यूक्रेन में इंडियन स्टूडेंट्स के साथ हो रहे 'रंगभेद' पर गुस्साईं सोनम कपूर, लिखी ये बात
नई दिल्ली, 08 मार्च। यूक्रेन पर रूस के हमले को पूरे 13 दिन बीत चुके हैं लेकिन वहां हालात में सुधार नहीं हो रहा है। वहां अभी भी भारतीय छात्र फंसे हुए है। भारत सरकार उन्हें भारत वापस लाने का लगातार प्रयास कर रही है। इस सबके बीच वहां पर मौजूद कई स्टूडेंट्स ने वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए है जिसमें साफ नजर आ रहा है उन्हें बॉडर तक पहुंचने के लिए ट्रेनों में चढ़ने नहीं दिया जा रहा, दुकानों और अन्य स्थानों पर उनसे भेदभाव किया जा रहा है। वहीं यूक्रेन के सूमी शहर में फंसे 700 भारतीय जिन्हें अब वापस लाने में कामयाबी मिल चुकी है, उनकी रिपोर्ट शेयर करते हुए एक्ट्रेस सोनम कपूर ने वहां हो रहे रंगभेद पर जमकर गुस्सा जताया है।

भारतीयों को दोनों तरफ से नस्लवाद का सामना करना पड़ रहा है
सोनम कपूर ने पूर्वी यूक्रेन के सूमी शहर में फंसे 700 भारतीय छात्रों के बारे में एक समाचार रिपोर्ट साझा की। रिपोर्ट को साझा करते हुए लिखा "भारतीयों को दोनों तरफ से नस्लवाद का सामना करना पड़ रहा है।

सोनम कपूर ने लिखा यह "घृणित है जिस तरह से....
सोनम कपूर ने लिखा यह "घृणित है जिस तरह से रंगभेद का लोगों के साथ व्यवहार किया जा रहा है। सोनम द्वारा अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर साझा की गई समाचार रिपोर्ट बताया गया है कि भारत ने कहा है कि यह वह बहुत चिंतित है रूस और यूक्रेन दोनों के बार-बार आग्रह करने के बावजूद, पूर्वी यूक्रेनी शहर सूमी में फंसे भारतीय छात्रों के लिए सुरक्षित गलियारा नहीं मिला है। अभी भी 700 से अधिक भारतीय छात्र अभी भी निकाले जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। "

ये ही सच्चाई बयां कर रही हैं
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम ने लिखा, 'भारतीय लड़ाई के दोनों ओर से नस्लवाद का सामना कर रहे हैं। जिस तरह से लोगों के साथ व्यवहार किया गया है, वह निंदनीय है खबरें तो यही दोहरा रही हैं, ये ही सच्चाई बयां कर रही हैं।

सोनू सूद ने यूक्रेन के खार्किव में फंसे छात्रों की है मदद
बता दें बीते सप्ताह सोनू सूद ने युद्धग्रस्त यूक्रेन के खार्किव शहर में फंसे भारतीय छात्रों को पोलिश सीमा तक पहुंचने और सुरक्षित अपने घर लौटने में मदद करने के बाद सुर्खियां बटोरीं थी। सोनू ने बताया कि वह स्थानीय टैक्सियों को छात्रों के स्थान पर भेजने में कामयाब रहे, जहां से उन्हें खार्किव में रेलवे स्टेशन ले जाया गया। वहां से वो ट्रेन से अपने विवि शहर में एक सुरक्षित स्थान पर गए, जहां उन्हें पोलिश सीमा तक पहुंचने के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी।












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