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'मैं नक्सली और वामपंथी...', द कश्‍मीर फाइल्‍स के डॉयरेक्‍टर विवेक अग्निहोत्री ने क्‍यों बोली ये बात

बॉलीवुड फिल्‍मों के निर्माता-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री उन हस्तियों में शुमार हैं जो अपने आक्रमक बयानों के लिए जाने जाते हैं। कश्‍मीरी पंडितों की पीड़ा को द कश्‍मीर फाइल्‍स में उजागर करने वाले विवेक ने अपने बारे में बड़े खुलासे किए हैं।

इसके साथ ही विवेक अग्निहोत्री जो जेएनयू (Jawaharlal Nehru University) कैंपस से उपजे विचारों की आलोचना करते हैं और वामपंथी विचारधारा वाली हस्तियों की बातों, विचारों पर अहमति जताते रहे हैं उसके बारे में भी बड़ी बात बोली है।

vivek agnihotri

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने अपनी आगामी वेबसीरीज द कश्मीर फाइल्स अनरिपोर्टेड के ट्रेलर लॉन्च के मौके मीडिया से बात करते हुए स्‍वीकारा कि कि कभी वो नक्‍स‍ली और वामपंथी हुआ करते थे। विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि वो अपनी जिंदगी के कई फेज में 'नक्सली' और वामपंथी रहे हैं, हालांकि उन्‍होंने कहा जब उन्‍हें बाद में अहसास हुआ कि आलोचक होने का मतलब केवल एक 'कुंठित व्यक्ति' बनाना हो सकता है।

नक्सली विवेक अग्निहोत्री

फिल्‍म निर्देशक विवेक कुछ वर्षो तक दक्षिणपंथ समर्थक राजनीतिक विचारों को मुखर होकर रखते रहे हैं। इतना ही नहीं विवेक ने अर्बन नक्सल्स नाम से एक बुक लिखी थी, इस किताब लिखने का विवेक का उद्देश्य कॉलेज के दिनों में 'अर्बन नक्सली' बनने के लिए तैयार होने की कहानी को लोगों को बताना था।

जेएनयू से संबंधित पूछे गए प्रश्‍न पर विवेक ने दिया ये जवाब

जेएनयू में एक छात्र होने के नाते उन्होंने स्‍वयं को कैसे आकार दिया? इस सवाल का जवाब फर्स्‍टपोस्‍ट को देते हुए विवेक ने कहा 'मेरा डीएनए बहुत अलग है। मैं उस तरह का व्यक्ति नहीं हूं, जिसे संस्थान आकार दे सकें।'

हार्डवर्ड भी जाकर क्‍यों नहीं बदले विवेक

विवेक ने कहा मैं हार्वर्ड भी गया। इसके साथ ही एक बहुत कहावत बोली कि 'ये हार्वर्ड गेट है और कहते हैं न कि घोड़ा अंदर जाएगा तो घोड़ा भी बाहर आएगा, लेकिन अगर गधा अंदर जाएगा तो गधा बाहर आएगा। इसके साथ ही उन्‍होंने सलाह दी कि दिमाग को आलोचनात्मक सोच में मदद करें।

विवेक ने जेएनयू के लिए बोली ये बात

विवेक ने जेएनयू पर बात करते हुए कहा कि जेएनयू के साथ समस्‍या ये है कि वो छात्रों ब्रेन वॉश कर रहा है। जेएनयू कुछ इस तरह के छात्रों का निर्माण कर रहा है जो सोचते हैं कि सिर्फ उसके लिए विरोध करना अच्छा है। फिल्‍म डॉयरेक्‍टर ने कहा कभी-कभी आपको समाज के लिए अच्छा करने की आवश्‍यकता होती है, जिसमें आलोचक बनने से मदद नहीं मिलती।

मैं नकसल्‍ली और वामपंथी रहा हूं

इस बात में अपने बारे में खुलासा करते हुए विवेक ने कहा मैं नक्सली भी रहा हूं और वामपंथी भी और बहुत गहरी राजनीति करता हूं, लेकिन मैंने एक बात सीखी है - आलोचक होना बेकार है। उन्‍होंने कहा अगर आप एक निराश व्‍यक्ति के रूप में जीवन समाप्‍त कर देते हैं तो ऐसे में समाज में आपका योगदान कुछ भी नहीं है। विवेक अग्निहोत्री ने कहा बॉलीवुड और जेएनयू में पर्याप्त समय बिताने के बाद, वह स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि इनमें से किसी ने भी उन्हें किसी भी तरह से आकार नहीं दिया।

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