Manoj Kumar Net Worth: 'रईस नहीं देशभक्त कलाकार', जानिए कितनी संपत्ति छोड़ गए मनोज कुमार
Manoj Kumar: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता, लेखक-निर्देशक मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। 87 साल की उम्र में उन्होंने आज मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में लंबी सांस ली। दिग्गज नेता के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर फैल गई है। पीएम मोदी ने भी भारत के इस महान कलाकार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
अपने करियर के दौरान, उन्होंने हिंदी सिनेमा में देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्मों के माध्यम से एक अमिट छाप छोड़ी, जिससे उन्हें 'भारत कुमार' के नाम से जाना जाने लगा। एक वक्त था जब बॉलीवुड में तीन कुमार का दबदबा था और वो तीन कुमार थे- दिलीप कुमार, राजकुमार और मनोज कुमार।

ब्लैक एंड व्हाईट सिनेमा से लेकर कलर फिल्मों के दौर में, मनोज कुमार ने हमेशा खुद को अव्वल साबित किया था। मनोज कुमार ने हिंदी फिल्म जगत के हर छोटे -बड़े कालाकार के साथ काम किया है। उन्हें 1992 में पद्म श्री और 2015 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
2013 में मनोज कुमार की संपत्ति लगभग $20 मिलियन थी (Manoj kumar)
मनोज कुमार की कुल संपत्ति के बारे में विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े मिलते हैं। सेलिब्रिटी नेटवर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 में उनकी संपत्ति लगभग $20 मिलियन थी। हालांकि, 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, उनके शेयर होल्डिंग्स की कुल संपत्ति लगभग ₹183.9 करोड़ थी।
उनकी असली कमाई लोगों का प्यार था, जो उन्होंने देशभक्त कलाकार के रूप में भरपूर कमाया, वो महंगे कलाकार कभी नहीं रहे बल्कि वो शानदार अभिनेता के तौर पर हमेशा जाने गए।

'भगत सिंह' बनकर जीता लोगों का दिल (Manoj kumar)
वैसे तो मनोज कुमार ने पर्दे पर कई किरदार निभाए लेकिन लोग उन्हे 'भगत सिंह' के रूप में आज भी याद करते हैं। साल 1965 में, उन्होंने भगत सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म 'शहीद' में काम किया था, जो कि उनके करियर की माइल स्टोन साबित हुई।
साल 1967 में, उन्होंने 'उपकार' फिल्म का निर्देशन और अभिनय किया, जो 'जय जवान जय किसान' के नारे से प्रेरित थी। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
मनोज कुमार की जगह भारत कुमार कहते थे (Manoj kumar)
इसके बाद, 'पूरब और पश्चिम' (1970), 'शोर' (1972), 'रोटी कपड़ा और मकान' (1974), 'सन्न्यासी' (1975) और 'क्रांति' (1981) जैसी फिल्मों में उन्होंने निर्देशन और अभिनय किया, जो सामाजिक और देशभक्ति विषयों पर केंद्रित थीं और इसी वजह से लोग उन्हें मनोज कुमार की जगह भारत कुमार कहने लगे थे। उनके जाने से फिल्मी दुनिया को एक बड़ी क्षति पहुंती है, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।












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