Ramayan के 'भरत' Sanjay Jog की दर्दनाक मौत से सहम गए थे लोग, खेती कर ऐसे बदली किस्मत, फिर लुट गया सब
Ramayan Bharat Sanjay Jog: भारतीय टेलीविजन के इतिहास में 'रामायण' का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर की इस कालजयी कृति ने न सिर्फ दर्शकों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ा था बल्कि इसके कलाकारों को अमर बना दिया था। जहां अरुण गोविल को आज भी भगवान राम और दीपिका चिखलिया को माता सीता के रूप में याद किया जाता है, वहीं 'भरत' का किरदार निभाने वाले संजय जोग ने भी दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी।
भरत के किरदार में जान डाल दी, हर आंख नम कर दी
संजय जोग ने टीवी के मशहूर पौराणिक धारावाहिक 'रामायण' में 'भरत' के किरदार को जिस भावनात्मक गहराई से निभाया था, उसने दर्शकों को भीतर तक छू लिया था। भाई के प्रति समर्पण और त्याग की भावना को उन्होंने इतने सजीव तरीके से प्रस्तुत किया था कि हर एपिसोड में दर्शकों की आंखें नम हो जाती थीं।

संजय जोग की एक्टिंग ने जीता था लोगों का दिल
राम के वनवास के बाद भरत द्वारा सिंहासन ठुकराकर खड़ाऊं को राजगद्दी पर स्थापित करने का दृश्य आज भी भारतीय टीवी के सबसे भावुक पलों में गिना जाता है और इस अमर दृश्य के पीछे संजय जोग की सशक्त अदाकारी थी।
एक्टर बनने से पहले किसान थे संजय जोग
ये जानकर कई लोग हैरान रह जाते हैं कि संजय जोग का पहला परिचय एक अभिनेता के रूप में नहीं बल्कि एक किसान के रूप में था। अभिनय में कदम रखने के बाद भी उन्होंने खेती-किसानी से नाता नहीं तोड़ा था। उनके पास अपना फार्म और पोल्ट्री बिजनेस भी था जिसे वह बराबर संभालते रहे थे।
नागपुर से मुंबई तक का सफर और एक्टिंग में एंट्री
-24 सितंबर 1955 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे संजय जोग ने शुरुआती पढ़ाई वहीं पूरी की थी। इसके बाद वह आगे की शिक्षा के लिए मुंबई आए थे, जहां उन्होंने एल्फिनस्टोन कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की थी।
-हालांकि संजय जोग का मकसद एक्टर बनना नहीं था लेकिन अभिनय के प्रति रुचि उन्हें फिल्मालय स्टूडियो तक ले गई, जहां उन्होंने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। इसी दौरान उन्हें पहली मराठी फिल्म 'सपला' मिली लेकिन दुर्भाग्य से ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थी।
पहली असफलता से टूटे, फिर खेती की राह पकड़ी
-पहली फिल्म के फ्लॉप होने का असर संजय जोग पर गहरा पड़ा था। वह निराश होकर वापस नागपुर लौट गए थे और दोबारा खेती-बाड़ी में जुट गए थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कुछ समय बाद जब वह मुंबई लौटे तो उन्हें एक मल्टी-स्टारर मराठी फिल्म मिली, जिसने जबरदस्त सफलता हासिल की थी।
-इसके बाद संजय जोग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और करीब 30 मराठी फिल्मों में काम किया। साथ ही हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
ऐसे मिला था 'रामायण' में 'भरत' का रोल
-संजय जोग का 'रामायण' तक पहुंचने का सफर भी दिलचस्प है। एक गुजराती फिल्म में निभाए गए उनके अभिमन्यु के किरदार ने उन्हें पहचान दिलाई थी। इसी दौरान रामायण के मेकअप आर्टिस्ट गोपाल दादा की नजर उन पर पड़ी थी, जिन्होंने उन्हें रामानंद सागर से मिलने की सलाह दी थी।
-संजय जोग की तस्वीरें देखने के बाद रामानंद सागर प्रभावित हुए थे और उन्हें शो के लिए ऑडिशन का मौका मिला था। उन्होंने लक्ष्मण, मेघनाद और भरत, तीनों किरदारों के लिए ऑडिशन दिया था। हालांकि उन्हें लक्ष्मण का रोल ऑफर हुआ था लेकिन बिजी शेड्यूल के चलते उन्होंने भरत का किरदार चुना, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया था।
अधूरी रह गई जिंदगी, मिली दर्दनाक मौत
-संजय जोग की जिंदगी में सब कुछ पटरी पर लौट चुका था। वह अभिनय और खेती, दोनों को साथ लेकर चलना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। 27 नवंबर 1995 को लीवर की बीमारी के कारण अचानक ही उनका निधन हो गया।
-संजय जोग जिंदगी में बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन लीवर की बीमारी ने उन्हें आखिरी दिनों में काफी परेशान कर दिया था। इस बीमारी के चलते ही उन्हें एक दर्दनाक मौत नसीब हुई थी। उनके पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी रह गए। उनके बेटे रंजीत जोग ने भी अभिनय की दुनिया में कदम रखा है।
आज भी जिंदा है भरत का किरदार
भले ही संजय जोग आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन 'रामायण' में निभाया गया उनका 'भरत' का किरदार आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। ये किरदार न सिर्फ त्याग और समर्पण की मिसाल है बल्कि भारतीय टेलीविजन इतिहास का एक अमिट अध्याय भी है।













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