अलविदा शेफाली जरीवाला: रीमिक्स कल्चर की पहली आइकन, कैसे 19 साल की लड़की ने बदले ट्रेंड्स

भारतीय सिनेमा का इतिहास 100 सालों का है। जिसमें कई सारे लीजेंड्स ने अपना योगदान दिया। इस सिनेमाई इतिहास से सामाजिक बदलाव और नए फैशन की बहार भी आई। इसमें बेलबॉटम पैंट पहनने से लेकर सलमान खान की 'तेरे नाम' वाली हेयर स्टाइल शामिल है। ऐसे गानों का भी चलन रहा। जिस तरह 60-70 के दशक में मुकेश के दर्द भरे नगमे सुने गए।

उसी तरह 'शोले' का 'महबूबा-महबूबा' भी सुना गया। हालांकि इसे आइटम सॉन्ग की कैटेगरी में डाल दिया गया। लेकिन ये कोई नई बात नहीं है। भारतीय सिनेमा में हर दौर में ये रेलेवेंट रहा है। मसलन 'हावड़ा ब्रिज' जो 1958 में आई थी, उसका गाना'मेरा नाम चिन-चिन चू' को भी जानकार आइटम सॉन्ग बताते हैं। ये आइटम सॉन्ग में मेनस्ट्रीम की एक्ट्रेसेस पर भी फिल्माए गए हैं।

Shefali Jariwala life story

ख़ैर, हर दशक में इसमें कुछ न कुछ नया और आज की भाषा में कहें तो ट्रेंडी देखने और सुनने को मिलता रहा है। ऐसा ही कुछ साल 2002 में हुआ। 19 साल की लड़की शेफाली जरीवाला का गाना आता है। कांटा लगा। वो गाना जिसने बॉलीवुड के इतिहास में कुछ नए बदलाव जोड़े। या यूं कहें कि कुछ नई शुरुआत की।

कांटा लगा का वीडियो तब आया जब 80 के दशक के लड़के अपनी जवानी के दहलीज में पहुंच रहे थे। तब एक लड़की अपनी जींस के पीछे अंग्रेजी मैग्जीन खोंसे , एक क्लब के अंदर निहार रही है। दूसरे ही फ्रेम में वो वही ड्यून मैग्जीन को पढ़ रही है। फिर गाना शुरू होता है। तभी दिखता है उसने अपने बांह में कुछ लिखवा हुआ है। तब पता चलता है कि वो टैटू है। जिस तरह 2000 के दशक बच्चों के लिए 'आशिक बनाया आपने' अश्लील गाना था। उसी तरह शेफाली का ये गाना भी उस दौर के कुछ बच्चों के लिए अश्लील गाने के पैमाने में आ रहा था।

वहीं, इस गाने के आने के बाद आर्केस्ट्रा वालों की चांदी हो गई थी। उस दौर के युवा भी इसे अपनी पार्टियों में बजा कर नाचा करते थे। ये सब 2002 में हो रहा था। इस बदलाव को लाने वाली 19 साल की लड़की शेफाली जरीवाला थी। जो टैटू बनवा रही थी, क्लब जा रही थी और साथ में लड़कों को अपने एक्शन से 'हूल' भी दे रही थी। जिसने अल्हड़ता और आजाद ख्याल रखने वाली लड़कियों को फिर से पर दे दिए थे।

शेफाली का ये गाना 1972 में आई फिल्म 'समाधि' का गीत 'कांटा लगा' से प्रेरित लगता है। लेकिन इंडिपेंडेंट गाना था। इस गाने के बाद ही बॉलीवुड में रीमिक्स कल्चर शुरू हुआ। शहरों में कई टैटू और डांस स्टूडियो भी खुले। 'कांटा लगा' गाने से जितनी शेफाली जरीवाला को पहचान मिली, उतनी ही नई चीजें उस दौर के युवाओं को भी मिली। ये वही दौर था, जब राखी सावंत की आइटम सॉन्ग में एंट्री हो चुकी थी। 2004 में फिल्म "चोरी चोरी" के "मोहब्बत है मिर्ची" से उन्होंने डेब्यू किया। लोगों को राखी सावंत याद रहीं, रीमिक्स कल्चर याद रहा और याद रहा टैटू बनवाना। लेकिन जिसने इसकी नीव रखी, हमने उसे भुला दिया। क्यों? क्योंकि हम इंसान हैं और भूल जाने में हमारी महारत हासिल है। लेकिन शेफाली समय-समय में हम सबको अपने आप के होने का ऐहसास दिलाती रहीं।

अंत में इतना ही, राह में अगर कांटा आ जाए तो वो सफर को जख्मी कर देता है। लेकिन एक कांटा, एक लड़की की शोहरत और कई सारे बदलावों को जन्म दे गया।

अलविदा शेफाली।

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