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Durlabh Prasad KI Dusri Shaadi Review: बनारस की गलियों में बसती रिश्तों की कहानी, मजेदार है ट्विस्ट

Durlabh Prasad KI Dusri Shaadi Movie Review: संजय मिश्रा और महिमा चौधरी की मोस्ट अवेटेड फिल्म दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी रिलीज हो गई है। टीजर रिलीज होते ही, फिल्म बवाल काटे हुए थी। कैसी है ये फिल्म, इस रिव्यू में जान लीजिए।

Durlabh Prasad KI Dusri Shaadi Movie Review

फिल्म की शुरुआत होती है बनारस के घाटों पर, जहां छतरी के नीचे बैठा एक अधेड़ नाई बच्चे का मुंडन कर रहा है। यही है दुर्लभ प्रसाद (संजय मिश्रा) मस्तमौला, सादा जीवन जीने वाले और दिल से बेहद साफ इंसान। पत्नी को बेटे के जन्म के बाद खो देने के बावजूद उन्होंने दोबारा शादी नहीं की। आज उनके घर में बस तीन पुरुष हैं। खुद दुर्लभ, उनका जवान बेटा मुरली (व्योम यादव) और उनका साला मंचू (श्रीकांत वर्मा), जो मांगलिक होने के कारण अब तक कुंवारा है। मुरली का दिल शहर के दबंग नेता और भावी विधायक ब्रज नारायण भारती उर्फ़ दद्दा (प्रवीण सिंह सिसोदिया) की बेटी महक (पलक लालवानी) पर आ जाता है। दोनों शादी करना चाहते हैं, लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब महक का परिवार साफ कह देता है, "जिस घर में औरत नहीं, वहाँ बेटी नहीं जाएगी।"

यहीं से कहानी एक दिलचस्प मोड़ लेती है। मुरली तय करता है कि अपनी शादी से पहले वह अपने पिता की दूसरी शादी करवाएगा। 55 साल के दुर्लभ प्रसाद के लिए दुल्हन ढूंढना आसान नहीं होता। कभी पंडितों के चक्कर, कभी अख़बार में इश्तेहार, तो कभी रिश्तेदारों के दरवाज़े-मुरली और मंचू हर जतन करते हैं। बाकी के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

एक्टर्स की मेहतन
अभिनय के मामले में फिल्म पूरी तरह संजय मिश्रा और महिमा चौधरी के कंधों पर टिकी है-और दोनों ही इसे बखूबी निभाते हैं। संजय मिश्रा अपनी सहज कॉमिक टाइमिंग और भावनात्मक संतुलन से हर दृश्य में जान डाल देते हैं। उनका किरदार हँसाता भी है और कई जगह भीतर तक छू जाता है। महिमा चौधरी बबिता के किरदार में आत्मविश्वासी और प्रभावशाली नजर आती हैं। लंबे समय बाद इस तरह के मजबूत रोल में उन्हें देखना सुखद अनुभव है। दोनों के बीच की मासूम और परिपक्व रोमांटिक केमिस्ट्री फिल्म की बड़ी ताकत है। श्रीकांत वर्मा अपने चिर-परिचित अंदाज़ में ठहाके बटोरते हैं। प्रवीण सिंह सिसोदिया दबंग लेकिन यथार्थवादी पिता के रूप में असर छोड़ते हैं। व्योम यादव ने मुरली के किरदार में ईमानदार कोशिश की है, हालांकि कुछ दृश्यों में अतिरिक्त प्रयास नजर आता है। पलक लालवानी अपने रोल में सधी हुई दिखती हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक सिद्धांत राज सिंह ने बनारस की आत्मा से छेड़छाड़ किए बिना उसे पर्दे पर जीवंत करने की कोशिश की है। घाट, गलियाँ, बनारसी बोली और स्थानीय रंग-ढंग फिल्म को विश्वसनीय बनाते हैं। सिनेमैटोग्राफी और कॉस्ट्यूम डिजाइन इस अनुभव को और निखारते हैं। संगीत कहानी के साथ बहता है, हालांकि बैकग्राउंड स्कोर बेहतर हो सकता था.

फाइनल टेक
'दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी' सिर्फ एक हल्की-फुल्की कॉमेडी नहीं, बल्कि रिश्तों, उम्र और समाज की सोच पर मुस्कुराता हुआ सवाल है। फिल्म दो तरह के रोमांस को साथ-साथ दिखाती है-एक बेचैन, जल्दबाज़ ज़ेन जी वाला प्यार और दूसरा उम्र की परिपक्वता से निकला ठहराव भरा रोमांस। यह एक साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म है, जो हंसाती है, सोचने पर मजबूर करती है और मन को हल्का कर देती है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अगर आप कुछ सुकून और सादगी चाहते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है।\

Durlabh Prasad KI Dusri Shaadi Review
कलाकार: संजय मिश्रा, महिमा चौधरी, व्योम, पलक लालवानी, श्रीकांत वर्मा, प्रवीण सिंह सिसोदिया
निर्देशक: सिद्धांत राज सिंह

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