:15 बजे, उसके कमांडिंग और कुछ अन्य ऑफिसर्स मुझसे मिलने आए।

शहीद हो गए मेजर

शहीद हो गए मेजर

उन्होंने मुझसे कहा, 'मैम हमने मेजर अक्षय को खो दिया है। उन्होंने कहा कि वो करीब सुबह 8:30 बजे शहीद हुए थे।' यह सुनते ही मेरी दुनिया ही ढह गई। मै सोच रही थी कि काश! मैंने उन्हें अलविदा कहकर गले लगाया होता। काश! मैंने उनसे आखिरी बार कहा होता कि मैं तुमसे प्यार करती हूं, लेकिन हम कभी भी चीजों को गलत नहीं होने की उम्मीद करते हैं।

संगीता कहती हैं, उन्हें मेजर अक्षय की वर्दी, कपड़े और सारी चीजे मिल गईं, इन सारी चीजों को उन्होंने कई वर्षों से सहेज कर रखी थीं। संगीत लिखती हैं उनका रेजिमेंट जैकेट आज तक धोया नहीं है और जब मुझे बहुत याद आती है, तो मैं इसे पहन लेती हूं। जिसमें अभी भी उसमें अक्षय की खुशबू आती है।

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