26/11: भारत ने पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी को किया तलब, कहा- दोहरा रवैया मत अपनाइए
नई दिल्ली, 26 नवंबर। 26/11 आतंकी हमले की आज 13 बरसी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने 26/11 के मुकदमे में पाकिस्तान के राजनायिक को समन भेजा है और है कि इस डबल स्टैंडर्ड्स को अब छोड़ दो इसे मत दोहराओ। वहीं 26/11 की बरसी पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भारत मुंबई आतंकी हमलों के घावों को नहीं भूल सकता है।

बता दें 26/11 की 13वीं वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तानी उच्चायोग के एक वरिष्ठ राजनयिक को यह बताने के लिए बुलाया था कि इस्लामाबाद को मामले में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। राजनयिक को सौंपे गए एक नोट में पाकिस्तान से भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अनुमति नहीं देने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करने के लिए कहा।
पीएम मोदी ने बोली ये बात
26/11 हमले की बरसी पर विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज का भारत "नई नीति और नए तरीकों" के साथ आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है। मैं मुंबई हमले में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देता हूं। कई बहादुर पुलिस कर्मी भी इस घटना में शहीद हुए। मैं उन्हें भी श्रद्धांजलि देता हूं। भारत मुंबई हमले के घावों को नहीं भूल सकता।
मुंबई आतंकी हमले के मामले में तेजी से सुनवाई हो
विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा मुंबई आतंकी हमले के मामले में तेजी से सुनवाई के लिए भारत के आह्वान को दोहराते हुए और भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अनुमति नहीं देने के लिए पाकिस्तान को अपनी प्रतिबद्धता का पालन करने के लिए पाकिस्तान राजनयिक समन दिया गया है।
पाक ने रची थी ये साजिश
समन में कहा गया है यह गहरे दुख की बात है कि इस जघन्य आतंकी हमले के 13 साल बाद भी दुनिया भर के 15 देशों के 166 पीड़ितों के परिवार अभी भी न्याय के लिए इंतजार कर रहे हैं, पाकिस्तान अपराधियों को न्याय दिलाने में बहुत कम ईमानदारी दिखा रहा है। MEA ने दावा किया कि आतंकी हमले की योजना बनाई गई, उसे अंजाम दिया गया और पाकिस्तानी क्षेत्र से लॉन्च किया गया। इसके साथ ही हम एक बार फिर पाकिस्तान सरकार से दोहरा मापदंड छोड़ने और भीषण हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान करते हैं।
ये अंतराष्ट्रीय दायित्व है
विदेश मंत्रालय ने कहा यह केवल आतंकवादियों के शिकार हुए निर्दोष पीड़ितों के परिवारों के प्रति पाकिस्तान की जवाबदेही का मामला नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय दायित्व भी है। इसने कहा कि भारत हमले के 'पीड़ितों और शहीदों' के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करना जारी रखेगा।
विस्तार से जानें पूरी घटना
बता दें 26 नवंबर, 2008 को अरब सागर में समुद्री मार्ग का उपयोग करके भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में घुसने के बाद 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों के एक समूह ने रेलवे स्टेशन, दो लक्जरी होटलों और एक गिरिजाघर पर हमले को अंजाम दिया। करीब 60 घंटे तक चले इस हमले में कम से कम 166 लोग मारे गए। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और यहां तक कि भारत और पाकिस्तान को युद्ध के कगार पर ला दिया था।
आतंकी कसाब को दी जा चुकी है फांसी
नवंबर 2012 में, पाकिस्तानी समूह के बीच एकमात्र जीवित बंदूकधारी अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।भारत इस कायराना हमले में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है, लेकिन हमले के आरोपियों की सुनवाई अब तक बहुत कम हुई है। हमले में भारत और 14 अन्य देशों ने अपने नागरिकों ने अपनी जान गवांई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा बताया कि इन देशों में भारतीय मिशन राष्ट्रीय और विदेशी पीड़ितों की याद में स्मारक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, जो दुनिया को आतंकवाद के निरंतर वैश्विक खतरे की याद दिलाता हैAR Rahman की बेटी खतिजा, जिसके बुर्के पर उठा था सवाल,अब सुरीली आवाज से बनाया दीवाना












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