Jackie Shroff बने ‘देवदूत’! PETA संग भेंट किया केरल मंदिर को ‘रोबोट हाथी’, जानें कैसे गूंजेगा थलेश्वरन?
Jackie Shroff Gifted Thaleshwaran: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ और पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया ने केरल के त्रिशूर के पास कोडुंगल्लूर में स्थित ऐतिहासिक नेदियाथली श्री शिव मंदिर को एक अनूठा उपहार दिया है-थलेश्वरन, एक 3 मीटर ऊंचा और 800 किलोग्राम वजनी यांत्रिक हाथी। यह करुणामयी पहल मंदिर की परंपराओं को जीवंत रखते हुए जीवित हाथियों को जंगल में उनके परिवारों के साथ स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर देती है।
पेटा इंडिया के बयान के अनुसार, मंदिर ने जीवित हाथियों को रखने या किराए पर लेने की प्रथा को हमेशा के लिए छोड़ने का फैसला किया है। इसके बजाय, अब यह भव्य यांत्रिक हाथी 'थलेश्वरन' धार्मिक समारोहों और जुलूसों में हिस्सा लेगा। मंदिर में इसके स्वागत के लिए एक भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें पारंपरिक 'पंचरी मेलम' प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया।

जैकी श्रॉफ का भावुक संदेश
चार दशकों से सिनेमा जगत में अपनी छाप छोड़ने वाले और 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले जैकी श्रॉफ ने इस पहल के प्रति अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, 'जब मैं ईश्वर की रचनाओं को आजाद और खुशहाल देखता हूं, तो मेरा दिल खुशी से भर जाता है। हाथी जंजीरों में जकड़े रहने या कठोर फर्श पर लोगों को ढोने के लिए नहीं बने। ईश्वर ने उन्हें नदियों में छलांग लगाने, जंगलों में विचरण करने और अपनी स्वाभाविक जिंदगी जीने के लिए बनाया है। यही वजह है कि मैं इस प्रतिष्ठित मंदिर को थलेश्वरन दान कर रहा हूं।'
जैकी ने आगे कहा, 'थलेश्वरन सिर हिला सकता है, सूंड उठा सकता है, आशीर्वाद दे सकता है और हर उत्सव में शामिल हो सकता है, बिना किसी जीव को कष्ट पहुंचाए। यह हमारी परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ हाथियों को आजादी और खुशी देता है। मेरे लिए यही सच्ची भक्ति है।'
मंदिर और समुदाय का उत्साह
उद्घाटन समारोह में शामिल हुए कांग्रेस सांसद बेनी बेहनन ने थलेश्वरन की खूबसूरती की तारीफ की। उन्होंने कहा, 'यह यांत्रिक हाथी देखने में बिल्कुल असली जैसा है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित है। बच्चे इसे छू सकते हैं, तस्वीरें ले सकते हैं और बिना किसी डर के इसकी मौजूदगी का आनंद ले सकते हैं। यह मंदिर की परंपराओं के लिए एकदम सही है, जिसमें करुणा और सुरक्षा का समावेश है।'
मंदिर के अध्यक्ष सुरेश बाबू ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, 'थलेश्वरन न केवल हमारी परंपराओं का प्रतीक है, बल्कि यह ईश्वर की हर रचना के प्रति हमारी श्रद्धा को दर्शाता है। इस करुणामयी कदम से हम भगवान गणेश का सम्मान बिना किसी जीव को तकलीफ दिए कर सकते हैं। केरल में बंदी हाथियों द्वारा हमलों की दुखद घटनाओं को देखते हुए, यह यांत्रिक हाथी भक्तों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।'
थलेश्वरन की खासियत?
रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बना यह यांत्रिक हाथी पांच मोटरों से संचालित है। यह देखने और व्यवहार में बिल्कुल असली हाथी जैसा है-यह सिर, कान, आंखें और पूंछ हिला सकता है, सूंड उठा सकता है और पानी भी छिड़क सकता है। इसे बिजली से चलाया जा सकता है और व्हीलबेस पर स्थापित होने के कारण इसे आसानी से जुलूसों में ले जाया जा सकता है। इसकी पीठ पर सीट लगाई जा सकती है, जिससे यह धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त है।
पेटा इंडिया की अनुकरणीय पहल
थलेश्वरन पेटा इंडिया द्वारा मंदिरों को दान किया गया 11वां और केरल में 7वां यांत्रिक हाथी है। इससे पहले, पेटा इंडिया ने इरिनजादापिल्ली श्री कृष्ण मंदिर में 'इरिंजदापिल्ली रमन', कोम्बारा श्रीकृष्ण स्वामी मंदिर में 'कोम्बारा कन्नन', थ्रीक्कयिल महादेव मंदिर में 'महादेवन', और एडयार श्री वडक्कुंबद शिव विष्णु मंदिर में 'वडक्कुंबद शंकरनारायणन' जैसे यांत्रिक हाथियों को दान किया है। इसके अलावा, तिरुवनंतपुरम के पूर्णिमाकावु मंदिर और पेरुमकादाविला के बलभद्रकाली क्षेत्रम को 'बालाधासन' और 'देवी दासन' उपहार में दिए गए हैं।
हाथियों के प्रति क्रूरता का अंत
पेटा इंडिया के अनुसार, बंदी हाथियों को जुलूसों के लिए प्रशिक्षित करने में मारपीट और हथियारों का इस्तेमाल होता है। कंक्रीट पर घंटों जंजीरों में बंधे रहने से उनके पैरों में गंभीर समस्याएं और घाव हो जाते हैं। अपर्याप्त भोजन, पानी और चिकित्सा देखभाल के कारण कई हाथी मानसिक तनाव में आकर हमला कर देते हैं। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में 15 साल की अवधि में बंदी हाथियों ने 526 लोगों की जान ली। 2025 में भी, कम से कम 20 बंदी हाथियों ने 6 लोगों को मार डाला और कई अन्य को घायल किया।
एक करुणामयी भविष्य की ओर
पेटा इंडिया ने 2023 में मंदिरों में जीवित हाथियों के बजाय यांत्रिक हाथियों को अपनाने का आंदोलन शुरू किया था। अब तक, दक्षिण भारत के 18 मंदिरों में यांत्रिक हाथियों का उपयोग हो रहा है। हाल ही में, अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन और पीपल फॉर कैटल इन इंडिया (पीएफसीआई) ने तमिलनाडु के मंदिरों को एक यांत्रिक हाथी दान किया। ये यांत्रिक हाथी न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि जीवित हाथियों को क्रूरता से मुक्ति दिलाते हैं।
नेदियाथली श्री शिव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसमें केरल के सबसे बड़े पश्चिममुखी शिवलिंगों में से एक है। पेरुमाकन राजवंश के दौरान निर्मित चार थाली मंदिरों में से एक, इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व तब और बढ़ गया जब राजा रामवर्मा कुलशेखर ने कोडुंगल्लूर पर आक्रमण के दौरान यहां शरण ली और एक चवेरपाड़ा (आत्मघाती दस्ता) का गठन किया।
जैकी श्रॉफ और पेटा इंडिया की यह पहल न केवल परंपराओं और आधुनिकता का अनूठा संगम है, बल्कि करुणा और मानवता का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है, जो हमें जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान और प्रेम का संदेश देता है।
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