ज़हरीली हवा निकाल रही दम: वायु प्रदूषण के चलते दिल्ली वालों की 9.5 साल घटी उम्र- एक्सपर्ट
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। देश की राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 530 पहुंचने के साथ ही अब यहां की हवा में सांस लेना खतरनाक हो गया है। दिल्ली की हवा में घुले इस जहर के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पर्यावरणविदों ने लोगों के गैर-जिम्मेदार व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है। इस बार भी तमाम रोक के बावजूद दिवाली पर दिल्ली वालों ने जमकर पटाखे छोड़े हैं जिसके चलते एक्यूआई खतरनाक स्तर पर बढ़ा हुआ है। दिल्ली वालों को इस लापरवाही के दुष्परिणाम भी झेलने पड़ रहे हैं। वायु प्रदूषण के चलते दिल्ली वालों की उम्र 9 साल से ज्यादा कम हो गई है।

मशहूर पर्यावरणविद विमलेंदु झा बताते हैं कि वायु प्रदूषण से हर साल 15 लाख लोगों की मौत होती है। एक रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों की आयु वायु प्रदूषण के चलते 9.5 वर्ष घट गई है। लंग केयर फाउंडेशन बताता है कि वायु प्रदूषण के चलते हर तीसरे बच्चे को अस्थमा है।
दिल्ली में हवा की स्थिति खतरनाक
वायु गुणवत्ता, मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली के अनुसार राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शनिवार सुबह 533 पर गंभीर स्थिति में बना हुआ है। दिल्ली की हवा में जहरीली गैसों की अधिकता होने के चलते लोगों को मास्क लगाने की सलाह दी गई है।
सर गंगाराम अस्पताल के कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ अरुण मोहंती ने वायु प्रदूषण के खतरे को लेकर एएनआई से कहा "यह उन लोगों के लिए जोखिम भरा है जिन्हें पहले से ही हृदय रोग और छाती की अन्य समस्याएं हैं।"
उन्होंने कहा इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज से पीड़ित मरीज भी रिस्क जोन में हैं। यह आश्चर्यजनक रूप से सच है कि 10 से 15 फीसदी बच्चे दमा के मरीज हैं, वे एलर्जिक ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं। यह उन लोगों के लिए खतरनाक है जो COVID-19 से उबर चुके हैं, क्योंकि उनके फेफड़े संक्रमण के चलते पहले से ही कमजोर हैं।












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