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Rau's IAS Academy Delhi: बेसमेंट में लाइब्रेरी बेईमानी या मजबूरी? IAS सेंटर हादसे की इनसाइड स्टोरी

Rau's Center incident report: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में एक आईएएस कोचिंग सेंटर में हुए हादसे ने दिल्ली-एनसीआर में चल रहे ऐसे सैकड़ों संस्थानों की व्यवस्था और वहां पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं।

सबसे पहला सवाल यही उठ रहा है कि बेसमेंट में लाइब्रेरी चलाने की क्या जरूरत थी, जबकि सबको पता है कि यह असुरक्षित होते हैं। इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की नींद खुली तो उसने चुन-चुनकर ऐसे कई आईएएस कोचिंग सेंटर की बेसमेंट को सील कर दिया है।

raus academy

राव आईएएस सेंटर के बाद कई कोचिंग सेंटर पर गिरी गाज
शायद एमसीडी को लग रहा है कि ऐसे हादसे सिर्फ आईएएस कोचिंग सेंटर में ही हो सकते हैं। अगर नालों की साफ-सफाई नहीं होगी तो बारिश के बाद पानी तो किसी भी बेसमेंट में घुस सकता है; और अगर वहां लोग मौजूद रहेंगे तो उनकी जान भी मुश्किल में पड़ सकती है।

बेसमेंट में लाइब्रेरी बेईमानी या मजबूरी?
खैर वनइंडिया की टीम यह पड़ताल करने के लिए निकली थी कि आखिरकार राव आईएएस जैसे प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान ने यूपीएससी अभ्यर्थियों की जान की परवाह नहीं करते हुए बेसमेंट में लाइब्रेरी क्यों खोल रखी थी?

आंदोलनकारी छात्रों की क्या है शिकायत?
राव कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों से बात करने पर पता चला कि इस इलाके में किराया आसमान छू रहा है। उनकी ये भी शिकायत थी कि प्रॉपर्टी मालिक से लेकर प्रॉपर्टी डीलर तक सब उन्हें लूटने में लगे हैं। बस इन्हें पैसे चाहिए, बच्चों की जान इनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

दिल्ली से हर साल करीब तीन लाख अभ्यर्थी यूपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा देते हैं
यूपीएससी सिविल सर्विस की तैयार करने के लिए दिल्ली आने वाले अभ्यर्थियों की इन शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक आंकड़े के अनुसार हर साल देश में 12,00,000 छात्र-छात्राएं यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होते हैं। इनमें से करीब 3,00,000 अभ्यर्थी सिर्फ दिल्ली के होते हैं, जिनमें से अधिकांश अलग-अलग राज्यों से इसकी तैयारी के लिए राजधानी आते हैं।

वनइंडिया की टीम छात्रों की पीड़ा की वजहों की जड़ तक पहुंचने के लिए इलाके के एक प्रॉपर्टी डीलर के पास पहुंची। उसने नाम नहीं जाहिर होने की गुजारिश करते हुए, जो तथ्य सामने रखे वह इस भयावह दुर्घटना की वजहों का दूसरा पहलू है।

प्रॉपर्टी डीलर ने दी आंखें खोलने वाली जानकारी
उसने बताया कि यहां 88 गज की जमीन पर बिल्डर करीब 750 वर्ग फीट का फ्लोर तैयार करके देता है। आज की तारीख में ऐसे फ्लोर की बुकिंग अमाउंट ही दो-ढाई करोड़ रुपए चल रही है। इंवेस्टर चाहता है कि बिल्डर उसे कम से कम 5 कमरे और 5 बाथरूम बनाकर दे।

88 गज की जमीन में यह संभव नहीं है तो वह भी 100-125 गज कवर एरिया तैयार करके देने की गुंजाइश कर देता है। बिल्डिंग बनाने के समय चढ़ावा देने से सब हो जाता है। यहां एमसीडी और संबंधित विभागों को दी जाने वाली रिश्वत की बात की गई है।

20 हजार रुपए का एक बेड और कम से कम 1 लाख रुपए फ्लोर का किराया
उसने बताया कि अगर कोई इंवेस्टर एक फ्लोर के लिए 2 करोड़ लगाता है तो वह भी चाहेगा कि कम से कम 1 लाख रुपए किराया आए। इसलिए एक बेड का किराया 20,000 (20,000x5) रुपए हो जाता है। लेकिन, यह कमरा भी इतना छोटा होता है कि छात्रों के पढ़ने के लिए जगह नहीं बचती।

कम किराए की वजह से बेसमेंट में चलती है लाइब्रेरी
इसलिए वे पढ़ने के लिए लाइब्रेरी में जाते हैं, जो कि बेसमेंट में इसलिए होती है, क्योंकि इसका किराया कम होता है। अगर फर्स्ट फ्लोर (कमर्शियल) का किराया लाख सवा लाख होता है तो बेसमेंट 40,000 रुपए में मिल जाता है। यहां एक छात्र अलग से 1000-1500 रुपए देकर पढ़ाई करता है। अगर यही लाइब्रेरी फर्स्ट फ्लोर या ऊपर के फ्लोर पर होती है तो यह किराया बढ़ाकर 3,000-3,500 रुपए हो जाता है।

'बेसमेंट सुरक्षित नहीं, लेकिन सस्ते होते हैं'
ब्रोकर का दावा है कि उनपर या मकान मालिकों पर जो लूटने के आरोप लगाए जाते हैं, यह सही नहीं है। सबकुछ आपस में जुड़ा हुआ है। प्रॉपर्टी महंगी है तो इंवेस्टर को ज्यादा पैसे लगाने पड़ते हैं। जाहिर है कि एक इंवेस्टर ज्यादा पैसे लगाएगा तो वह अच्छा रिटर्न भी चाहेगा। इंस्टीट्यूट इसलिए बेसमेंट चुनते हैं, क्योंकि इससे छात्रों को कम किराए में पढ़ाई लायक जगह मिल जाती है। वह सुरक्षित नहीं होते, लेकिन सस्ते होते हैं।

आने वाले दिनों में किराया और बढ़ने का दावा
इस प्रॉपर्टी डीलर का दावा है कि जिस तरह की घटना हुई है, इसके बाद बेसमेंट में लाइब्रेरी बंद होंगी और मजबूरन ऊपर के फ्लोर पर इसे खोलने पड़ेंगे। इससे आने वाले दिनों में रेंट और बढ़ने तय हैं।

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