Guru Dutt Birth Anniversary: गुरुदत्त की जिंदगी हो गई थी तन्हा, मौत से एक दिन पहले मुंह से निकले थे ये शब्द
गुरुदत्त ने अपनी जिंदगी में जो चाहा वो हासिल किया लेकिन प्यार को अपनी असल जिंदगी में वह कभी हासिल नहीं कर पाए। उन्हें दो बार प्यार हुआ लेकिन वह उनकी किस्मत को मंजूर नहीं था।
मुंबई, 9 जुलाईः गुरु दत्त हिंदी सिनेमा के एक ऐसे चमकते सितारे थे जिन्होंने फिल्मों को देखने और समझने का तरीका ही बदल दिया था। दिवंगत अभिनेता गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। फिल्मों में उनकी एक्टिंग की तुलना आज भी किसी से संभव नहीं हो पाती। आज गुरुदत्त का जन्मदिवस है। आज ही के दिन डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, एक्टर, कोरियोग्राफर और राइटर गुरुदत का कर्नाटक में जन्म हुआ था। ब्रह्माण परिवार में जन्मे गुरुदत्त पादुकोण के पिता हैडमास्टर और बैंकर थे। वहीं उनकी मां एक टीचर और लेखिका थीं। गुरुदत्त का बचपन कोलकाता में बिता था। कोलकाता में ही उन्होंने अपनी संस्कृति, परंपरा और कला के बारे में बहुत कुछ सीखा। आइए आज उनके जन्मदिवस के मौके पर आपको बताते हैं कि उनके जीवन का आखिरी समय कैसे बीता था और क्या कारण था कि वह आखिरी समय में अकेले रहे गए थे।

मौत को लगाया गले
सिर्फ 39 साल की उम्र में गुरुदत्त हिंदी सिनेमा की लाइफलाइन बन गए थे। वह फिल्मों का लेखन, डायरेक्शन, अभिनय से लेकर कोरियोग्राफी तक कर रहे थे लेकिन छोटी सी उम्र में ही वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। एनबीटी की खबर के अनुसार कहते हैं कि गुरुदत्त ने अपनी जिंदगी में जो चाहा वो हासिल किया लेकिन प्यार को अपनी असल जिंदगी में वह कभी हासिल नहीं कर पाए। उन्हें दो बार प्यार हुआ लेकिन वह उनकी किस्मत को मंजूर नहीं था। कहते हैं कि इस प्यार के चलते ही उनकी जिंदगी तन्हा हो गई थी और उन्होंने मौत को गले लगा लिया था।

गीता दत्त से की थी सच्ची मोहब्बत
आपको बता दें कि गुरुदत्त का पहला प्यार गीता दत्त थीं। वह एक बड़ी गायिका हुआ करती थीं और हर फिल्म में उन्हें लेने के लिए डायरेक्टर्स लाइन लगाते थें। गीता दत्त के साथ गुरुदत्त की पहली मुलाकात फिल्म 'बाजी' के दौरान हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने गाना गाया था और उसके बाद ही गुरुदत्त के प्यार में पड़ गई थीं। तीन साल दोनों ने एक दूसरे को जमकर डेट किया और फिर इस प्यार को शादी में बदल लिया। साल 1953 में गुरुदत्त और गीता दत्त ने शादी कर ली थी। दोनों के तीन बच्चे हुए थे।

शादीशुदा जिंदगी में शुरू हो गई तकरार
गीता दत्त से शादी के कुछ समय बाद तक दोनों के बीच सबकुछ बढ़िया चल रहा था। दोनों अपने अपने करियर में भी बढ़िया काम कर रहे थे लेकिन शादी के चार साल बाद दोनों में झगड़े शुरू हो गए और ये शादी टूटने के कगार पर आ गई। कहते हैं कि दोनों के बीच कोई तीसरा आ गया था। कहा जाता है कि एक्ट्रेस वहीदा रहमान के साथ नजदीकियों के चलते ही गुरुदत्त और गीता दत्त के बीच खटपट होने लगी थी।

वहीदा रहमान से हो गया था प्यार
जानकारी के अनुसार गुरुदत्त ने वहीदा रहमान को अपनी फिल्म 'सीआईडी' से लॉन्च किया था। दोनों ने साथ में कई फिल्में की और ऐसे में दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ गए थे लेकिन ये दोनों कभी एक न हो सके। वहां एक तरफ गीता दत्त बच्चों को साथ लेकर गुरु दत्त का घर छोड़कर चली गई थीं। वहीं गुरुदत्त की जिद्द और प्यार में पॉजेसिव होने के चलते वहीदा रहमान भी उनसे दूर हो गई थीं। गुरु दत्त वहीदा रहमान से कई कामों के लिए जिद्द किया करते थे जो वहीदा को बिल्कुल पसंद नहीं था।

गुरुदत्त की तन्हा जिंदगी
जिंदगी के दोनों महिलाओं के चले जाते ही गुरुदत्त काफी तन्हा हो गए थे। वह शराब की लत में भी डूबने लगे थे। आपको बता दें कि गुरुदत्त की मौत बेहद रहस्यमय स्थिति में हुई थी। 10 अक्टूबर 1964 को उनका निधन हो गया था। जानकारी के अनुसार मौत से ठीक एक दिन पहले यानी 9 अक्टूबर की सुबह वह अपने बच्चों के साथ शॉपिंग पर गए थे और फिर लौटकर फिल्म 'बहारे फिर भी आएंगी' पर काम करने लगे। लेखक अबरार अल्वी संग वह इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। उस दिन गुरु दत्त ने अपने दोस्त अबरार को अचानक ही कहा था- यार अबरार अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात कहूं...मैं अब रिटायरमेंट लेना चाहता हूं। ऐसा लगा जैसे उन्हें अपनी मौत का पहले ही आभास हो गया था।

गुरुदत्त की आखिरी रात
9 अक्टूबर की शाम गुरु दत्त ने दोस्त अबरार के साथ ही गुजारी थी। दोनों ने अपनी फिल्म को लेकर काफी कुछ चर्चाएं भी की थीं। फिर अबरार घर लौट आए और गुरुदत्त अगली सुबह अपने आधे पढ़े उपन्यास के साथ मृत पाए गए थे। गुरु दत्त के निधन के बाद उनकी आखिरी फिल्म 'बहारे फिर भी आएंगी' को एक्टर धर्मेंद्र ने पूरा किया था।












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