Toll Plaza से बैरियर गायब! न लाइन,रुकना पड़ेगा, दिल्ली में शुरू होगा Barrier-less Toll System, क्या है ये?
Barrier-less GPS-Based Toll System: अगर आप भी हाईवे पर सफर करते समय टोल प्लाजा की लंबी लाइनों और वहां होने वाली चिक-चिक से परेशान रहते हैं, तो आपके लिए ये काम की खबर है। दिल्ली की सड़कों पर आज (11 मई) एक ऐसी व्यवस्था शुरू होने जा रही है, जो आने वाले समय में पूरे भारत के सफर की तस्वीर बदल देगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा (UER-II) से देश के पहले 'बैरियर-लेस' यानी बिना फाटक वाले टोल सिस्टम की शुरुआत कर रहे हैं। अब आपको न तो गाड़ी की खिड़की खोलकर कैश देना होगा और न ही FASTag स्कैन होने का इंतजार करना होगा। बस अपनी रफ्तार बनाए रखिए और टोल अपने आप कट जाएगा।

क्या है ये जादुई तकनीक? (What is Multi-Lane Free Flow - MLFF System?)
इस नई व्यवस्था को तकनीकी भाषा में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम कहा जाता है। इसे समझने के लिए बस इतना सोचिए कि हाईवे पर अब कोई फाटक या बैरियर नहीं होगा। सड़क के ऊपर एक लोहे का ढांचा (Gantry) लगा होगा, जिसमें हाई-टेक कैमरे और सेंसर लगे होंगे।
जैसे ही आपकी गाड़ी वहां से गुजरेगी, ये कैमरे आपकी नंबर प्लेट और FASTag को पलक झपकते ही रीड कर लेंगे। आप 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी निकलेंगे, तब भी सिस्टम आपकी पहचान कर लेगा और आपके बैंक अकाउंट से पैसे कट जाएंगे।

सफर होगा सुपरफास्ट: क्यों पड़ रही है इसकी जरूरत? (Why Toll Plazas are being Phased Out?)
नितिन गडकरी ने 'टाइम्स ड्राइव ऑटो समिट 2026' में साफ कहा था कि साल 2026 के अंत तक भारत को टोल प्लाजा मुक्त बनाने का लक्ष्य है। दरअसल, मौजूदा FASTag सिस्टम के बावजूद पीक ऑवर्स में टोल पर जाम लग जाता है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि ईंधन (Fuel) भी फुंकता है और प्रदूषण भी बढ़ता है।
इस नए सिस्टम से:
- जाम की छुट्टी: अब टोल पर रुकने की मजबूरी खत्म होगी।
- ईंधन की बचत: बार-बार ब्रेक लगाने और गाड़ी स्टार्ट-स्टॉप करने से मुक्ति मिलेगी।
- ट्रैवल टाइम में कमी: सफर पहले के मुकाबले काफी तेज हो जाएगा।
FASTag का क्या होगा? (Is FASTag still required for GPS-Based Toll?)
कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या अब FASTag हटाना पड़ेगा? जवाब है-नहीं। FASTag इस नए सिस्टम का भी मुख्य हिस्सा बना रहेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले इसे स्कैन करने के लिए आपको बैरियर के सामने रुकना पड़ता था, अब यह काम 'मोशन' (चलती गाड़ी) में होगा।
अगर आपके FASTag में बैलेंस नहीं है, तो आपको डिजिटल नोटिस (e-notice) भेजा जाएगा। ध्यान रहे कि अगर आपने 72 घंटों के भीतर बकाया टोल नहीं चुकाया, तो आपको दोगुना जुर्माना देना पड़ सकता है। इसलिए अपने FASTag को हमेशा रिचार्ज रखें।
दिल्ली से शुरुआत, फिर पूरे देश की बारी (Delhi Launch and Nationwide Expansion)
आज मुंडका-बक्करवाला (UER-II) से शुरू हो रहा यह प्रोजेक्ट एक बड़े बदलाव की पहली सीढ़ी है। इससे पहले सूरत में इसका सफल ट्रायल किया जा चुका है। दिल्ली के बाद इसे देश के अन्य महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर लागू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत कम होगी और सामानों की ढुलाई सस्ती और तेज हो जाएगी।
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
- स्मूथ ड्राइविंग: अब हाईवे पर ड्राइविंग का अनुभव किसी मेट्रो गेट की तरह 'सीमलेस' होगा।
- पारदर्शिता: आपके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर ही पैसे कटेंगे, जिससे विवाद की गुंजाइश कम होगी।
- कम प्रदूषण: टोल पर खड़ी गाड़ियों का धुआं अब पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
दिल्ली का मुंडका टोल प्लाजा अब इतिहास बनने जा रहा है। यह बैरियर-लेस सिस्टम न केवल भारत को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की रेस में आगे खड़ा करेगा, बल्कि करोड़ों यात्रियों के कीमती समय को भी बचाएगा। तो तैयार हो जाइए, अब सफर में ब्रेक नहीं, सिर्फ रफ्तार होगी।
FAQs
1. क्या बिना रुके टोल कटने पर गलती की संभावना है?
नहीं, इसमें लगे कैमरे 'हाई-डेफिनिशन' होते हैं जो खराब मौसम में भी नंबर प्लेट और टैग को सटीक तरीके से पहचान लेते हैं।
2. अगर मेरा FASTag काम नहीं कर रहा तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में सिस्टम आपकी नंबर प्लेट से आपकी पहचान करेगा और आपके रजिस्टर्ड पते या मोबाइल पर पेमेंट का लिंक/नोटिस भेज दिया जाएगा।
3. क्या इस सिस्टम के लिए गाड़ी में कोई नई मशीन लगानी होगी?
फिलहाल यह मौजूदा FASTag और ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों पर आधारित है, इसलिए आपको अलग से कुछ भी लगवाने की जरूरत नहीं है।
4. क्या टोल की दरें बढ़ जाएंगी?
नहीं, टोल की दरें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार ही रहेंगी, बस वसूली का तरीका बदल जाएगा।












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