Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Chhattisgarh: दिव्यांगों के लिए ड्रेस डिजाइन कर रही "जैनिका", Durg के इंजीनियर्स ने शुरू किया अनोखा स्टार्टअप

दुर्ग, 16सितम्बर। छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नही है। यहां युवा इंजीनियर्स वर्तमान जीवन शैली को हर पल आसान बनाने की थीम पर काम कर रहे हैं। इसी तरह दुर्ग जिले के इंजीनियरिंग के छात्रों ने एक अनोखा स्टार्टअप शुरू किया है। जिसे जानकर आप भी सोंच में पड़ जाएंगे। तकनीकी शिक्षा के इन छात्रों ने समाज के उस वर्ग को ध्यान में रखते हुए अपना स्टार्टअप शुरू किया है। जिस वर्ग की ओर हर किसी का ध्यान नही जाता। छात्रों के अनुसार अब व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांग को कपड़े पहनने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा और वे खुद को फैशनेबल भी बना सकते हैं।

90 सेकेंड में साड़ी और 30 सेकेंड में पहनेंगे शर्ट

90 सेकेंड में साड़ी और 30 सेकेंड में पहनेंगे शर्ट

दिव्यांगजनो को आत्मनिर्भर बनाने के इस मिशन में रूंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज के भावी इंजीनियर्स का बड़ा योगदान है। यहां के इंजीनियर्स ने एक स्टार्टअप शुरू किया है, जिसमें दिव्यांग पूरे आत्मसम्मान के साथ फैशनेबल बन सकेंगे। इसके माध्यम से हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाले दिव्यांग महज 90 सेकंड में साड़ी पहन सकेंगे। जबकि शर्ट और पैंट पहनने में 30 सेकंड का वक्त ही लगेगा।

"जैनिका" के नाम से शुरू किया है स्टार्टअप

अपने इस स्टार्टअप का नाम छात्रों ने जैनिका रखा। यह स्टार्टअप पूरी तरह से ऑनलाइन बेस्ड है। जिसमें कंपनी ऐसे कपड़े बना रही है। जिसे दिव्यांग बिना किसी व्यक्ति की सहायता के खुद ही पहन और उतार सकेंगे। इस कंपनी की सीईओ कोलकाता की सौमिता बासु हैं। सौमीता ही इन सभी स्टूडेंट्स का मोटिवेशन भी हैं। कंपनी को इंजीनियरिंग कॉलेज के टेक्नोक्रेट्स टेक्निकल सपोर्ट दे रहे हैं। वहीं रूंगटा इनोवेशन एंड बिजनेस इन्क्यूबेशन सेल (रूबी) फंडिंग से लेकर मैनेजमेंट संभाल रही है।

दिव्यांगजनो के लिए कपड़े नही डिजाइन करते ब्रांड्स

दिव्यांगजनो के लिए कपड़े नही डिजाइन करते ब्रांड्स

इस स्टार्टअप के सीईओ सौमिता ने बताया कि, हमेशा देखा गया कि केवल कुछ ही ब्रांड हैं, जो विशेष जरूरतों वाले लोगों के लिए कपड़े तैयार करते थे। दुनिया की आबादी में विकलांग लोगों का प्रतिशत महत्वहीन नहीं है। इसी अहसास ने उन्हें इन विषय पर सोचने पर मजबूर किया। दिव्यांगों के स्पेशल ड्रेसेज को फैशनेबल तरीके के डिजाइन करने का काम सौमिता स्वयं करती है। बिजनेस की शुरुआत के लिए इन स्टूडेंट्स को फंड रूबी इन्क्यूबेशन सेल उपलब्ध करा रहा है, और बिजिनेस को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

सौमिता को स्वयं की पीड़ा से मिली सीख

सौमिता को स्वयं की पीड़ा से मिली सीख

इस स्टार्टअप में खास बात यह है कि कम्पनी की सीईओ सौमिता खुद भी दिव्यांग है और इस परेशानी से लम्बे समय से जूझ रही हैं। इस लिए उन्होंने इस आइडिया पर काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने ऐसे कपड़े चुने जिनमें वह सहज थीं और पहनने में सुविधाजनक थीं। शुरुआत में "जैनिका" के ग्राहक वही लोग बने जो वास्तव में इस परेशानी से जूझ रहे थे। अब धीरे-धीरे यह यह स्टार्टअप आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। इस स्टार्टअप को टेक्निकल सपोर्ट देने में भावी इंजीनियर आदित्य रूंगटा, कुमार आदित्य, शुभम सागर, सागर हरीनमानी, आदर्श रघुवंशी, अमनराज शर्मा, आंचल त्रिपाठी शामिल हैं।

इनके लिए कपड़े बनाती है जैनिका

इनके लिए कपड़े बनाती है जैनिका

जैनिका में खास तौर पर दिव्यांगजनो के साथ साथ, बुजुर्गों, गठिया, पार्किंसंस, फाइब्रोमायल्गिया, पुरानी बीमारियों, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, कैंसर, फ्रोजन शोल्डर जैसे बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए कपड़े बनाती है। कैजुअल के अलावा यह पेशेवर कपड़े, स्लैक, ट्रेंडी और पहनने में आसान साड़ी, टॉप, महिलाओं और पुरुषों के अंडरवियर भी बनाती है। इसके साथ ही इन्होंने आर्डर के अनुसार कई बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए उनके सुविधानुसार ड्रेस डिजाइन कर सेल करने का काम भी शुरू किया है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+