Laapataa Ladies: 'बुर्का सिटी के सीन लापता लेडीज में हूबहू कॉपी किए', अरेबिक डायरेक्टर का दावा
Laapataa Ladies Controversy: साल 2024 में आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी किरण राव की फिल्म 'लापता लेडीज' रिलीज हुई। इस फिल्म को खूब सराहा गया। कहा गया कि ये साल की सबसे खूबसूरत फिल्म है। हालांकि दर्शक इसे सिनेमाघर में नहीं गए। जब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई, तब इसने व्यूअरशिप के कई रिकॉर्ड बनाए। लंबे समय तक ये फिल्म ट्रेंडिंग में रही। लेकिन धीरे धीरे फिल्म के साथ विवाद जुड़ना भी शुरू हो गया।
कभी फिल्म की स्क्रिप्ट को चोरी का बताया गया, तो कभी कॉन्सेप्ट। बीते दिनों इस विवाद में नई फिल्म का नाम जुड़ा। बुर्का सिटी, अरेबिक फिल्म जिसे फ्रैब्रिस ब्रैक (Fabrice Bracq) सोशल मीडिया पर यूजर्स कहने लगे इस फिल्म से लापता लेडीज की कहानी ली गई है। फिर राइटर विप्लव गोस्वामी ने फिल्म से जुड़े कुछ डॉक्यूमेंट्स सबके सामने रखे। लेकिन अब इस विवाद में बुर्का सिटी के डायेरक्टर फैब्रिस ब्रैक ने रिएक्ट किया है।

इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट से फैब्रिस ने बात की। इसमें उन्होंने कहा, मैं फिल्म देखने से पहले ही हैरान था। मुझे इस बात से हैरानी थी कि फिल्म की पिच मेरी शॉर्ट फिल्म बुर्का सिटी से कितनी मिलती थी। जब मैंने फिल्म देखी तो और ज्यादा हैरान हुआ। भले ही कहानी को भारत की संस्कृति से जोड़ा गया है। लेकिन फिल्म में कई सारी चीजें मेरी शॉर्ट फिल्म से मिलती जुलती हैं। दयालु, प्यार करने वाला भोला पति जो अपनी पत्नी को खो देता है। जो दूसरा पति है वो हिंसक है। पुलिस स्टेशन और ऑफिसर के सीन भी बहुत अच्छे हैं। एक करप्ट और डराने वाला, जो दो तरफ से घिरा हुआ है। घूंघट वाली महिला की फोटो भी फिल्म का अच्छा मोमेंट है।
बुर्का सिटी का एक सीन
फैब्रिस ने आगे कहा, एक सीन में दयालु पति जिस तरह से अपनी पत्नी को अलग-अलग दुकानों में जाकर खोजा है। दुकानदारों को अपनी बीवी की घूंघट वाली फोटो दिखाता है। ठीक ऐसा ही सीन मेरी शॉर्ट फिल्म में भी है। उसी समय दुकानदार की पत्नी बुर्का पहनकर बाहर आती है। फिल्म की एंडिंग भी एक जैसी है। जिसमें पता चलता है कि खुद पत्नी अपने हिंसक पति से भागने का फैसला करती है। फिल्म का मैसेज भी सेम है ये मेरे लिए हैरानी की बात है।
विवाद खड़े होते ही फिल्म लापता लेडीज के राइटर विप्लव गोस्वामी ने भी रिएक्ट किया था। पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने बताया लापता लेडीज की कहानी को वो साल 2014 में रजिस्टर करवा चुके थे। 2018 में जब कहानी आगे बढ़ाई तब इसका नाम टू ब्राइड्स रखा था। साथ ऑफिशियल करवाया था। पोस्ट में आगे लिखा, 3 जुलाई 2014 को मैंने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में फिल्म का सिनॉप्सिस रजिस्टर करवाया था। जिसकी स्टोरी का टाइटल 'टू ब्राइड्स' था। रजिस्टर सिनॉप्सिस में भी एक सीन बताया गया था। जिसमें दूल्हा गलत दुल्हन को घर ले आता है। यहीं से कहानी की शुरुआत होती है। उसी सिनॉप्सिस में मैंने लिखा था कि दूल्हा परेशान होकर पुलिस वाले के पास जाता है। जहां वो दुल्हन की फोटो दिखाता है। लेकिन चेहरे पर घूंघट दिखता है, जिसके बाद फिल्म में कॉमेडी सिचुएशन बनती है।
विप्लव गोस्वामी का स्टेटमेंट
राइटर ने आगे कहा, घूंघट और भेस बदलने के कॉन्सेप्ट वाली कहानी कहना एक क्लासिक फॉर्म है। जिसे विलियम शेक्सपियर, एलेक्जेंडर डुमास और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे कई बड़े राइटर्स ने यूज किया है। लापता लेडीज भी इस गलत पहचान के कॉन्सेप्ट का यूज कर ओरिजिनल और यूनिक केरेक्टर, सेटिंग, नैरेटिव जर्नी के साथ सोशल इम्पेक्ट भी करती है। सालों की रिसर्च से स्टोरी, डायलॉग्स, केरेक्टर्स और सीन बनकर तैयार हुए हैं। फिल्म की हमारी कहानी और डायलॉग 100 प्रतिशत ओरिजनल हैं। प्लेगेरिज्म के आरोप गलत हैं।












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