बिहार के सीमांचल में टूट रहे हैं माता-पिताओं के सपने
नई दिल्ली, 14 सितंबर। पूर्णिया शहर के डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर और आर्मी अफसरों समेत कई ऐसे लोग हैं जो अपने बच्चों को सफलता के शीर्ष पर देखना चाहते थे. लेकिन उन्हें आज अपने बेटों को नशे से जूझते देखना पड़ रहा है. पूर्णिया के एक नशा मुक्ति केंद्र के संचालक के अनुसार केंद्र में आने वाले लोगों में करीब 70 प्रतिशत से अधिक संख्या 20 से 25 आयुवर्ग के लड़कों की है. इनमें से लगभग आधे स्मैक के आदी हो चुके हैं तो बाकी शराब, कोकीन और गांजे के लती हैं.

पुलिस या सुरक्षा बलों का कहना है कि ऐसा कुछ नया या अचानक नहीं हो रहा है जिस पर चौंका जाए लेकिन मीडिया में आ रही खबरें बताती हैं कि पूर्णिया ही नहीं पूरे सीमांचल में किशोरों तथा युवाओं के बीच मादक पदार्थों में खासकर स्मैक की लत काफी तेजी से बढ़ी है.
तस्वीरों मेंः बिहार को खास बनाने वाली बातें
कई ऐसे किशोर व युवा अपनी लत पूरी करने के लिए मोबाइल लूटने व चेन स्नैचिंग आदि के जरिए अपराधों की दुनिया में प्रवेश करते हैं और दलदल में फंसते हुए अंतत: ड्रग्स के अवैध कारोबार का हिस्सा बन जाते हैं. कई ऐसे युवा गिरफ्तार भी किए गए हैं. कई लूट कांडों की जांच के बाद भी यह बात सामने आई है.
बड़ी साजिश की आशंका
गृह मंत्रालय को हाल में भेजी गई एक रिपोर्ट में सीमांचल में फैलते ड्रग्स कारोबार के पीछे खुफिया एजेंसियों ने बड़ी साजिश के तहत राष्ट्रविरोधी ताकतों की संलिप्तता की आशंका जताई है. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि नॉर्थ ईस्ट के रास्ते सीमांचल में स्मैक, चरस, गांजा व ब्राउन शुगर जैसी ड्रग्स की सप्लाई की जा रही है. आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान व चीन में बैठे लोगों की मदद से नार्थ ईस्ट से सीमांचल तक का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है.
रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि सीमांचल के सभी जिलों के किशोर व युवा तेजी से ड्रग्स के आदी होते जा रहे हैं. इसमें खास तौर पर स्मैक का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इसे इसलिए साजिशन हथियार बनाया गया है क्योंकि यह शारीरिक व मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित करता है.
नेपाल के विराटनगर का गेटवे कहे जाने वाले अररिया जिले के फारबिसगंज अनुमंडल के जोगबनी स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर पर मादक पदार्थों की लगातार हो रही बरामदगी तथा तस्करों की गिरफ्तारी चौंकाने वाली है.
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस महीनों में नेपाल के सुनसरी, झापा व मोरंग जिले से इस धंधे में संलिप्त दस महिलाओं समेत 280 लोगों की गिरफ्तारी तीन किलो से अधिक ब्राउन शुगर व अन्य नशीले पदार्थों के साथ की गई है. केवल बीते जुलाई माह में इंडो-नेपाल बॉर्डर से नशीले पदार्थों की तस्करी करते हुए 13 लोग गिरफ्तार किए गए. जोगबनी समेत टिकुलिया, कुशमाहा, भेरियारी, इस्लामपुर व अररिया जिले के कई युवक इस अवैध कारोबार में संलिप्त बताए जाते हैं. इनमें कई पकड़े भी गए हैं.
कैरियर बन रहीं महिलाएं
समय-समय पर भारत व नेपाल में गिरफ्तार की जा रही महिलाओं से पुलिस को इनपुट मिलता रहा है कि नशीले पदार्थों की तस्करी में ज्यादातर महिलाएं कैरियर का काम कर रहीं हैं. दरअसल सीमांचल व इसके आसपास के इलाके में तुलनात्मक रूप से गरीबी व अशिक्षा अधिक है. इसका फायदा इन तस्करों के स्थानीय मददगार उठाते हैं. वे गरीब व लाचार महिलाओं तथा बच्चों को अपना निशाना बना कर कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार ये महिलाएं अपने साथ बच्चों को रखती हैं तथा नशीले पदार्थों को उनके स्कूल बैग में रखकर सार्वजनिक वाहन से गंतव्य तक पहुंचती हैं, जहां से स्थानीय मददगार उसकी डिलीवरी ले लेते हैं.

ऐसी ही दो महिलाओं को नेपाल पुलिस ने बीती 16 जुलाई को जोगबनी सीमा से सटे नेपाल भाग के रानी मटियरवा से गिरफ्तार किया था. बीते 18 अगस्त को फारबिसगंज थाने की दारोगा मीरा कुमारी ने पूर्णिया से बस द्वारा फारबिसगंज पहुंचीं दो महिला कैरियरों को दबोच लिया था, जबकि एक अन्य फरार होने में सफल रही थी. ऐसी कई महिलाएं भारत व नेपाल पुलिस की रडार पर हैं.
पांजीपाड़ा बना ट्रांजिट रूट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्वोत्तर के राज्यों सहित नेपाल व बांग्लादेश से ड्रग्स की खेप पश्चिम बंगाल पहुंचती है, जहां से उसे डिमांड के अनुसार सीमांचल व नेपाल के इलाकों में पहुंचाया जाता है. ड्रग तस्करों का मजबूत नेटवर्क पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, इस्लामपुर व पांजीपाड़ा में काम कर रहा है. खासकर पांजीपाड़ा ड्रग्स सप्लाई का ट्रांजिट रूट बना हुआ है.
तस्वीरों मेंः ड्रग्स की जन्मस्थली
तस्करों के सिंडिकेट में स्थानीय अपराधी भी शामिल हैं जो उनके मददगार होते हैं. कहा जाता है कि महिला कैरियर का चयन स्थानीय अपराधी ही करते हैं. नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 2020 के कोविड काल में नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार बिहार में त्रिपुरा, श्रीलंका, पाकिस्तान व अफगानिस्तान से नशीले पदार्थों तस्करी की जा रही है.
नशे के खिलाफ मुहिम
किशनगंज के एसपी कुमार आशीष तो बकायदा नशे के खिलाफ मुहिम चला कर युवा पीढ़ी को इसके प्रति सचेत कर रहे हैं. समय निकाल कर वह रोजाना किशनगंज जिले के सुदूरवर्ती इलाकों के किसी न किसी स्कूल या गांव में पहुंच कर लोगों का जागरूक कर रहे हैं.
वह कहते हैं, "आज युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में है. हमारा प्रयास युवा पीढ़ी को नशा त्यागने के लिए प्रेरित करना है. मैं उन्हें दोस्त बनकर समझाता हूं ताकि वे इस दलदल से निकल सकें. सही समय पर उन्हें बचाना ही मेरा ध्येय है."
कोसी पेंटिंग के जनक व महज 30 घंटे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दुनिया की सबसे बड़ी पेंटिंग बनाने वाले चित्रकार राजीव राज ने भी सीमांचल की इस स्याह तस्वीर को अपने कैनवास पर उकेर कर समाज को जागरूक करने की कोशिश की है. वह बताते हैं, "यह बड़े खतरे का संकेत है, युवाओं व अभिभावकों को इससे सतर्क करना जरूरी है, शायद मैं कामयाब हो जाऊं."
Source: DW
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