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यूक्रेन में लड़ाई का तरीका बदलते ड्रोन

युक्रेन युद्ध में ड्रोन बड़ी भूमिका निभा रहे हैं

कीव, 07 मई। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन का मानना है कि ड्रोन आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करते हैं. पेंटागन के मुताबिक यूक्रेन की तमाम जरूरतों के लिए उसके पास सिर्फ ड्रोन है. यह एक नया ड्रोन है जिसे फीनिक्स घोस्ट का नाम दिया गया है.

पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया, "हमारा मानना है कि ये विशेष प्रणाली उनकी जरूरतों को अच्छे ढंग से पूरा करेगी, खासकर पूर्वी यूक्रेन में."

किर्बी के मुताबिक अमेरिका ने युद्ध भड़कने से पहले ही फीनिक्स घोस्ट को तैयार करना शुरू कर दिया था और यूक्रेन की जरूरतों को और बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए उस काम में तेजी लाई जाएगी.

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अमेरिका की योजना, यूक्रेन को 80 करोड़ डॉलर के सहायता पैकेज के हिस्से के रूप में 120 से ज्यादा ड्रोन देने की है. आखिर फीनिक्स घोस्ट करता क्या है? दूसरी हथियार प्रणालियों से ये कितना अलग है?

इसके बारे में बहुत ज्यादा तो नहीं पता है. कोई तस्वीर नहीं है. हमें बस ये पता है कि फीनिक्स घोस्ट को अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़ी कंपनी आइवेक्स एयरोस्पेस ने अमेरिकी वायु सेना के साथ मिलकर तैयार किया है. किर्बी के हवाले से यह भी पता है कि इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा ट्रेनिंग भी नहीं चाहिए.

किर्बी का कहना है कि नया ड्रोन, पुराने स्विचब्लेड ड्रोनो की तरह है जिन्हें अमेरिकी कंपनी एयरोवाइरोन्मेंट ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के लिए 2012 में बनाया था.

स्विचब्लेड 300 बमुश्किल से 5.5 पाउंड वजनी है और 15 मिनट तक उड़ सकता है

स्विचब्लेड कैमिकाजे यानी आत्मघाती ड्रोन

स्विचब्लेड ड्रोन "लॉइटरिंग वीपंस" की श्रेणी में आता है. ये वो हथियार हैं जो दुश्मन के इलाके में मंडराते रहते हैं और तभी हमला करते हैं जब निशाना नजर आता है.

बार्सिलोना के कारने काउंसिल फॉर एथिक्स इन इंटरनेशनल अफेयर्स मे सीनियर फेलो और लेखक आर्थर हॉलेंड मिशेल ने डीडब्लू को बताया, "ये मिसाइल और ड्रोन के बीच एक मिक्स है."

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आकाश में चक्कर काटते यानी मंडराते हथियारों को ये नाम उनके काम के तरीके से मिला है. उन्हें बगैर किसी खास टार्गेट के लॉन्च कर दिया जाता है, वे एक इलाके के ऊपर गोल गोल मंडराते रहते हैं. फिर जमीन से उनका ऑपरेटर उन्हें एक लक्ष्य सौंपता है और वे हमला कर देते हैं. उनमें सेंसर लगे होते हैं जो सामने पड़ने वाले लक्ष्यों की शिनाख्त कर लेते हैं. मॉडल के आकार और वजन पर ये निर्भर करता है कि वो हवा में 15 से 45 मिनट के बीच, 10 से 40 किलोमीटर की रेंज में कितनी देर या कितनी दूर रह सकता है.

मिशेल के मुताबिक "एक बड़े ड्रोन से उलट, उसे लॉन्चिंग के लिए एयरफील्ड या बहुत सारे तामझाम की जरूरत नहीं है. मिसाइल से अलग ये आपको टार्गेट की शिनाख्त का वक्त देता है, हालात के बारे मे सतर्क करता है. और फिर मिसाइल ड्रोन, निशाने पर वार करता है."

स्विचब्लेड ड्रोनों को कैमीकाजे यानी आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है कि क्योंकि वो लक्ष्य से टकराकर खुद भी नष्ट हो जाते हैं.

वेक्टर ड्रोन निगरानी के लिहाज से बढ़िया है

ज्यादा मुस्तैद और फुर्तीला ड्रोनः फीनिक्स घोस्ट

पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी के मुताबिक फीनिक्स घोस्ट ड्रोन के पास भी वैसी क्षमताएं हैं लेकिन वे हूबहू स्विचब्लेड जैसी नहीं हैं.

पोलिटिको पत्रिका में छपे, एइवेक्स एयरोस्पेस के निदेशक बोर्ड के सदस्य और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डेविड डेपटुला के बयान में कहा गया है कि फीनिक्स घोस्ट, स्विचब्लेड की तुलना में ज्यादा देर तक उड़ सकता है- छह घंटे तक.

डेपटुला का कहना है कि फीनिक्स घोस्ट सिंगल यूज ड्रोन है जिसे सीधे लॉन्च किया जाता है. उसे रात में भी इंफ्रारेड सेंसरो के साथ ऑपरेट किया जा सकता है. पोलिटिको में छपे डेप्टुला के बयान के मुताबिक मध्यम दर्जे के बख्तरबंद मैदानी लक्ष्यों के खिलाफ ये ड्रोन असरदार था.

यूक्रेन के लिए जर्मनी का वेक्टर

यूक्रेनी सेना. जर्मन कंपनी क्वांटम सिस्टम्स का निगरानी ड्रोन भी इस्तेमाल कर रही है.

कंपनी के सीईओ फ्लोरियान जाइबल ने समाचार समूह आरएनडी को बताया कि "हमारे ड्रोन पहले से ही यूक्रेन में हैं."

कंपनी को पांच दिन में ही ठेका मिल गया था, तीन यूक्रेनी सैनिकों ने उनके साथ सेल्फी खींच कर भेजी. जर्मनी का वेक्टर ड्रोन अपने आप में एक हथियार नहीं है, वह बम नहीं गिरा सकता लेकिन वो हथियार प्रणाली का हिस्सा बेशक बन सकता है. उसका सबसे अच्छा इस्तेमाल उसकी उड़ान और वीडियो क्षमताओं के लिए किया जाता है. मिसाल के लिए, यूक्रेन अपनी तोपों का निशाना सटीक बनाने के लिए उसका इस्तेमाल कर सकता है.

वेक्टर 15 किलोमीटर तक हाई रिजोल्युशन वाला रियल टाइम वीडियो बनाता है और दो घंटे तक हवा में रह सकता है.

जापान ने भी यूक्रेन को ड्रोन सप्लाई किए हैं. लेकिन यूक्रेन स्थानीय ड्रोन भी इस्तेमाल करता है.

सबसे आम यूक्रेनी ड्रोन है लेलेका-100. जिसका वजन पांच किलोग्राम है और उसे मध्य यूक्रेन के नीप्रो की एक कंपनी डेविरो ने बनाया है.

रूसी ड्रोन अपेक्षाकृत कम हैं

ऐसा लगता है रूस ड्रोन पर ज्यादा निर्भर नहीं है. हालांकि उनका इस्तेमाल तो करता ही है. उसका मुख्य ड्रोन है- ओरलान-10. सेंट पीट्सबर्ग के सेंटर फॉर स्पेशल टेक्नोलॉजी में इस छोटे से टोही और निगरानी ड्रोन को बनाया गया है.

रूसी सेना भी ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है लेकिन कम

इसके डैनों का फैलाव 10 फुट है. टोही प्रणाली अपने डिजाइन में सरल है. एरियल फोटोग्राफी के लिए कैनन ईओएस-डी सीरिज वाले कैमरे इस्तेमाल किए जाते हैं. थर्मल इमेजिंग और वीडियो कैमरे भी इसमें हैं.

हालांकि ड्रोन विशेषज्ञ मिशेल कहते हैं कि स्वचालित युद्धपद्धतियों में हुए इस तमाम विकास के बीच हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ड्रोन के साथ जोखिम और चिंताएं भी जुड़ी होती हैं.

मिसाल के लिए क्या ड्रोन का इस्तेमाल करने वालों के पास फैसला करने को लेकर पर्याप्त परिस्थितिजन्य जागरूकता रहती है? क्या इन हथियारों को हैक किया जा सकता है? अगर किसी ड्रोन से अनचाहा नुकसान हो जाता है तो उसके लिए लोगों को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? नागरिकों की हिफाजत कैसे की जा सकती है?

मिशेल ने ट्विटर पर लिखा, "ऐसे हथियारों में खुद फैसला करने की खूबी जितनी ज्यादा होगी, ये चिंताएं भी उतनी ज्यादा बढ़ जाती हैं."

Source: DW

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