Kesari Chapter 2 Review: चीखों, बेबसी और हत्याकांड के बरसों के दर्द की कहानी, जिसे सुनाया धीरे-धीरे साइयां
मूवी रिव्यू- केसरी चैप्टर 2
कास्ट- अक्षय कुमार, अनन्या पांडे, आर माधवन और अमित सियाल
डायरेक्टर- करण सिंह त्यागी
रेटिंग्स- 3.5 स्टार्स
Kesari Chapter 2 Review: आज एक फिल्म देख, केसरी चैप्टर 2। ये कहानी है सी शंकरन नायर की जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का केस ब्रिटिश आर्मी के खिलाफ लड़ा था। सी शंकरन नायर के बारे में हम बहुत कुछ जानते नहीं है। हो ये भी सकता है कि कई लोगों ने उनका नाम भी नहीं सुना होगा। ये फिल्म उन्हीं के बारे में हैं। दरअसल, सी शंकरन नायर एक लॉयर थे और ब्रिटिश काउंसिल में एकलौते भारतीय थे। पंजाब के गवर्नर के पक्ष में केस लड़कर जीतने के बाद उन्हें 'सर' की उपाधि दी थी। जब उन्हें इस उपाधि से नवाजा जा रहा था, उसी दिन 13 अप्रैल 1919 में जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे और मासूम लोगों को गोलियों से भूना था।

कहानी परगट सिंह के विश्वास और क्रांतिकारी सोच की
केसर चैप्टर 2 की असली कहानी यहीं से शुरू होती है। जहां एक तरफ हत्याकांड के बाद लोगों को मुआवजे में चंद पैसे दिए जा रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ के बच्चा जिसकी उम्र यही कोई 12-15 बरस की होगी। वो काउंसिल के बाहर पेंटिंग कर हत्याकांड के बारे में बताना चाहता है। जिसके हौसले बुलंद थे, क्योंकि उसके पिता भी क्रांतिकारी थे। उसी ने शंकरन नायर का ध्यान हत्याकांड की तरफ मोड़ा। इसमें उसका साथ दिलकीर कौर ने भी दिया। जो इस पूरे केस में शंकरन नायर की को-काउंसलर भी रहीं। हालांकि केस उन्हीं ने ही कोर्ट में फाइल किया था। इसके बाद शुरू होता असली खेल।फिल्म के कई सीनों पर बात हो सकती है। लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पर परगट सिंह का किरदार जिस तरह से अपन मां और बहन को खोजता है, वो आपके जेहन में रह जाता है। हत्याकांड के बाद गोद में अपनी बहन को उठाए परगट सिंह के पैरलल में शंकरन नायर का सीन भी झकझोर देता है। एक सीन है जिस पर जेहनी तौर पर बात होनी चाहिए। जब शंकरन नायर परगट सिंह के पिता की चिट्ठी पढ़ते हैं। उन्होंने जो लिखा, जब उनकी आवाज में सवांद के रूप में बाहर आता है, तो आप सोच में पड़ जाते हैं।
अक्षय के सामने परगट बने कृष उभरे
अक्षय कुमार ने सी शंकरन नायर को जीवंत किया है। उन्होंने अपने अभिनय से ये बताया कि शंकरन नायर कौन थे और उनका ब्रिटिश हुकूमत में भी क्या रुतबा था। अक्षय एक बार फिर अपनी एक्टिंग से झकझोरते हुए नजर आए हैं। कई सीन में उन्होंने बेहद जबरदस्त दहाड़े हैं। अक्षय पर आरोप लगता है कि वो डायलॉग याद नहीं करते, अगर ऐसा है भी तो उन्होंने यहां पर जबरदस्त काम किया है। अनन्या पांडेय का काम भी अच्छा है। उन्होंने अपने काम से चौंकाया है। केसरी चैप्टर 2 में उनके काम को देखकर लगता है कि अनन्या को लगातार अच्छा काम चुनने की जरूरत है। आर माधवन और अमित सियाल के अभिनय की जीत ये है कि उन्हें देखते हुए आपको घिन्न आ जाती है। दोनों का काम काफी महीन है। स्क्रीन स्पेस बहुत कम होने के बाद परगट सिंह का किरदार निभा रहे कृष राव ने शानदार काम किया है। सीन में उनकी एक्टिंग देख आपकी आखें भी डबडबा जाती हैं। कृष 10-12 मिनट के स्क्रीन स्पेस में आपके जेहन में बस जाते हैं।
लॉयर ने लिखा ऐतिहासिक कोर्टरूम ड्रामा
फिल्म केसरी चैप्टर 2 द केस दैट सूक द इंपायर (The Case That Shook The Empire by Raghu Palat and Pushpa Palat) पर बेस्ड है। को करण सिंह त्यागी और अमृतपाल सिंह बिंद्रा ने लिखा है। फिल्म को कोर्ट रूम ड्रामा है, जिसे अच्छा बनाने में करण और अमृत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसकी खासियत भी हो सकती है कि करण खुद पेशे से वकील हैं। कोर्ट रूम ड्रामा है कई बार थोड़ा बोरिंग लग सकता है, लेकिन सुमित सक्सेना ने डायलॉग से खूब कसा है। करण ने इस फिल्म से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया है। उनका डेब्यू भी कई मायनों में अच्छा साबित हुआ है। केसरी चैप्टर 2 से उन्होंने 106 साल पुराने दर्द को दिखाया है। साथ ही उसके नायक के बारे में बहुत ही सटल ढंग से बताया है। कुछ खामियां हैं, जिसे बाकी लोगों ने पूरी कर दी हैं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी देबोजीत रॉय ने की है। 1919 के कलर पैलेट और उसे बैलेंस उन्होंने बहुत बेहतरीन तरीके से किया है। नितिन बैद की एडिटिंग भी ठीक है।
ओ शेरा- तीर ते ताज का सटीक उपयोग
फिल्म का म्यूजिक शाश्वत सचदेव ने दिया है। जिसमें उनका गाना किथे गया तू साइयां है। ये गाना पूरे फिल्म में चलता है, जहां इसकी जरूरत होती है। फिल्म के टीजर में जब ओ शेरा सुना था, तभी से दिमाग में था कि इसे कैसे दिखाया जाएगा। लेकिन फिल्म में इसे एक सही जगह यूज किया गया है। साथ ही इसका री-क्रिएशन भी फिल्म के साथ फिट बैठता है।
नायक सी शंकरन नायर की कहानी
केसरी चैप्टर 2 द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग (Kesari Chapter 2: The Untold Story of Jallianwala Bagh) कई मायनों में देखनी चाहिए। कौन थे चेत्तूर शंकरन नायर और उन्होंने क्यों मोल ली थी लड़ाई? जलियांवाला बाग हत्याकांड के पीछे जनरल डायर की मानसिकता क्या थी? आखिर डायर को क्यों बचाया जा रहा था? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो फिल्म में मिलते हैं। फिल्म को लेकर मेरी बात यहीं तक, आप खुद भी देखें और अपनी राय बनाएं।












Click it and Unblock the Notifications