नोटबंदी: यौन शोषण की पीड़ितों को नहीं मिल पा रही मुआवजे की रकम

दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने दिल्ली हाईकोर्ट को नोटबंदी के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में हो रही परेशानी की जानकारी दी है।

नई दिल्ली। नोटबंदी के कारण आम जनता के बीच तो उपापोह की स्थिति है ही, पीड़ितो को इंसाफ मिलने में भी इससे दिक्कत हो रही है। दिल्ली हाइकोर्ट को मिली एक जानकारी के अनुसार, 8 नवंबर के बाद पीड़ितो को मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।

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दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि नोटबंदी के बाद यौन उत्पीड़न, तेजाब हमले की पीड़ित और अन्य कई तरह के अपराधों में पीड़ितों तक मुआवजा नहीं पहुंच पा रहा है।

प्राधिकरण की ओर से सचिव धर्मेश शर्मा ने जस्टिस बदर दुर्रेज अहमद और जस्टिस आशुतोष कुमार की बेंच को बताया है कि मुआवजे के 68 मामले 8 नवंबर के नोटबंदी के ऐलान के बाद लटके हुए हैं।

कोर्ट ने मुआवजों में देरी पर जताई नाराजगी

शर्मा ने बताया कि बैंकों ने मुआवजे के संबधित लेनदेन के मामलों को पीछे कर दिया है क्योंकि बैंकों पर इन दिनों नोटबंदी के चलते काम का दबाव है। ऐसे में पीड़ितो को राशि नहीं मिल पाई है।

प्रधिकरण की ओर से ये जानकारी महिला सुरक्षा से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई। प्रधिकरण की बाात को सुनने के बाद कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई है।

कोर्ट ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को कहा कि पीड़ितो के मुआवजे में देरी को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने प्रधिकरण को 24 घंटे के अंदर मुआवजे की रकम पीड़ितों को दिलाने का आदेश दिया है।

आपको बता दें कि 8 नंवबर को पीएम मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद बैंकों पर काम का भार बहुत ज्यादा है। ऐसे में बैंकों में सामान्य रूप से कामकाज नहीं हो पा रहा है। बैंकों के सामने पुराने नोट बदलने के लिए लंबी-लंबी लाइने हैं। बैंककर्मी काम के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।

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