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दिल्ली के 'दिल' को शायद ही जानते होंगे आप? जानिए कौनसी है वो जगह

Heart Of New Delhi: वैसे तो दिल्ली को 'दिलवालों' की कहा जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि दिल्ली का दिल भी इसी राजधानी में कहीं बसता है। वो जगह बहुत खास और खूबसूरत है। जहां घूमने बिना समझो दिल्ली की यात्रा अधूरी है। अगर आपको दिल्ली के दिल के बारे में नहीं पता तो जानिए वो कौनसी जगह है?

राजधानी दिल्ली में यूं तो घूमने की तमाम जगह है। लाल किला, इंडिया गेट, अक्षरधाम, हुमायूं का मकबरा, कुतुबमीनार सहित कई जगह आपको अलग ही एहसास दिलाएगी, लेकिन जिस दिल्ली के दिल की हम बात कर रहे हैं, वो कोई और जगह नहीं बल्कि कनॉट प्लेस है।

Heart Of New Delhi

दरअसल, कनॉट प्लेस जिसे शॉर्ट में सीपी भी कहा जाता है। दिल्ली घूमने वालों के लिए सबसे खास जगह है। यहां शॉपिंग से लेकर हर वो चीज उपलब्ध है, जो एक बाहर से आने वाले लोगों के लिए जरूरी है। रात हो या दिन यहां लोगों की भीड़ आसानी से देखी जा सकती है।

यहां एक तरफ पुराने जमाने की खूबसूरत और कलात्मक डिजायनिंग की भरमार है। तो दूसरी तरह हैंगआउट के लिए भी ये जगह बेहद शानदार मानी जाती है। यहां का सेंट्रल पार्क, यहां के थियेटर्स, दिल्ली का पुराने सिनेमा हॉल्स, प्राचीन हनुमान मंदिर यूं कहें तो हर चीज का संगम यहां देखने को मिलता है।

सीपी की अपनी अलग ही पहचान

सीपी में ही दिल्ली का पहला लग्जरी होटल इंपीरियल है। इसको 1931 में क्वीन वे पर खोला गया था, जो अब जनपथ के नाम से फेमस है। इतना ही नहीं सीपी का नाइट लाइफ भी बेहद मशहूर है। यहां लाइव म्यूजिक का मजा तो मिलता ही है। इसके अलावा डिस्कोथेक और पब में भी युवा अपनी नाइट लाइफ का मजा जमकर उठाते हैं। यहां के ऑफिसेज के किराए बेहद कम हैं वहीं खरीदारी के लिए स्वर्ग भी कहा जाता है। क्योंकि सस्ती से सस्ती और नायाब चीजें यहां बिकती नजर आती हैं।

1929 में बनना हुआ था शुरू

कनॉट प्लेस को बनाने का श्रेय ब्रिटिश वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल को जाता है। 1929 में ब्रिटिश सरकार ने कनॉट प्लेस बनवाना शुरू किया था। इसको बनाने में कुल पांच साल का वक्त लगा था। कनॉट प्लेस का नाम ब्रिटिश शाही शख्स ड्यूक ऑफ कनॉट और स्ट्रैथर्न के नाम पर रखा गया था। कनॉट प्लेस की सबसे बड़ी खासियत यहां की वास्तुकला डिजाइन है। इस वास्तुकला को तैयार करने का श्रेय रॉबर्ट रसेल को ही जाता है। पूरे कनॉट प्लेस का बनावट घोड़े के नाल की बनावट से मेल खाती है। इसकी प्रेरणा ब्रिटेन के रॉयल क्रीसेंट से ली गई थी।

कनॉट प्लेस की जगह पहले क्या था?

शायद ही किसी को मालूम होगा कि कनॉट प्लेस बनने से पहले इस जगह का नाम माधोगंज नाम का छोटा सा गांव था। जिसके चारों तरफ जंगल ही जंगल था, लेकिन कनॉट प्लेस बन जाने के बाद इसकी खूबसूरती ऐसी है कि चाहे दिल्ली वाला हो या दिल्ली घूमने आने वाला, यहां की सैर किए बगैर नहीं रह सकता। हालांकि आधिकारिक रूप से इसे दिल्ली का दिल तो नहीं कहा जाता है, लेकिन इसकी खूबसूरती और प्रसिद्धि को देखते हुए इसे दिल्ली का दिल कहा जाने लगा है।

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