Nayyara Noor का निधन, भारत से खास कनेक्शन, 12 साल पहले छोड़ दी थी पेशेवर गायिकी
भारत में जन्मीं गायिका नय्यरा नूर का निधन हो गया है। बुलबुल ए पाकिस्तान नय्यरा का निधन पाकिस्तान में हुआ। assam born Singer Nayyara Noor demise bulbul e pakistan
कराची, 21 अगस्त : मशहूर गायिका नय्यरा नूर का निधन हो गया है। नय्यरा आजाद भारत के असम में पैदा हुई थीं। 71 वर्षीय नय्यरा के निधन से कला जगत में कभी न भरा जा सकने वाला शून्य पैदा हो गया है। ऐक ऐसी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई जिसकी भावपूर्ण धुनों के आगे सरहदें बेमानी थीं। भारत और पाकिस्तान में संगीत प्रेमी और गजल के शौकीन लोग नय्यरा के निधन से शोक संतप्त हैं। पाकिस्तान में नय्यरा को बुलबुल-ए-पाकिस्तान सम्मान से नवाजा गया था। भले ही नय्यरा नूर ने 2012 के बाद प्रोफेशनल सिंगिंग नहीं की, लेकिन उन्होंने अपने पीछे एक गहरी विरासत और मधुर प्रस्तुतियों का खजाना छोड़ गई हैं।

भारत और पाकिस्तान की साझा संस्कृति
Bulbul-e-Pakistan नय्यरा नूर का निधन लाखों लोगों के लिए बड़ा झटका है। इनकी गायिकी सरहदों से परे थी। बीमारी से संघर्ष कर रहीं 71 वर्षीय नय्यरा का निधन होने के बाद परिवार ने रविवार को कहा, भारत और पाकिस्तान की साझा संस्कृति की प्रतिनिधि नय्यरा के निधन से अंतिम संगीत आइकॉन के जीवन पर पर्दा गिर गया।

भतीजे रजा जैदी ने दी सूचना
Nayyara Noor 71 वर्ष की थीं और कराची में काफी समय से उनका इलाज चल रहा था। उनके भतीजे रजा जैदी ने ट्वीट किया, भारी मन के साथ कहना पड़ रहा है कि प्यारी चाची (ताई) नय्यरा नूर का निधन हो गया है। उनकी आत्मा को शांति मिले। नय्यरा नूर अपने पीछे एक गहरी विरासत और मधुर प्रस्तुतियों का खजाना छोड़ गई हैं। उनकी सुरीली आवाज के कारण उन्हें 'बुलबुल-ए-पाकिस्तान' की उपाधि दी गई थी।
भतीजे रजा जैदी का ट्वीट
1958 में नय्यरा का परिवार पाकिस्तान गया
दिलचस्प है कि नय्यरा नूर का जन्म आजाद भारत में हुआ था। 1950 में गुवाहाटी में जन्मीं Nayyara Noor के पिता अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के एक सक्रिय सदस्य थे। 1947 में विभाजन से पहले पाकिस्तान यात्रा के दौरान नय्यरा के पिता ने पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की मेजबानी की थी। साल 1958 में नय्यरा का परिवार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर चला गया।
नय्यरा नूर ने संगीत का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया
Nayyara Noor के निधन के बाद डॉन अखबार ने उनका बयान प्रकाशित किया। बकौल डॉन नय्यरा ने कहा, "शिक्षा हमारे अस्तित्व की शुरुआत और अंत थी, लेकिन संगीत मनोरंजन का मुख्य स्रोत था।" उन्होंने स्वीकार किया कि Kanan Bala और Begum Akhtar उनके सर्वकालिक पसंदीदा कलाकार थे। दिलचस्प बात यह है कि नय्यरा नूर ने संगीत का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था, लेकिन वह बचपन से ही अख्तर की ग़ज़लों और बाला के भजनों पर मोहित थीं।
पत्रकार रजा अहमद रूमी ने जताया शोक
कॉलेज के प्रोफेसर ने पहचानी प्रतिभा
लाहौर में अपने कॉलेज- नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स में एक संगीत समारोह के दौरान अपने दोस्तों और शिक्षकों के साथ संवाद (regaling) के दौरान इस्लामिया कॉलेज के प्रोफेसर असरार अहमद ने उनकी बढ़ती प्रतिभा को देखा। इसके बाद जल्द ही, नूर विश्वविद्यालय के रेडियो पाकिस्तान कार्यक्रमों में गाने लगीं। 1971 में Nayyara Noor ने पाकिस्तानी टेलीविजन धारावाहिकों में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने घराना और तानसेन जैसी फिल्मों के गीत को भी अपना मखमली स्वर दिया।
भारत में सांसद मनोज झा ने शोक जताया
पॉपुलर और यादगार गजल
ट्विटर यूजर अबसा कोमल (@AbsaKomal) ने नैय्यरा नूर के निधन पर शोक जताया। नैय्यरा ने घराना फिल्म में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का Nigar Award जीता। नूर अपनी गजलों की सादगी भरी प्रस्तुति के लिए जानी जाती थीं। पाकिस्तान और भारत में गजल प्रेमियों के बीच नैय्यरा समान रूप से लोकप्रिय रहीं। Behzad Lucknavi की रचना 'ऐ जज्बा-ए-दिल घर मैं चाहूँ (Ae Jazba-e-Dil Ghar Main Chahoon) Nayyara की पॉपुलर और यादगार गजलों में एक है।
पत्रकार विनोद शर्मा ने जताया शोक

खामोश हुईं बुलबुल-ए-पाकिस्तान
नय्यरा नूर को 2006 में बुलबुल-ए-पाकिस्तान (Bulbul-e-Pakistan alias Nightingale of Pakistan) की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 2006 में, उन्हें प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। 2012 में नैय्यरा ने पेशेवर गायन को अलविदा कह दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने Nayyara Noor के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु संगीत जगत के लिए "एक अपूरणीय क्षति" है। ग़ज़ल हो या गीत, नय्यरा नूर ने जो भी गाया, उसने उसे पूर्णता के साथ गाया। नय्यरा नूर के निधन से जो शून्य पैदा हुआ है, वह कभी नहीं भरा जा सकेगा।'












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