Kirti Chakra: कैप्टन अंशुमान सिंह को कीर्ति चक्र, बंकर में साथियों को आग से बचाया, 5 माह पहले हुई थी शादी
Anshuman Singh Kirti Chakra: सियाचिन ग्लेशियर में 19 जुलाई 2023 को भारतीय सेना के बंकरों में आग लग गई...। जवान आग से घिर गए थे...। यूपी के देवरिया के 'शेर' कैप्टन अंशुमान सिंह भी वहां तैनात थे...। साथियों के सामने खड़ी मौत से भिड़ गए...। आग का गोला बने बंकर में घुस गए और चार जवानों को सुरक्षित बाहर निकाल लाए, मगर खुद वीरगति को प्राप्त हो गए...।
शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की बहादुरी 5 जुलाई 2023 को एक बार फिर उस वक्त चर्चा में आ गई जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनको मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किया। कैप्टन अंशुमान सिंह को कीर्ति चक्र उनकी पत्नी कैप्टन अंशुमान सिंह को कीर्ति चक्र उनकी पत्नी सृष्टि सिंह ने प्राप्त किया।

कौन थे कैप्टन अंशुमान सिंह?
- कैप्टन अंशुमान सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया के लार थाना इलाके के बरडीहा दलपत के रहने वाले थे।
- वर्तमान में अंशुमान सिंह का परिवार लखनऊ के पारा मोहान रोड पर रहता है।
- शहीद होने से पांच माह पहले 10 फरवरी 2023 को अंशुमान सिंह की पठानकोट की रहने वाली सृष्टि सिंह हुई थीं।
- कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी स्मृति सिंह पेशे से इंजीनियर हैं और नोएडा की एमएनसी में काम करती हैं।
- कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह भारतीय सेना में जेसीओ रहे चुके।
- कैप्टन की मां मंजू सिंह, भाई घनश्याम व बहन तान्या सिंह है। दोनों नोएडा में डॉक्टर हैं।
- पढ़ाई पूरी करने के बाद ही अंशुमान सिंह का भारतीय आर्मर्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे में चयन हो गया था।
- पुणे से एमबीबीएस के बाद अंशुमानि संह ने भारतीय सेना की मेडिकल कोर ज्वाइन की।
ऐसे शहीद हुए थे कैप्टन अंशुमान सिंह
कैप्टन अंशुमान सिंह जुलाई 2023 को सियाचिन ग्लेशियर में 26 मद्रास से अटैचमेंट पर 26 पंजाब बटालियन के 403 फील्ड में अस्पताल में रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर पद पर तैनात थे।
सियाचिन ग्लेशियर में 19 जुलाई 2023 को बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे भारतीय सेना के गोला बारूद बंकर में शॉट सर्किट की वजह से आग लग गई थी, जिसने कई टेंटों को भी चपेट में ले लिया था।
साथी जवान बंकर में फंस गए थे। उनको बचाने के लिए कैप्टन अंशुमान सिंह बंकर में घुस गए थे। तीनों जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान खुद भी गंभीर रूप से झुलए गए। सभी को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए चंडीगढ़ ले गए, जहां कैप्टन अंशुमान सिंह शहीद हो गए।












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