RSS की किसान विंग ने कहा- MSP एक धोखा है, सरकार किसानों के लिए नया कानून लाए
नई दिल्ली। आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने घोषणा की है कि वह बुधवार को 550 स्थानों पर एक राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगा। उनके इस प्रदर्शन की वजह किसानों को सरकार से फसल खरीद का उचित भुगतान दिलाना है। साथ ही किसानों की उपज का बेहतर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए नया कानून बनवाने की मांग भी की जाएगी। भारतीय किसान संघ के महासचिव बद्रीनाथ चौधरी ने इसकी जानकारी दी। बद्रीनाथ चौधरी ने कहा कि, 'हमारे संगठन ने सभी प्रांतों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। हमने तय किया है कि, सरकार से किसानों के हित में कई मांगें उठाएंगे और उन्हें पूरी भी करवाएंगे।"

"किसानों को बाजारों के भरोसे छोड़ दिया गया"
आरएसएस की किसान शाखा के महासचिव ने कहा कि, "8 सितंबर को, हम सरकार को उसके वादों और किसानों के बारे में अपनी चिंताओं को याद दिलाने के लिए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे। सभी जिलों में प्रशासन को ज्ञापन दिया जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारा संगठन एक ऐसे कानून के पक्ष में है जो कृषि उपज के लिए लाभदायक कीमतों की गारंटी दे सकता है। हमारा मानना है कि अभी, किसानों को बाजारों और बड़े आढ़तियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। जबकि, सरकार को विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का उपयोग करते हुए देश के 15 जलवायु क्षेत्रों में से प्रत्येक में हर फसल के लिए एक उचित योजना के साथ आगे आना चाहिए।"

'सरकार उपज का केवल 25% खरीदती है'
फसल खरीद को लेकर, किसानों की पीड़ा पर बात करते हुए किसान शाखा के महासचिव बद्रीनाथ चौधरी ने कहा कि व्यापारी अपने हिसाब से किसानों से फसल खरीदते हैं, सरकार एमएसपी की घोषणा करती है, लेकिन भुगतान छह महीने में होता है। सरकार उपज का केवल 25% खरीदती है। उन्होंने कहा, "सरकार ज्यादातर खरीद केवल दो राज्यों से करती है। बाकी प्रदेश के किसान स्वयं ही रजिस्ट्रेशन कराते हैं। एमएसपी से केवल पंजाब जैसे राज्यों को फायदा हुआ है जहां किसानों को पानी और बिजली अन्य राज्यों के किसानों की तुलना में कहीं अधिक आसानी से मिल जाते हैं।"

एमएसपी खरीद पर कानून बने: भाकिसं महासचिव
बद्रीनाथ चौधरी ने कहा कि, हम चाहते हैं कि एमएसपी खरीद पर कानून बने और सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि किसानों को निवेश की लागत मिले। उन्होंने कहा, "अभी दिया जा रहा एमएसपी एक छल है। हमारा आज सुबह 11 बजे से जंतर-मंतर पर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन है। हमने तीनों कृषि कानूनों को स्वीकार कर लिया था, लेकिन हमने कहा था कि इसमें पांच संशोधन किए जाने चाहिए।
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3 नए कानूनों से कोई समस्या नहीं है
उन्होंने कहा, "हमें 3 नए कानूनों से कोई समस्या नहीं है। हम चाहते हैं कि उनका तेजी से क्रियान्वयन हो। हम उन गरीब किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें कोविड-19 के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।"
उन्होंने कहा कि, हम जो मांगें उठा रहे हैं, वे जायज हैं और सरकार इन पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि, हमारे संगठन ने सभी प्रांतों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी, जिसमें किसानों से जुड़े मुद्दों पर विस्तत चर्चा की गई।

इधर, 40 से ज्यादा संगठनों की कानून निरस्त कराने की मांग
वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में देशभर के करीब 40 से ज्यादा संगठनों की मांग है कि, सरकार तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त कर दे। इसके अलावा एमएसपी की गारंटी का कानून लेकर आए। इस मांग से सरकार सहमत नहीं है। सरकार के खिलाफ हाल ही में मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत के नेतृत्व वाली किसान महापंचायत हुई थी, जिसमें किसानों ने कहा था कि वे उपरोक्त कानूनों को नहीं चाहते।












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