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'टेलीविजन क्वीन' एकता कपूर, ने घर-घर की कहानियों को पर्दे पर उतारा और बनाए ये 5 यादगार टीवी सीरियल

Ekta Kapoor serials: भारतीय टीवी इंडस्ट्री की बात हो और एकता कपूर का नाम न आए, ये कल्पना करना भी मुश्किल है। बालाजी टेलीफिल्म्स की प्रमुख और 'टेलीविजन क्वीन' कही जाने वाली एकता कपूर ने भारतीय घरों में रिश्तों, भावनाओं, संघर्षों और परंपराओं की जो परिभाषा लिखी, उसने दर्शकों की सोच को न केवल दिशा दी, बल्कि टेलीविजन की दुनिया को एक नई पहचान दी।

एकता के सीरियल्स ने आम जिंदगी को अद्भुत कहानियों में बदला और उन्हें लाखों-करोड़ों भारतीयों के दिलों तक पहुंचाया। एक बार फिर से स्मृति ईरानी अपने आईकॉनिक किरदार 'तुलसी' से छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं।

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आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सीरियल्स के बारे में, जो न केवल टीआरपी चार्ट्स पर छाए रहे, बल्कि संस्कृति और पहचान का हिस्सा बन गए।

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' - हर घर की कहानी

जब 2000 में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' ने स्टार प्लस पर दस्तक दी, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह शो भारतीय टेलीविजन का इतिहास रच देगा। स्मृति ईरानी द्वारा निभाया गया 'तुलसी' का किरदार, एक आदर्श बहू की मिसाल बन गया। गोवर्धन विरानी के पोते मिहिर (पहले अमर उपाध्याय, फिर रोनित रॉय) से तुलसी की शादी और इसके बाद की पारिवारिक उठा-पटक ने दर्शकों को बांधे रखा।

यह शो 8 वर्षों तक चला (3 जुलाई 2000 - 6 नवंबर 2008) और भारतीय टेलीविजन के सबसे लंबे चलने वाले और यादगार धारावाहिकों में गिना गया। अब, खबर है कि 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' अपने 25 साल पूरे होने पर छोटे पर्दे पर एक बार फिर वापसी कर रहा है - यह एक पूरे युग की वापसी है।

'कसौटी जिंदगी की' - अनुराग और प्रेरणा की कसौटियां

2001 में लॉन्च हुआ 'कसौटी जिंदगी की' एक और कल्ट शो साबित हुआ, जो अनुराग और प्रेरणा की प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द घूमता था। श्वेता तिवारी ने प्रेरणा का किरदार निभाकर एक नई पहचान पाई, जबकि अनुराग की भूमिका पहले सीजेन खान और बाद में हितेन तेजवानी ने निभाई। रोनित रॉय (रिषभ बजाज) और उर्वशी ढोलकिया (कोमोलिका) जैसे किरदारों ने ग्रे शेड्स को ग्लैमर और पॉपुलैरिटी दी।

29 अक्टूबर 2001 से 28 फरवरी 2008 तक प्रसारित यह शो आज भी एक यादगार प्रेम-कहानी और इमोशनल जर्नी के लिए जाना जाता है। बाद में इसका रिबूट भी आया, लेकिन ओरिजिनल 'कसौटी' के जादू को छूना आसान नहीं था।

'पवित्र रिश्ता' - सादगी में बसी प्रेम कहानी

'पवित्र रिश्ता' एक ऐसा शो था जिसने प्रेम को सादगी में ढाला। अर्चना (अंकिता लोखंडे) और मानव (सुशांत सिंह राजपूत) की जोड़ी भारतीय टेलीविजन की सबसे प्यारी जोड़ियों में से एक बन गई। यह शो 1 जून 2009 से 25 अक्टूबर 2014 तक चला और ज़ी टीवी के सबसे लंबे चलने वाले धारावाहिकों में शामिल हुआ।

इस सीरियल ने अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत को एक पहचान दी, और साथ ही साथ दर्शकों को एक ऐसी प्रेम कहानी दिखाई जिसमें भावनाएं, त्याग और विश्वास प्रमुख थे। इस शो का म्यूजिक और थीम सॉन्ग भी आज तक लोगों की जुबान पर है।

'बड़े अच्छे लगते हैं' - उम्र और प्रेम के पार

साक्षी तंवर और राम कपूर की जोड़ी ने एक बार फिर साबित किया कि प्रेम की कोई उम्र नहीं होती। 'बड़े अच्छे लगते हैं' ने मध्यमवर्गीय जिंदगी, रिश्तों की परतें और पारिवारिक संघर्ष को बेहद खूबसूरती से दर्शाया।

यह शो 30 मई 2011 को शुरू हुआ और 10 जुलाई 2014 तक चला। इसकी सादगी, मजबूत संवाद, और भावनात्मक दृश्यों ने इसे एक अलग मुकाम दिया। शो का टाइटल ट्रैक "बड़े अच्छे लगते हैं..." आज भी एक आइकॉनिक टेलीविजन सॉन्ग माना जाता है।

'कुमकुम भाग्य' - मोहब्बत और किस्मत का संगम

2014 में लॉन्च हुआ 'कुमकुम भाग्य' एक ऐसी प्रेम कहानी है जिसमें प्यार, गलतफहमियां, टकराव और फिर मिलन की लंबी कहानी है। अभि (शब्बीर अहलूवालिया) और प्रज्ञा (सृति झा) की जोड़ी ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।

शो में ड्रामा, ट्विस्ट, इमोशन और म्यूजिक का संतुलन शानदार रहा। इस शो ने न सिर्फ टेलीविजन में नई ऊर्जा भरी, बल्कि भारतीय युवाओं के बीच भी भारी लोकप्रियता पाई। आज भी इसके एपिसोड्स सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते हैं।

एकता कपूर: सिर्फ निर्माता नहीं, एक दौर की निर्माता

एकता कपूर का टेलीविजन सफर महज एक निर्माता का नहीं, बल्कि एक युग की रचयिता का रहा है। उन्होंने महिलाओं की भावनाओं, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संरचना को टीवी स्क्रीन पर जो रूप दिया, वह भारत के लाखों परिवारों के लिए आत्मीय अनुभव बन गया। चाहे वह तुलसी हो या प्रेरणा, अर्चना हो या प्रज्ञा - एकता ने हर महिला पात्र को एक मजबूत और भावनात्मक गहराई के साथ दर्शाया।

एकता कपूर के धारावाहिकों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया, बल्कि भारतीय समाज की परछाई बन गए। ये शोज़ न केवल टीआरपी में टॉप पर रहे, बल्कि उन्होंने रिश्तों को एक नई परिभाषा दी। आज भी जब कोई कहता है "मिहिर मर गया!" या "कोमोलिका की एंट्री हुई है", तो दर्शकों की आंखों के सामने पूरा दृश्य ताज़ा हो जाता है।

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