'नेपोटिज्म' पर ये क्या कह गए मनोज बाजपेयी, बोले- वो अपने ताऊजी के बेटे को ले रहा है तो......

Manoj Bajpayeee: मनोज बाजपेयी के अनुसार 'कनेक्शन और रिश्ते बनाना' इंडस्ट्री में बहुत ही सामान्य है। एक इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी समस्या एक दूसरे में भेदभाव करना ही है।

manoj bajpayee

Manoj Bajpayeee: बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी की एक्टिंग देखकर हर कोई उनकी तारीफ करेत नहीं थकता। मनोज बाजपेयी बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों से लेकर वेब शोज तक में काम कर चुके हैं। उन्होंने अपनी जानदार एक्टिंग से लोगों के मन में अलग छाप छोड़ी है। आज उनकी एक्टिंग की वजह से हर उन्हें हर कोई जानता है और उनकी तारीफ करता रहता है। हालांकि एक समय था जब मनोज बाजपेयी को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। मनोज बाजपेयी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत दिल्ली में थिएटर्स की मदद से की थी। इसके बाद वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई चले गए थे। फिल्म 'सत्या' से बॉलीवुड में अपना कदम जमाने वाले मशहूर एक्टर मनोज बाजपेयी को आज के समय में हर कोई जानता है। बड़े बड़े एक्टरों से लेकर फिल्म मेकर्स तक उनके साथ काम करना चाहते हैं। इसी बीच मनोज बाजपेयी ने फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म को लेकर एक बड़ी बात कही है।

नेपोटिज्म को कहा बेकार की बहस

नेपोटिज्म को कहा बेकार की बहस

बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी ने नेपोटिज्म को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक बेकार की बहस कहा है। मनोज बाजपेयी के अनुसार 'कनेक्शन और रिश्ते बनाना' इंडस्ट्री में बहुत ही सामान्य है। एक इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने ये भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी समस्या एक दूसरे में भेदभाव करना ही है।

'जीवन के हर स्तर पर निष्पक्षता जरूरी'

'जीवन के हर स्तर पर निष्पक्षता जरूरी'

मनोज बाजपेयी ने कहा कि केवल एक इंडस्ट्री से निष्पक्षता की मांग करना बिल्कुल सही नहीं है। विरोधाभास होता है लेकिन अगर कोई व्यक्ति निष्पक्षता मांग कर रहा है तो उसे जीवन के हर स्तर पर इसकी मांग करनी चाहिए। उनका कहना है कि नेपोटिज्म सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में नहीं है ये तो हर जगह है।

'अपने रिश्तेदारों को फिल्म में काम देना क्या बुरा है'

'अपने रिश्तेदारों को फिल्म में काम देना क्या बुरा है'

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा- नेपोटिज्म का ये भूत बेकार का है। इस पर बहस करना भी व्यर्थ है। हर इंडस्ट्री में कनेक्शन और रिश्ते काम करते हैं। उन्होंने आगे कहा- अगर आप किसी के साथ सहज महसूस करते हैं, तो आप उनके साथ और अधिक काम कर सकते हैं। अगर वो मेरी जगह अपने ताऊजी के लड़कों को फिल्म में लेने जा रहे हैं तो आराम से ले सकते हैं। उनका पैसा है वो जो चाहे कर सकते हैं।

'फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स अक्सर भेदभाव करते हैं'

'फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स अक्सर भेदभाव करते हैं'

मनोज बाजपेयी ने कहा- मेरे बजाय उनके रिश्तेदार उनकी फिल्म में काम कर सकते हैं। ये फैसला उनका है कि उनकी फिल्म में कौन काम करेगा क्योंकि पैसा भी उन्ही का है तो कहां खर्च करेंगे ये निर्णय उनका है। हालांकि मूल समस्या फिल्म प्रदर्शकों में है। फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स अक्सर भेदभाव करते हैं। जब उसे 100 स्क्रीन्स दे रहे हैं तो कम से कम मुझे 25 तो दो। उसी को सब दे दोगे तो मेरा क्या होगा। उन्होंने आगे कहा- जो जितना पावरफुल होता है वो अपना पावर का व्हील उतना घुमाता रहता है।

फिल्म 'गुलमोहर' में नजर आए मनोज बाजपेयी

फिलहाल मनोज बाजपेयी फिल्म 'गुलमोहर' में नजर आ रहे हैं। उनकी ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है। इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म में शर्मिला टैगोर, अमोल पालेकर, सूरज शर्मा, सिमरन और कावेरी सेठ भी नजर आ रहे हैं। इस फिल्म के डायरेक्टर राहुल वी चित्तेला हैं। इसके अलावा मनोज बाजपेयी जल्द ही बांदा, सूप, जोरम और डिस्पैच जैसी वेब सीरीज में नजर आ सकते हैं। इसके अलावा वह सुपरहिट वेब सीरीज 'फैमिली मैन' के तीसरे पार्ट में भी दिखाई देंगी।

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