Gufi Paintal Passed Away: लंगड़ाता नहीं था 'शकुनि', फिर महाभारत में क्यों बदली थी गुफी की चाल?
Gufi Paintal Passed Away: 4 अक्टूबर 1944 को जन्मे गुफी का लाहौर से खास रिश्ता था लेकिन बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली में आकर बस गया था।

Gufi Paintal Passed Away: आज सिने जगत के लिए दुखद दिन है। बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक शो 'महाभारत' में 'शकुनि मामा' का रोल निभाकर घर-घर लोकप्रिय हुए एक्टर गुफी पेंटल ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया है। वो बीते कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे लेकिन आज सुबह हार्टफेल होने से उनका निधन हो गया। टीवी की दुनिया के नामचीन कलाकारों में से एक गुफी पेंटल के निधन की पुष्टि उनके भतीजे हितेन पेंटल ने की है।
'शकुनि' का किरदार निभाकर रचा इतिहास
उन्होंने एक बयान जारी करके बताया कि 'बड़े ही दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे प्रिय गुफी पेंटल अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। आज सुबह 9 बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। ' अपने हंसमुख स्वभाव और ऐतिहासिक किरदारों के जरिए लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाने वाले एक्टर गुफी पेंटल ने महाभारत में 'शकुनि' का किरदार निभाकर इस चरित्र को अमर कर दिया।
दुर्योधन का प्रिय मामा 'शकुनि' लंगड़ा नहीं था
आपको बता दें कि इतिहास में कहीं इस बात का जिक्र नहीं है कि दुर्योधन का प्रिय मामा 'शकुनि' लंगड़ा था लेकिन गुफी पेंटल ने महाभारत में उसे लंगड़े, धूर्त और चालाक के रूप में ऐसा पेश किया कि इसके बाद जितने भी महाभारत शो बने उसमें 'शकुनि'को लंगड़ा ही दिखाया गया । हालांकि गुफी ने 'शकुनि' की चाल अपनी एक बीमारी की वजह से बदली थी लेकिन तब शायद उन्हें ये नहीं पता था कि वो अपनी इस टेढ़ी चाल से किसी करेक्टर को हमेशा के लिए अमर करने जा रहे हैं।
महाभारत के कास्टिंग डायरेक्टर भी थे गुफी
दरअसल गुफी पेंटल ने केवल महाभारत में 'शकुनि' का रोल ही प्ले नहीं किया था बल्कि वो इस शो के कास्टिंग डायरेक्टर भी थे। बहुत सारे लोगों का स्क्रीन टेस्ट 'शकुनि'के लिए हुआ लेकिन किसी का नाम फाइनल नहीं हो पा रहा था। काफी निराशा हाथ लगने के बाद शो के क्रू मेंबर्स ने निर्णय लिया कि पर्दे पर 'शकुनि' का रोल गुफी को ही निभाना चाहिए क्योंकि इससे पहले गुफी पेंटल 'बहादुर शाह जफर' जैसा ऐतिहासिक रोल कर चुके थे।
कूल्हे की हड्डी के कारण बदली थी गुफी की चाल
लेकिन उस वक्त गुफी अपने कूल्हे की हड्डी के दर्द से गुजर रहे थे. जिसके लिए उन्हें डॉक्टर ने एक सर्जरी कराने को बोला था। जिसके कारण उन्हें दाहिने पैर से चलने में दिक्कत होती थी और वो इसी वजह से लंगड़ाकर चलते थे। उन्होंने शो के क्रू मेंबर्स को ये बात बताई और कहा कि 'अगर मैं सर्जरी कराऊंगा तो रोल प्ले नहीं कर पाऊंगा और अगर रोल करूंगा तो मुझे लंगड़ा कर चलना होगा।' इस पर क्रू मेंबर्स ने कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं और इस तरह से गुफी ने शकुनि' मामा को लंगड़ा बना दिया जो कि उसकी बुराई का ही एक हिस्सा बन गया।
गुफी ने 'शकुनि' को पर्दे पर बनाया ऐतिहासिक
गुफी ने 'शकुनि' का किरदार ऐसे चरितार्थ किया जो कि 'काले रंग का वस्त्र पहनता था, धूर्त सोच रखता था और जुआं खेलने में पारंगत था और अपने भांजे दुर्योधन के दिमाग में पांडवों के खिलाफ जहर घोलता था और मस्त शैली में भांजे बोला करता था। अब वाकई में 'शकुनि'ऐसा था या नहीं ये तो पता नहीं लेकिन बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक महाभारत के बाद हर महाभारत में 'शकुनि' जरूर गूफी वाले किरदार का ही दिखता था।












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