Heeramandi Story: पाकिस्तान का 'बाजार' कैसे बना तवायफखाना? 14 साल पहले बनने वाली थी ये सीरीज लेकिन....
Heeramandi Story In Hindi: बॉलीवुड के फेमस फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली इस समय सुर्खियों में छाए हुए हैं। उनकी अपकमिंग वेब सीरीज 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' इस समय सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। इस वेब सीरीज का दमदार ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है जो कि लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
14 साल पहले संजय लीला भंसाली को मिली थी 'हीरामंडी' की स्क्रिप्ट
आपको बता दें कि 'हीरामंडी' एक उर्दू शब्द है जिसका अर्थ हीरे का बाजार है और ये पाकिस्तान के लाहौर में मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस प्रोजेक्ट पर काम करने का आइडिया 14 साल पहले मोईन बेग ने संजय लीला भंसाली को दिया था। हालांकि उस समय डायरेक्टर शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित के साथ फिल्म 'देवदास' की शूटिंग में व्यस्त थे।

संजय लीला भंसाली ने बना डाली वेब सीरीज
'देवदास' के बाद संजय लीला भंसाली कई और बड़े प्रोजेक्ट्स में फंस गए थे जिसके चलते वह 'हीरामंडी' पर काम नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद, बेग ने भंसाली से अपनी स्क्रिप्ट वापस देने के लिए कहा क्योंकि उन्होंने इसके साथ कुछ नहीं किया था। लेकिन बाद में संजय लीला भंसाली ने इस पर वेब सीरीज बनाने का फैसला किया था।
'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' का ट्रेलर रिलीज
फिलहाल 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। इस वेब सीरीज की कहानी तवायफों की दुनिया से जुड़ी है लेकिन इसके साथ अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ उनकी आवाज भी साफ सुनाई दे रही है। साथ ही इन्कलाब जिंदाबाद के नारे भी लगाए जा रहे हैं। ये वेब सीरीज आगामी 1 मई 2024 से ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।
कैसे नाम पड़ा 'हीरामंडी'
पाकिस्तान के सबसे मशहूर जगहों में से एक हीरामंडी का नाम हीरा सिंह के बेटे ध्यान सिंह डोगरा के नाम पर रखा गया था। वह महाराजा रणजीत सिंह के प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने उस क्षेत्र में एक अनाज के बाजार की स्थापना की थी। इसे शुरू में हीरा सिंह दी मंडी कहा जाता था। 15वीं और 16वीं शताब्दी में मुगल काल के दौरान ये इलाका तवायफ संस्कृति के लिए भी मशहूर था।
हीरामंडी का नाम पड़ा शाही मोहल्ला
कहते हैं कि मुगल अपने ऐशों-आराम के लिए नृत्यकियों को अफगानिस्तान और उज्बेकिस्तान से लाते थे। धीरे-धीरे ये शाही मोहल्ला के नाम से भी जाना जाने लगा। वहीं 1799 में रणजीत सिंह नाम के एक 22 वर्षीय मिसलदार ने लाहौर पर कब्जा कर लिया था और 1801 में उन्होंने खुद को पंजाब का महाराजा घोषित कर दिया था। उन्होंने तवायफों की संस्कृति और उनके दरबारी डांस सहित मुगल शाही रीति-रिवाजों को फिर से शुरू किया था।

रणजीत सिंह को मुस्लिम तवायफ से हो गया था प्यार
1802 में रणजीत सिंह को मोरन नाम की एक मुस्लिम तवायफ से प्यार हो गया था, जिसके चलते उन्होंने शाही मोहल्ले के पास पापड़ मंडी में एक अलग हवेली बना ली थी। 1839 में रणजीत सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद हीरा सिंह डोगरा ने शाही मोहल्ले को अपने तरीके से चलाना शुरू कर दिया था।
दिन में बाजार और रात में तवायफखाना
अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण के बाद ये इलाका वेश्यावृत्ति का केंद्र बन गया था। इसके तहत सैनिक उन महिलाओं के साथ रहने लगे थे जिन्हें उन्होंने पकड़ लिया था। ये इलाका दिन के समय एक बाजार की तरह दिखता है जिसमें कई तरह की चीजों की बिक्री होती थी लेकिन रात में ये तवायफखाना बन जाता था।
पाकिस्तान में हो रहा है 'हीरामंडी' का विरोध
संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज हीरामंडी से पाकिस्तानी बिल्कुल भी खुश नहीं है। उनका कहना है कि कोई भारतीय फिल्म निर्माता भारत में पाकिस्तान के बारे मेंकोई सीरीज या फिल्म कैसे बना सकता है। आपको बत दें कि साल 2021 में जब इस प्रोजेक्ट की घोषणा की गई, तो एक्ट्रेस उशना शाह ने इसका विरोध किया था।












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