'पापा के दोस्त ने मेरे साथ', फेमस एक्ट्रेस का दर्दनाक खुलासा, छोटी उम्र में हुआ था रूह कंपाने वाला कांड

Aditi Govitrikar: मॉडल, एक्ट्रेस और मिसेज वर्ल्ड 2001 का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली अदिति गोवित्रिकर ने हाल ही में अपने जीवन के उन पन्नों को खोलकर सामने रखा है, जिन पर दर्द, डर और गहरे मानसिक आघात की परछाइयां दर्ज हैं।

संघर्ष, साहस और सच बोलने की ताकत
फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया में सफल दिखने वाली अदिति गोवित्रिकर की ये कहानी उनके संघर्ष, साहस और सच बोलने की ताकत को उजागर करती है। बचपन और किशोरावस्था में झेले गए असहज अनुभवों को शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन घटनाओं ने उनके व्यक्तित्व और मन पर स्थायी असर छोड़ा था।

Aditi Govitrikar

अदिति गोवित्रिक के बेहद निजी और तकलीफदेह अनुभव

-अदिति गोवित्रिकर की ये बेबाक बातचीत सिर्फ उनकी निजी कहानी नहीं बल्कि उन अनगिनत महिलाओं की आवाज है जो ऐसे अनुभवों के साथ जीती हैं और चुप्पी तोड़ने की हिम्मत जुटाती हैं।

-अदिति गोवित्रिकर ने हालिया इंटरव्यू में अपने जीवन के बेहद निजी और तकलीफदेह अनुभव शेयर किए हैं। सोच, 16 दिसंबर,पहेली और दे दना दन जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं अदिति गोवित्रिकर ने बताया कि बचपन और किशोरावस्था में हुए कुछ अनुभवों ने उन्हें गहरे मानसिक आघात दिए थे जिनका असर आज भी महसूस होता है।

-अदिति गोवित्रिकर ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से उन्हें अपने शुरुआती दिनों में पनवेल में ज्यादा परेशान करने वाली घटनाओं का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक उन घटनाओं को समझने में भी उन्हें सालों लग गए थे।

सिर्फ 6 साल की उम्र में बुरा अनुभव

अदिति गोवित्रिकर ने बताया कि जब वह सिर्फ 6 साल की थीं, तब उनके पिता के एक दोस्त ने उनके साथ गंदी हरकत की थी। उस उम्र में वह पूरी तरह समझ नहीं पाई थीं कि क्या हुआ लेकिन अपमान और असहजता का एहसास लंबे समय तक बना रहा था।

मुंबई की बस यात्राएं और खुद की सुरक्षा के तरीके

12वीं कक्षा के दौरान दादर कोचिंग के लिए बस से सफर करते समय अदिति गोवित्रिकर ने अपनी सुरक्षा के अनोखे तरीके ढूंढ़े। वह दोनों तरफ भारी बैग रखती थीं, जिनमें हार्डबोर्ड किताबें होती थीं ताकि भीड़ में कोई पास न आ सके। सीट मिलने पर भी वो दोनों तरफ बैग रखकर दूरी बनाए रखती थीं।

Aditi Govitrikar

गलत करने वाले अक्सर जाने-पहचाने लोग होते हैं

अदिति गोवित्रिकर ने माना कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार कई बार परिचित लोग ही करते हैं। उन्होंने एक बाजार की घटना का जिक्र किया, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया था। उस समय वह इतनी छोटी थीं कि घटना को शब्द नहीं दे पाईं, पर अपमान का एहसास गहरा था।

PTSD जैसा असर: आज भी होता है रिएक्शन

अदिति गोवित्रिकर के अनुसार इन अनुभवों ने उन पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने कहा कि आज भी अगर कोई पब्लिक प्लेस पर बहुत करीब आता है, तो उनका शरीर खुद ही प्रतिक्रिया देने लगता है। वह अब ऐसी स्थितियों में तुरंत विरोध करती हैं और चुप नहीं रहती हैं।

पहली बार 15 साल की उम्र में की थी बात

-अदिति गोवित्रिकर ने बताया कि इन घटनाओं के बारे में उन्होंने पहली बार खुलकर तब बात की, जब वह 15 साल की थीं। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं लड़कियों को आत्मरक्षा के तरीके खुद सिखा देती हैं।

-अदिति गोवित्रिकर की ये कहानी सिर्फ एक सेलिब्रिटी का खुलासा नहीं है बल्कि उन अनगिनत लड़कियों और महिलाओं की आवाज है, जो ऐसे अनुभवों से गुजरती हैं। उन्होंने अपनी कहानी शेयर कर ये मैसेज दिया कि चुप्पी तोड़ना जरूरी है और असहज परिस्थितियों में आवाज उठाना ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।

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