भारत की समावेशी संस्कृति को आज पीछे धकेला जा रहा है: जावेद जाफरी
मुंबई, 27 अप्रैल: हिन्दी सिनेमा के महान एक्टर-कॉमेडियन जगदीप साल 2020 में इस दुनिया को छोड़ गए थे। करीब 400 फिल्मों का हिस्सा रहे जगदीप को एक शानदार कलाकार के रूप में जानते हैं। जगदीप को लेकर उनके एक्टर बेटे जावेद जाफरी ने कई बातें कही हैं। जावेद ने ये भी कहा कि उनके पिता को देश के समावेशी कल्चर पर बहुत गर्व था लेकिन आ ये तहजीब कमजोर हो रही है। उसे कहीं पीछे धकेला जा रहा है।

मेरे पिता को देश की एकता पर गर्व था
जावेद जाफरी ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, मेरे पिता, दिवंगत एक्टर जगदीप को भारत की एकता पर नाज था, लेकिन आज लगता है कि इसे या तो भुलाया जा रहा है या नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, मेरे पिता ने इस अद्भुत देश और इसकी समावेशी संस्कृति को बहुत पसंद किया और इसे अपनाया। वो इसी के साथ बड़े हुए और इसे हम तक पहुंचाया। दुख की बात है कि मैं देख रहा हूं कि इसे आज भुलाया जा रहा है लेकिन फिर भी बेहतर समय की उम्मीद कर सकते हैं।

पिता का बचपन बहुत मुश्किल था
जावेद जाफरी ने पिता जगदीप के बचपन को लेकर बताया कि बहुत कम उम्र में ही उनके कंधों पर परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई थी। उन्होंने तो बचपन देखा ही नहीं, नौ साल की उम्र से उन्होंने काम करना शुरू कर दिया। उनके साथ ऐसे हुआ जैसे कोई किसी को संमंदर में फेंक दे और बोले कि चलो तैरो। वह काफी समय तक अपनी मां के साथ मुंबई में फुटपाथ पर रहे थे।

मैंने उनसे बहुत सीखा
जावेद जाफरी ने कहा कि मैंने उनसे काफी कुछ सीखा है। उन्होंने जिन लोगों के साथ काम किया, जैसे गुरु दत्त साहब, महबूब साहब और बिमल रॉय साहब, वह सभी इनसाइक्लोपीडिया थे। मेरे पिता इन सबसे सीखते और वह बातें हमें सिखाते।












Click it and Unblock the Notifications