Doctor G Film Review: आयुष्मान खुराना बनें स्त्री रोग विशेषज्ञ, इस कॉमेडी-ड्रामा ने ऐसा किया लोगों पर असर
Doctor G Film Review In Hindi: आयुष्मान खुराना की फल्म 'डॉक्टर जी' एक बार फिर एक ऐसे विषय को दर्शकों के सामने लाई है, जो इससे पहले शायद पर्दे पर कभी नहीं दिखाया गया है।
Doctor G Film Review In Hindi: आयुष्मान खुराना और रकुलप्रीत सिंह की फिल्म 'डॉक्टर जी' फिलहाल सुर्खियों में छाई हुई है। ये फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। आयुष्मान खुराना की इस फिल्म को देखने के बाद लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से हिंदी सिनेमा में कंटेंट की कमी नजर आ रही थी जिसके चलते रीमेक बनाने पर जोर दिया जा रहा था। लेकिन आयुष्मान की इस फिल्म ने लोगों के मन में हिंदी सिनेमा को लेकर एक बार फिर से उम्मीदें जगा दी हैं। अगर बात कंटेंट की हो तो आयुष्मान खुराना से उम्मीदें हमेशा ही बहुत ज्यादा होती हैं। इस फिल्म के ट्रेलर को देखने के बाद से ही लोग काफी खुश हो गए थे। ट्रेलर ने इस फिल्म की कहानी को लेकर लोगों के बीच एक अलग क्रेज बना दिया था। आयुष्मान खुराना की 'डॉक्टर जी' एक बार फिर एक ऐसे विषय को दर्शकों के सामने लाई है, जो इससे पहले शायद पर्दे पर कभी नहीं दिखाया गया है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर कैसी है फिल्म 'डॉक्टर जी' की कहानी और लोग क्यों इसे पसंद कर रहे हैं।

फिल्म 'डॉक्टर जी' की कहानी
फिल्म 'डॉक्टर जी' की कहानी है भोपाल में रहने वाले उदय गुप्ता (आयुष्मान खुराना) की जो एमबीबीएस कर चुके हैं और अब पीजी में एडमिशन लेना चाहते हैं। पीजी में वह ऑर्थोपेडिक (हड्डियों से संबंधित विभाग) लेना चाहते हैं, पर अपनी कम रैंक के चलते उन्हें इस डिपार्टमेंट में सीट नहीं मिलती। इसकी जगह उन्हें गायनोकोलॉजी यानी प्रसूती व स्त्री रोग विभाग में शिफ्ट कर दिया जाता है। उदय किसी भी हालत में ऑर्थोपेडिक में एडमिशन लेना चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि वह मर्दों के लिए सूट करने वाला विषय है, जबकि वहीं गायनोकोलॉजी में एडमिशन उन्हें शर्मिंदगी का अनुभव करा रही होती है।

डॉ. उदय गुप्ता के स्ट्रगल की कहानी
इसी विभाग में उनकी सीनियर हैं फातिमा (रकुलप्रीत सिंह), जिससे उन्हें प्यार हो जाता है। बस यही है डॉ. उदय गुप्ता के स्ट्रगल की कहानी। इस स्ट्रगल में उसकी एचओडी डॉ. नंदिनी (शेफाली शाह) भी मौजूद हैं जो उसे मेल-टच खत्म करने की सलाह देते हुए स्त्री विशेषज्ञ डॉक्टर बनने के लिए कहती हैं। इस फिल्म की निर्देशक हैं अनुभूति कश्यप जिनका काम तारीफ के काबिल है। उन्होंने इस बोल्ड मेडिकल कॉमेडी ड्रामा को बड़ी ही आसानी से लोगों के सामने लाने की कोशिश की है। वैसे तो ये फिल्म मेडिकल कॉलेज के इर्द-गिर्द घुमती नजर आती है जिसमें हीरो आयुष्मान खुराना मर्दों वाले ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट में ही एडमिशन लेना चाहते हैं लेकिन उन्हें स्त्री रोग विशेषज्ञ का डिपार्टमेंट सौंप दिया जाता है।
महिलाओं के प्रति पुरुषों की सोच
इस फिल्म की कहानी महिलाओं के प्रति पुरुषों की सोच और जिन खास कामों और प्रोफेशन्स को मर्द-औरत में अलग अलग बांटने की कोशिश की जाती है, उन सभी के बारे में बताती है। आयुष्मान खुराना इस फिल्म में अपने किरदार में बहुत ही अच्छे लग रहे हैं। इस फिल्म में ये भी दिखाया गया है कि एक लड़का और लड़की सिर्फ दोस्त हो सकते हैं। फिल्म के पहले ही सीन को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये हीरो एक ऐसा मर्द है, जिसके लिए औरत की बात समझना मुश्किल है। लेकिन ये बात फिल्म में इतनी बार दोहराई गई है कि आपको डॉ. उदय सही लगने लगेंगे।
फिल्म में कॉमेडी की मात्रा है कम
इस फिल्म में कई सीन्स ऐसे हैं, जब आपको लगता है कि शायद और कुछ कहा जाएगा, कुछ बोला जाएगा पर सीन खत्म हो जाते हैं। आपको बता दें कि आयुष्मान खुराना इससे पहले भी बेहद बोल्ड विषय और कहानियों पर काम कर चुके हैं। उनकी एक्टिंग की हर कोई तारीफ करता है। चाहे समलैंगिकता हो या फिर मर्दाना कमजोरी पर बनी फिल्म, आयुष्मान की सभी फिल्मों में कॉमेडी और एंटरटेनमेंट का फेक्टर बहुत ही सही मात्रा में रहता है। साथ ही उन फिल्मों की कहानी समाज को जागरुक भी करती है।
आयुष्मान खुराना अपने किरदार में फिट
आयुष्मान खुराना की फिल्म 'डॉक्टर जी' में आपको पेट पकड़कर हंसने वाले पल कम ही मिलेंगे लेकिन कहानी सिंपल और अच्छी है। ये एक मेडिकल-कॉमेडी-ड्रामा है पर इसमें मेडिकल और ड्रामा काफी ज्यादा हो गया है और कॉमेडी कम रह गई है। फिल्म का फर्स्ट हाफ फिर भी गुदगुदाने वाला है पर सेकंड हाफ में कहानी पूरी तरह से पलट जाती है। फिल्म के सेकंड हाफ सब कुछ भारी हो जाता है। आयुष्मान खुराना अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठे हैं।
बाकी कलाकारों ने किया बढ़िया काम
शेफाली शाह, एचओडी के किरदार में जबरदस्त दिखाई दी हैं। उनके डायलॉग और उनका अंदाज काफी शानदार नजर आ रहा है। वहीं आयुष्मान की मां के किरदार में शीबा चड्ढा भी दमदार रही हैं। रकुलप्रीत अपने सीन्स में अच्छी लगी हैं। फिल्म डॉक्टर जी एक शानदार कॉन्सेप्ट वाली धीमी कहानी है, जिसमें कलाकारों ने बहुत ही सही तरीके से अपना काम किया है। हालांकि इस फिल्म को एक बार जरूर देखा जा सकता है।












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