इस फेमस एक्ट्रेस के कारण पंकज धीर के परिवार का हो गया था ऐसा हाल, डूब गया था सारा पैसा और फिर जो हुआ
Pankaj Dheer Death: 'महाभारत' में सूर्यपुत्र कर्ण का किरदार निभाने वाले पंकज धीर ने अपनी एक्टिंग से घर-घर में पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर से पूरा फिल्म जगत सदमे में है। लाखों लोग उन्हें आज भी कर्ण के रूप में याद करते हैं।
पंकज धीर के नाम के मंदिर
इतना ही नहीं, करनाल और बस्तर जैसे शहरों में पंकज धीर के नाम के मंदिर तक बने हुए हैं, जहां लोग उन्हें भगवान कर्ण के रूप में पूजते थे। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक दौर ऐसा भी था जब पंकज धीर के परिवार को पैसों की तंगी का सामना करना पड़ा था।

गीता बाली की वजह से पंकज धीर के परिवार पर टूटा था ये संकट
पंकज धीर और उनके परिवार की खराब हालत की वजह बनी थीं फेमस एक्ट्रेस गीता बाली। पंकज धीर के पिता सीएल धीर उस दौर के लोकप्रिय डायरेक्टर थे। उन्होंने दिग्गज फिल्ममेकर वी शांताराम के साथ काम करने के बाद कई फिल्में डायरेक्ट और प्रोड्यूस कीं थी, जिनमें 'बहू बेटी', 'रैन बसेरा', 'आखिरी रात' और 'जिंदगी' जैसी फिल्में शामिल हैं।
गीता बाली के साथ फिल्म बनाना चाहते थे पंकज धीर के पिता
लेकिन जब सीएल धीर ने गीता बाली के साथ फिल्म 'रानो' बनाने का फैसला किया, तो किस्मत ने उन्हें ऐसा झटका दिया कि परिवार को सबकुछ गंवाना पड़ गया था।
फिल्म 'रानो' के पीछे की दर्दभरी कहानी
-एक इंटरव्यू में पंकज धीर ने बताया था कि उनके पिता और गीता बाली फिल्म 'रानो' के को-प्रोड्यूसर थे। दोनों ने बराबर पैसा लगाया था और निर्देशन की जिम्मेदारी सीएल धीर ने संभाली थी।
-फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी। सिर्फ तीन दिनों की शूटिंग बाकी थी, जो गीता बाली के हिस्से में थी। लेकिन तभी गीता बाली पंजाब में चेचक (स्मॉलपॉक्स) की चपेट में आ गई थीं।
मौत की कगार पर किया गया ऐसा वादा
बीमारी की खबर मिलते ही गीता बाली को मुंबई लाया गया था लेकिन उनकी हालत बिगड़ती चली गई। पंकज धीर ने बताया था- अपने अंतिम समय में गीता बाली ने मेरे पिता से कहा था कि मेरे जाने के बाद इस फिल्म को छोड़ दीजिए और मेरे पिता ने उस वादे को निभाया था। ऐसे में गीता बाली के निधन के बाद फिल्म 'रानो' अधूरी रह गई थी।
दिलीप कुमार और मीना कुमारी की गुजारिश भी नहीं मानी
-पंकज धीर ने बताया कि गीता बाली की मौत के बाद दिलीप कुमार और मीना कुमारी उनके पिता से मिलने आए थे। उन्होंने अनुरोध किया कि फिल्म को मीना कुमारी के साथ पूरा कर लिया जाए ताकि इतनी मेहनत और पैसा व्यर्थ न जाए।
-दिलीप कुमार ने तो ये सुझाव तक दिया था कि वह पर्दे पर आकर दर्शकों से आग्रह करेंगे कि मीना कुमारी को इस रोल में स्वीकार करें।
लेकिन सीएल धीर अपने वादे से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा था- ये फिल्म गीता बाली के साथ ही खत्म हो गई थी।
-पंकज धीर ने आगे बताया- नतीजा ये हुआ कि फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई और पूरा पैसा डूब गया। परिवार पर आर्थिक संकट टूट पड़ा और सीएल धीर गहरे अवसाद में चले गए थे।
मुश्किल हालात में परिवार का सहारा बने थे पंकज धीर
उस मुश्किल वक्त में परिवार को संभालने की जिम्मेदारी कम उम्र के पंकज धीर ने उठाई थी। उन्होंने बताया था कि पैसों की तंगी के कारण उन्हें बहुत जल्द काम शुरू करना पड़ा था ताकि घर चल सके। ये घटना उनके जीवन का वह मोड़ थी, जिसने उन्हें जिम्मेदार और मजबूत बना दिया था।
आखिरकार कैंसर से हार गए पंकज धीर
-गत 15 अक्टूबर 2025 को 68 वर्ष की उम्र में पंकज धीर का निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। कुछ साल पहले वह इस बीमारी से ठीक हो चुके थे, लेकिन हाल के महीनों में कैंसर फिर से लौट आया (रीलैप्स) और उनकी हालत बिगड़ती चली गई।
-डॉक्टरों ने पंकज धीर की सर्जरी भी की थी लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। पंकज धीर की जिंदगी ये सिखाती है कि सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी होती है।
-पंकज धीर के पिता का गीता बाली से किया गया वादा भले ही परिवार के लिए आर्थिक संकट लेकर आया था लेकिन उस ईमानदारी और इंसानियत की मिसाल आज भी याद की जाती है।












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