क्या है और कैसे काम करती है ‘प्रलय-घड़ी’?

25 जनवरी को 'प्रलय-घड़ी' दस सेकंड और खिसक गई और अंतिम समय यानी 12 बजने में 90 सेकंड रह गए. इसके बाद रूसी सरकार ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि परमाणु युद्ध को रोकने की कोशिशें की जानी चाहिए.
परमाणु वैज्ञानिकों ने इस प्रलय घड़ी का वक्त बदला है. दरअसल यह एक प्रतीकात्मक घड़ी है, जो दिखाता है कि मानव जाति अपने समूल नाश से कितनी दूर है. रात 12 बजे का समय उस वक्त का प्रतीक है जबकि प्रलय हो जाएगी और जीवन नष्ट हो जाएगा. 25 जनवरी को यह वक्त सिर्फ डेढ़ मिनट दूर रह गया था.
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प्रलय के ये खतरे राजनीतिक तनावों, हथियारों, तकनीक, जलवायु परिवर्तन और महामारी आदि से पैदा हो सकते हैं. वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं कि किसी खास वक्त पर खतरा कितना बड़ा और गंभीर है और उसके आधार पर ही घड़ी का वक्त बदला जाता है.
कैसे काम करती है घड़ी?
यह घड़ी बनाई है अमेरिका के शिकागो से काम करने वाले एक समाजसेवी संस्थान बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स ने. यह संस्था धरती पर जीवन को मौजूद खतरों का सालान आकलन करती है और उसके हिसाब से घड़ी का वक्त बदलती है.
खतरों का आकलन करने के लिए वैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों का एक समूह अध्ययन करता है. इन विशेषज्ञों में 13 नोबल पुरस्कार विजेताओं के अलावा परमाणु तकनीक और जलवायु परिवर्तन के जानकार भी शामिल हैं. यही लोग मिलकर तय करते हैं कि घड़ी पर कितना वक्त होना चाहिए.
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यह घड़ी 1947 में तैयार की गई थी. जिन वैज्ञानिकों ने मिलकर यह घड़ी बनाई थी उनमें सर्वकालीन महानतम वैज्ञानिकों में गिने जाने वाले अल्बर्ट आइंस्टाइन के अलावा वे वैज्ञानिक थे जिन्होंने मैनहटन प्रोजेक्ट में काम किया और दुनिया का पहला परमाणु बम बनाया था. इसी प्रोजेक्ट में बने बमों को नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराया गया था.
अब घड़ी में कितना बजा है?
25 जनवरी को घड़ी का वक्त बदला गया तब रात के 11.58.30 बज गए थे. यानी 12 बजने में 90 सेकंड बाकी थे. यह 12 बजे के अब तक का सबसे करीब वक्त है. इससे पहले सबसे करीब 2020 में हुआ था जब 12 बजने में सौ सेकंड का समय बाकी रह गया था.

ताजा वक्त को बदले जाने में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण पैदा हुए परमाणु युद्ध के खतरे को ध्यान में रखा गया है. हालांकि वैज्ञानिकों ने कहा है कि घड़ी का वक्त बदले जाने में यूक्रेन युद्ध एक कारक है और सिर्फ यही वजह नहीं है.
जब 75 साल पहले यह खड़ी बनाई गई थी तब सबसे पहले समय 11.53.00 रखा गया था यानी प्रलय से इंसान सात मिनट दूर था. हालांकि बाद में यह अवधि बढ़ गई थी और 1991 में शीत युद्ध के खत्म होने के बाद तो सबसे अधिक थी जबकि 12 बजने में 17 मिनट बाकी थे. तब अमेरिका और रूस के बीच स्ट्रैटिजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी हुई थी. इस समझौते के तहत दोनों सबसे बड़ी परमाणु ताकतों ने अपने परमाणु हथियार खत्म करने पर सहमति जताई थी.
वीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW
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