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दिल्ली में आ सकता है बड़ा विनाशकारी भूकंप, लगातार हिल रही धरती पर भूविज्ञानियों ने दी चेतावनी

दिल्ली। पिछले दो महीने से दिल्ली भूकंप से त्रस्त है। अप्रैल के दूसरे हफ्ते में दिल्ली की धरती हिलने का जो सिलसिला शुरू हुआ था उसके बाद निम्न और मध्यम तीव्रता के करीब दस भूकंप आ चुके हैं। देश के बड़े भूविज्ञानियों ने सावधान करते हुए कहा है कि दिल्ली में लगातार आ रहे झटके इस बात के संकेत हैं कि निकट भविष्य में राजधानी में शक्तिशाली भूकंप कभी भी आ सकता है। भारत सरकार के विज्ञान व तकनीक विभाग के अंदर काम कर रहे वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के चीफ डॉक्टर कलाचंद सैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए बताया कि समय, जगह और तीव्रता का अनुमान तो नहीं लगाया जा सकता लेकिन दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में जिस तरह से लगातार धरती हिलने की घटनाएं हो रही हैं वह किसी बहुत बड़े भूकंप को ला सकता है।

हाई रिस्क जोन में आती है दिल्ली

हाई रिस्क जोन में आती है दिल्ली

दिल्ली और इसके आसपास नोएडा और गुड़गांव जैसे क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी इमारतें हैं जिनमें से कइयों को भूकंपरोधी बनाने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया है। दिल्ली भूकंप के हाई-रिस्क जोन में आता है इसलिए क्या होगा जब यहां 5.5 या 6.0 से ज्यादा की तीव्रता के झटके आएंगे? इसके जवाब में आईआईटी जम्मू के प्रोफेसर व अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ चंदन घोष ने कहा कि 29 मई को जो दो भूकंप दिल्ली में आए वो 4.5 तीव्रता के रहे लेकिन अगर यह थोड़ी और तीव्रता वाला होता तो गंभीर परिणाम हो सकते थे। दिल्ली में 6.0 की तीव्रता का भूकंप विनाशकारी हो सकता है। बहुत सारी इमारतें धूल में मिल जाएंगी।

बड़े भूकंप को झेलने में सक्षम नहीं अधिकांश इमारतें

बड़े भूकंप को झेलने में सक्षम नहीं अधिकांश इमारतें

प्रोफेसर चंदन घोष ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि दिल्ली एनसीआर का इलाका भूकंप के जोन-4 में आता है। यह भूकंप के लिए काफी संवेदनशील क्षेत्र है लेकिन फिर भी यहां की अधिकांश इमारतों को बनाने में भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों का पालन नहीं किया जाता है। बिल्डर्स और आर्किटेक्ट्स के बीच सांठगांठ से भूकंपरोधी बनाने के सख्त मानकों से समझौता किया जाता है। इसलिए किसी दिन अगर बड़ी तीव्रता का भूकंप आया तो भयानक परिणाम होंगे। प्रोफेसर ने जापान के बारे में बताते हुए कहा कि वह देश भूकंप के जोन-5 में आता है लेकिन वहां इमारतों के निर्माण में भूंकपरोधी मानकों का सख्ती से पालन किया जाता है। इस वजह से वहां की मजबूत इमारतें 7.5 या 8.0 तीव्रता तक के भूकंप को झेलने में सक्षम हैं।

हिमालय के भूकंप का भी दिल्ली पर असर

हिमालय के भूकंप का भी दिल्ली पर असर

12 अप्रैल से 29 मई के बीच दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में ही नहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके आए। उत्तराखंड में चार और हिमाचल प्रदेश में भूकंप आने की छह घटनाएं हुईं। इस बारे में भारतीय मौसम विभाग के अर्थक्वेक रिस्क इवैल्यूएशन सेंटर के पूर्व प्रमुख डॉक्टर ए के शुक्ला ने बताया कि इन भूकंपों की तीव्रता 2.3 से 4.5 तीव्रता के बीच की थी। जब इस तरह भूकंप आने की घटनाएं लगातार होती हैं तो यह एक चेतावनी है कि दिल्ली में आने वाले दिनों में बड़ा भूकंप आ सकता है। इन भूकंपों के लगातार आने की वजह के बारे में बताते हुए ए के शुक्ला ने कहा कि राजधानी क्षेत्र की धरती के नीचे फॉल्ट सिस्टम बहुत एक्टिव है। इस तरह के फॉल्ट सिस्टम दिल्ली के आसपास के इलाकों में 6.0 से 6.5 तीव्रता तक के भूकंप ला सकते हैं।

यमुना के पास के इलाकों को ज्यादा खतरा

यमुना के पास के इलाकों को ज्यादा खतरा

दिल्ली हिमालय के पास ही है। हिमालय के क्षेत्रों में 8.0 तीव्रता के भूकंप आ चुके हैं। एक स्टडी में यह पाया गया कि हिमालय के क्षेत्र में आने वाले बड़े भूकंप दिल्ली को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। ए के शुक्ला ने दिल्ली और हिमालय क्षेत्र के फॉल्ट सिस्टम के बारे में बताया कि उनके सेंटर में कुछ साल पहले एक स्टडी की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली एनसीआर में अधिकांश इमारतें भूकंपरोधी मानकों के मुताबिक नहीं बनाई गई हैं और बड़ी तीव्रता के भूकंप में उनको भारी क्षति पहुंच सकती है। स्टडी में यह पाया गया कि साउथ और सेंट्रल दिल्ली के इलाके भूकंप से ज्यादा सुरक्षित हैं जबकि यमुना के आसपास के क्षेत्र को ज्यादा खतरा है। ए के शुक्ला ने बताया कि स्टडी के बाद सरकार से इन इमारतों में तुरंत सुधार किए जाने की सिफारिश की गई थी लेकिन उस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है। उस रिपोर्ट में मेट्रो सिटी में बड़े भूकंप आने पर जान-माल की सुरक्षा के लिए प्रशासन को नए उपाय भी सुझाए गए।

क्या है फॉल्ट सिस्टम?

क्या है फॉल्ट सिस्टम?

चट्टान के दो टुकड़ों के बीच जो दरारें होती हैं उसको फॉल्ट कहा जाता है। इस फॉल्ट की वजह से चट्टान के दोनों टुकड़े एक-दूसरे से टकराते हुए खिसकते रहते हैं। धरती के नीचे जब चट्टानों के टुकड़े (प्लेट्स) के खिसकने की गति तेज होती है तो हमें धरती के हिलने का अहसास होता है जिसको भूकंप कहा जाता है। भूकंप से समय चट्टान का एक टुकड़ा फॉल्ट या दरार की वजह से तेजी से किसी ओर फिसलता है।

Heavy Rain Lashes In New Delhi
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