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महुआ फूल के शरबत, चिक्की और लड्डू, की डिमांड अब पड़ोसी राज्यों में, यहां शराब की जगह बनती है मिठाई

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में महुआ फूल का उपयोग अब सिर्फ शराब बनाने में नही बल्कि इसका इस्तेमाल लड्डू, शरबत, जूस और चटनी बनाने में किया जा रहा है। राजनांदगांव जिले की महिलाओं ने महुआ का खाद्य प्रसंस्करण में इस्तेमाल

राजनांदगांव, 11जुलाई। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में महुआ फूल का उपयोग अब सिर्फ शराब बनाने में नही बल्कि इसका इस्तेमाल लड्डू, शरबत, जूस और चटनी बनाने में किया जा रहा है। राजनांदगांव जिले की महिलाओं ने महुआ का खाद्य प्रसंस्करण में इस्तेमाल कर मानो कमाल ही कर दिया। आज यहां बने उत्पादों की डिमांड महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में हो रही है। ये उत्पाद अब एमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है।

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जैव विविधता से परिपूर्ण है राजनांदगांव का सघन वन क्षेत्र

महाराष्ट्र की सीमा से लगे राजनांदगांव जिले का सघन वन क्षेत्र जैव विविधता से परिपूर्ण है। यहां के ग्रामीणो के लिए लघुवनोपज संग्रह करना पुरानी परंपरा है, साथ इसके विक्रय से उन्हें अतिरिक्त आय होती है। इन वनों में महुआ के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाये जाते हैं। पहले ग्रामीण पारिवारिक व्यवसाय के रूप में महुए फूल का उपयोग देशी शराब बनाकर बेचने में करते थे। लेकिन आज इसका उपयोग बदल गया है। लेकिन खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में महुए का इस्तेमाल कर स्वसहायता समूह की महिलाओं ने क्रांति ला दी है। अब महुआ से स्वादिष्ट लड्डू, महुआ स्कवैश( शरबत), आरटीएस (जूस), चटनी, चिक्की और सूखा महुआ बनता हैं। प्रोटीन फाइबर कार्बोहाइड्रेट आयरन और कैल्शियम से भरपूर महुआ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

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महुआ प्रोसेसिंग यूनिट में ऐसे तैयार होते हैं उत्पाद
फारेस्ट अधिकारी बीपी सोनी ने बताया कि पहले हम जिन गांव में अच्छा महुआ होता है, उन्हें चिह्नित कर ग्रीन नेट लगाकर अच्छे किस्म का महुआ संग्रहित करते हैं. अम्बागढ़, चौकी, बांधा , मानपुर मोहला और बागनदी क्षेत्र में महुआ अधिक मात्रा में होता है। यहां से महुआ इकट्ठा कर उसे साफ करके प्रोसेसिंग कर उसमें बहुत सी चीजे मिलाकर उत्पाद तैयार किया जाता है फिर टेस्टिंग के लिए उत्पाद भेजा जाता है. महुआ प्रसंस्करण केन्द्र में पल्प निकालने की मशीन, महुआ को उबालने के लिए दो केटल, जूसर मशीन एवं बॉयलर मशीन, रॉ मटेरियल स्टोर, पैकिंग मशीन, स्टरलाईजेशन टैंक एवं लैब की मदद से उत्पाद तैयार किये जाते हैं । इस महिला समूह में 10 महिलाएं काम करके आत्मनिर्भर बन रही हैं.

महुआ उत्पाद संजीवनी केंद्र, एमेजॉन, फ्लिपकार्ट में भी उपलब्ध

महुआ के उत्पाद मार्केट में एवं दुर्ग मार्ट संजीवनी विक्रय केन्द्र में भी उपलब्ध है। इसके मार्केटिंग प्रमुख प्रमुख दीपक सोनी बताते हैं। पिछ्ले साल दिपावली के मौके पर सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्रियों को भी महुआ लड्डू के पैकेट भेजे गए थे। जिसे खूब सराहा गया। सभी उत्पाद व शॉपिंग मॉल , एमेजॉन फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध कराए जा रहें हैं।

इन उत्पादों की पड़ोसी राज्यों में बढ़ी डिमांड
जय मां फिरन्ति महिला समूह की अध्यक्ष रश्मि यादव बताती हैं कि उनके समूह द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट की मांग अब दूसरे राज्यों से भी आने लगी है. इसकी सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों में की जा रही है। आज यहां बने उत्पादों की डिमांड महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में हो रही है। प्रोसेसिंग यूनिट में जामुन चिप्स भी बनाया जा रहा है। महुआ से बने उत्पाद प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट आयरन विटामिन ए और सी से भरपूर है. यह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है.

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मध्य भारत का पहला महुआ प्रसंस्करण केन्द्र
रश्मि यादव बताती हैं पहले उनके स्व-सहायता समूह को महुआ प्रसंस्करण केंद्र में कार्य करने उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। फिर उन्हें उत्पादन में लगाया जाता है। महुआ उत्पादों से संबंधित राजनांदगांव की पहली यूनिट का संचालन हमारे समूह द्वारा किया जा रहा है. यह महुआ प्रसंस्करण केंद्र, मध्य भारत का पहला महुआ उत्पादन से संबंधित यूनिट है। रश्मि का कहना है कि पिछले तीन वर्षों की अगर औसतन आमदनी देखी जाए तो प्रतिवर्ष 18 से 20 लाख रुपये की आय हो जाती है. इससे कई महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है. आने वाले समय में इसमें और इजाफा होने की संभावना है।

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