कोमल हैं कमजोर नहीं : दुर्ग की सैकड़ों महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, मुर्गीपालन से कमा रहीं लाखों रुपए
थनौद गांव की अमर महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने शासन के प्रोत्साहन से 400 चूजों को लेकर मुर्गीपालन यूनिट की शुरुआत गौठान में की, धीरे धीरे सफलता मिलने पर उन्होंने हैचरी का निर्माण किया। जब महिला समूह को इससे लाभ मिला
दुर्ग, 09 जुलाई। हजार मील लंबे सफर की शुरूआत एक छोटे से कदम से होती है। इस बात को सार्थक कर दिखाया है, दुर्ग जिले की महिलाओं ने। छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला अब महिलाओं के सशक्तिकरण का उदाहरण बन गया है । इस जिले की पहचान अब सबसे अधिक लाइवलीहुड कार्यों से हो रही है। क्योंकि जिले के पाटन, धमधा, दुर्ग, क्षेत्र में महिलाओं के जीवन स्तर में अब सुधार हो रहा है। अब महिलाएं आजीविका मूलक कार्यों से आत्मनिर्भर हो रहीं हैं, और परिवार के पालन पोषण में पुरुषों के साथ सहयोग कर रही है।

मुख्यमंत्री की "नरवा गरुवा घुरवा बाड़ी" योजना बनी सहारा
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर प्रदेश के सभी गौठानो को ग्रामीण आजीविका केंद्र के रूप में बदला जा रहा है, इसके लिए साल 22-23 के बजट में 600 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। जिसके तहत दुर्ग जिले में महिला स्व- सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। जिले में लगभग 5500 महिला स्वसहायता समूह काम कर रही है। जिसमें से अधिकतर महिलायें सरकार के "नरवा गरवा घुरवा बाड़ी" योजना के तहत गौठानो में काम कर रही हैं। गौठान में वर्मी कम्पोस्ट निर्माण से लेकर पंचायत द्वारा दी गई भूमि में सब्जी उत्पादन जैसे कार्य शामिल है। इसके साथ ही पाटन ब्लॉक के सांकरा गांव में जिले का पहला आजीविका केंद्र बनाया गया है। 15 एकड़ में बने इस आजीविका केंद्र में 100 स्व-सहायता समूह की 1000 से अधिक महिलाओं को प्रोडक्ट बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है । साथ ही उनके बनाए प्रोडक्ट को बेचने के लिए संसाधन और टेक्निक तक बताए जाएंगे। बिहान योजना के तहत , ग्रामीण आजीविका मिशन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, आचार, चीकी, बड़ी, पापड़, बोरियों को सिलाई, सेनेटरी पैड, गुलाल, खिलौने, अगरबत्ती, सीमेंट पोल निर्माण जैसे काम किये जा रहें हैं।
थनौद में मुर्गीपालन से बदली महिलाओ की जिंदगी
थनौद गांव की अमर महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने शासन के प्रोत्साहन से 400 चूजों को लेकर मुर्गीपालन यूनिट की शुरुआत गौठान में की, धीरे धीरे सफलता मिलने पर उन्होंने हैचरी का निर्माण किया। जब महिला समूह को इससे लाभ मिला शुरु हुआ, तब उन्होंने 12 हजार चूजों की बड़ी यूनिट शुरू कर दी है। समूह की महिलाओं ने बताया कि एक चूजे की कीमत 5 रुपए होती है। इसे बड़ा करके बेचने पर इसका लाभ लगभग 30 से 40 रुपए होगा। 90 दिनों में चूजे बिकने योग्य हो जाते हैं और उम्मीद है कि इन तीन महीनों में 4 लाख रुपए की आय स्वसहायता समूह की महिलाओं की होगी। लगभग साल भर में 16 लाख रुपए की आय उन्हें होगी ।

आत्मनिर्भर बनने का जज्बा रखने वाली समूहों को शासन दे रहा हर संभव सहयोग
महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने में विशेष सहयोग करने वाले जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आजीविकामूलक गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य से सभी गौठानों में आजीविकामूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने कार्य किया जा रहा है। जिन गौठानों में यह कार्य सफलतापूर्वक हो रहा है, वहां इन्हें अपग्रेड करने की दिशा में कार्य हो रहा है। थनौद यूनिट को सहायता करने पर बहुत अच्छा रिस्पांस मिला। इन महिलाओं के उद्यम को प्रोत्साहित किया गया और आगे भी कार्य करने के लिए कहा गया। परिणाम बहुत अच्छे आए हैं और केवल 8 सदस्यों वाले इस समूह का आर्थिक लाभ तेजी से बढ़ गया है।
पूर्णिमा ने बताई सफलता की कहानी, कैसे बदली तस्वीर ?
इस संबंध में जानकारी देते हुए हुए समूह की अध्यक्ष पूर्णिमा धनगर ने बताया कि हम सब बहुत खुश हैं। पहले जब हम 8 लोगों ने मिलकर काम शुरू किया तब डर था कि नुकसान न हो जाए, लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारियों का बहुत सहयोग मिला। लगातार तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहा और आज हम इतने बड़े शेड में कार्य कर पा रहे हैं। हम आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। बहुत अच्छा लग रहा है। हम मुर्गीपालन के लिए जरूरी तमाम सावधानी रख रहें हैं। इसका उपयोग करने से चूजों को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है। गांव में आज 11 महिला समुह अलग-अलग कार्य कर रहें हैं। हमें जिला प्रशासन से हर संभव सहयोग मिल रहा है।
जिले के 54 गौठानों में चल रहा मुर्गीपालन
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह जिले के पाटन, धमधा, दुर्ग जिले के 54 गौठानों में मुर्गीपालन का कार्य हो रहा है। गौठानों के मुर्गीपालन यूनिट को तेजी से अपग्रेड किया जा रहा है। गौठानों में हैचरी यूनिट भी आरंभ कर दी गई है। थनौद में जिस लेवल का काम हुआ है। उससे स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने आपको बड़े फार्म यूनिटों की बराबरी में खड़ा कर दिया है।












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