Piyush Pandey Tribute: 'वह रचनात्मक प्रतिभा, जिसने भारतीय विज्ञापन जगत को नई परिभाषा दी'
Piyush Pandey Tribute: भारतीय विज्ञापन की दुनिया के सबसे प्रख्यात 'सितारे' पीयूष पांडे अब हमारे बीच नहीं है। उनका जाना विज्ञापन जगत के लिए दुखद भरी खबर रही। उन्होंने विज्ञापनों की भाषा, दिल और हंसी को पूरी तरह बदल दिया। 24 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को उनका निधन हो गया। वे पीछे छोड़ गए एक ऐसी याद, जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित और आकार देती रहेगी।
पीयूष पांडे, ओगिल्वी इंडिया के मुख्य रचनात्मक अधिकारी (सीसीओ) और दुनिया भर में कार्यकारी अध्यक्ष रहे। उन्होंने कंपनी को भारत का नंबर-1 रचनात्मक केंद्र बना दिया। चार दशकों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 1,000 से अधिक पुरस्कार जीते, जिनमें कान्स लायंस और एबीबीवाई जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। उन्होंने कान्स लायंस फेस्टिवल ऑफ क्रिएटिविटी में एशिया के पहले जूरी अध्यक्ष के रूप में इतिहास रचा, जो उनके वैश्विक प्रभाव की स्पष्ट मिसाल है।

- 40 साल से ज्यादा का करियर
- 1000 से ज्यादा पुरस्कार जीते (कान्स लायंस, एबीबीवाई आदि)
- कान्स लायंस में एशिया के पहले जूरी अध्यक्ष बने
असली कमाल: भारत को अपनी भाषा में प्यार करना सिखाया
- पुरस्कारों से ज्यादा, पीयूष पांडे ने भारत को अपनी ही आवाज से प्यार करना सिखाया। हिंदी में विज्ञापन बनाकर पश्चिमी स्टाइल से अलग हटे
- रोजमर्रा की जिंदगी को विज्ञापनों में ढाला। फेविकोल के अटूट और मजेदार हास्य से लेकर कैडबरी डेयरी मिल्क के दिल छू लेने वाले गीत 'कुछ खास है जिंदगी में' तक, उनका हर काम भारत की सामूहिक स्मृति का अभिन्न हिस्सा बन गया।
उद्योग के दिग्गजों की श्रद्धांजलि
आंद्रे टिमिन्स (सह-संस्थापक, विजक्राफ्ट इंटरनेशनल एंटरटेनमेंट)
'आज हम पीयूष पांडे के जीवन और विरासत का सम्मान करते हैं - एक रचनात्मक शक्ति जिसका प्रभाव पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा।
उन्होंने सिर्फ विज्ञापन नहीं बनाए, बल्कि सांस्कृतिक कसौटियां गढ़ीं। उनकी रचनात्मक भाषा भारतीय जीवन में रची-बसी थी - सरल, ईमानदार, मजाकिया और गहरी मानवीय।
वे अपने पीछे ऐसे अभियान छोड़ गए हैं जिन्होंने लोकप्रिय संस्कृति को आकार दिया, और रचनात्मक लोगों की एक पूरी पीढ़ी जिनके मार्ग उनके उदाहरणों से रोशन हुए।'
नेविल शाह (लेखक, निर्देशक और हास्य कलाकार)
'मुझे यकीन नहीं कि कोई शब्द उस भावना को व्यक्त कर पाएंगे जो हमारे उद्योग और हम सभी के लिए है - हम जो उनके शब्दों, काम और गर्मजोशी के साथ पले-बढ़े हैं।
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जाते समय एक पूरी पीढ़ी का हिस्सा अपने साथ ले जाते हैं। पीयूष ऐसे ही थे।'
सुजय राछ (मुख्य विपणन अधिकारी, नुवामा समूह)
'पीयूष पांडे जैसे लोग वास्तव में कभी नहीं जाते। वे जो रचते हैं - उनका काम, सिद्धांत और संस्कृति - उनसे कहीं आगे तक जीवित रहती है।
वे भारतीय विज्ञापन जगत का विवेक और व्यावहारिक ज्ञान थे - एक सच्चा संस्थान जिसने समान रूप से प्रशंसा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रेरित किया।'
सम्मान और नेतृत्व की मिसाल
भारतीय संचार में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया रचनात्मकता का प्रतीक बन गया - जमीनी, प्रामाणिक और गर्व से भारतीय।
डिजिटल श्रद्धांजलि: इटरनल ट्रिब्यूट पेज
उद्योग के सहयोगी और प्रशंसक उनके इटरनल ट्रिब्यूट पेज पर संदेश, यादें और भावभीनी श्रद्धांजलियां साझा कर रहे हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के महानतम रचनात्मक दिमागों में से एक की स्मृति को जीवंत रखने का माध्यम बन गया है। यहां क्लिक करके आप भी अपनी श्रद्धांजलि साझा कर सकते हैं: पीयूष पांडे इटरनल ट्रिब्यूट पेज।
अमिट विरासत और भविष्य की प्रेरणा
पीयूष पांडे के निधन से एक ऐसा शून्य पैदा हुआ है जिसे भरना बहुत कम लोगों के बस की बात है। फिर भी, उनकी विरासत - उनकी हंसी, मार्गदर्शन और भारत का जश्न मनाने वाली कहानियों में उनका अटूट विश्वास - आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को प्रेरित करती रहेगी।
पीयूष पांडे, भारतीय विज्ञापन जगत के हृदय और आवाज, शक्ति में शांति पाएं।
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