BMC की योजनाओं पर बवाल, बैंक निजीकरण, जमीन उपयोग और सेवन हिल्स अस्पताल मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की सुधार समिति की अहम बैठक से एक दिन पहले ही कई नागरिक प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने ब्लड बैंकों के कथित निजीकरण, खुले मैदानों के उपयोग में बदलाव और सेवन हिल्स अस्पताल को निजी संचालन में देने जैसे प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया है।
ब्लड बैंकों के निजीकरण पर विपक्ष का हमला
सबसे बड़ा विवाद बीएमसी संचालित ब्लड बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर है। आरोप है कि इन ब्लड बैंकों को गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के जरिए संचालित करने की योजना है, जिससे सेवाएं मुफ्त रहने के बजाय करीब 1,100 रुपये तक शुल्क वसूला जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने इसे "मुंबई के खून का व्यावसायीकरण" बताते हुए तीखा विरोध किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सेवाएं अब तक मुफ्त थीं, उन्हें निजी हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है।

मनोरंजन मैदानों के उपयोग में बदलाव पर विवाद
प्रस्तावित बदलावों में मलाबार हिल (डी वार्ड) के दो मनोरंजन भूखंडों को आवासीय उपयोग में बदलने की योजना भी शामिल है। इसके अलावा बांद्रा पश्चिम के एक प्रमुख मनोरंजन मैदान को प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्र में विकसित करने का प्रस्ताव है।
विपक्ष का कहना है कि ये मैदान पहले से ही खेल और सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे बदलाव से बांद्रा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में भीड़भाड़ और बढ़ सकती है तथा खेल सुविधाओं पर असर पड़ेगा।
सेवन हिल्स अस्पताल के निजीकरण पर सियासी घमासान
मारोल स्थित 1,500 बिस्तरों वाले सेवन हिल्स अस्पताल को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी संचालक को सौंपने के प्रस्ताव पर भी विरोध तेज है।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इसे "महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति का आत्मसमर्पण" बताया है। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल पूरी तरह बीएमसी के स्वामित्व और संचालन में रहे।
कोविड अनुभव का हवाला देकर बीएमसी संचालन की वकालत
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी ने इस अस्पताल का सफल संचालन किया था, जो यह साबित करता है कि निगम इसे स्वतंत्र रूप से बेहतर तरीके से चला सकता है। कांग्रेस नेता अशरफ आज़मी ने भी कहा कि मुंबई को मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे की जरूरत है, न कि जरूरी सेवाओं के और निजीकरण की।
बैठक से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव
सुधार समिति की बैठक में इन सभी प्रस्तावों पर चर्चा होनी है, लेकिन उससे पहले ही विपक्ष के कड़े रुख ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि प्रस्ताव आगे बढ़ाए गए तो वे कड़ा विरोध जारी रखेंगे।













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