दिल्ली सीरियल ब्लास्ट में 12 साल बाद आज आएगा फैसला, गई थी 60 लोगों की जान

सीरियल धमाकों के लिए तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिल और मोहम्मद रफीक शाह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन पर धमाकों की साजिश रचने का आरोप है।

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में 12 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट के मामले में अदालत गुरुवार को फैसला सुनाएगी। साल 2005 में दिवाली से एक दिन पहले हुए सीरियल धमाकों में 60 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। धमाकों की जांच में इनके तार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा से जुड़े।
दिल्ली सीरियल ब्लास्ट में 12 साल बाद आज आएगा फैसला, गई थी 60 लोगों की जान

लश्कर का ऑपरेटिव था मास्टरमाइंड
सीरियल धमाकों के लिए तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिल और मोहम्मद रफीक शाह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन पर धमाकों की साजिश रचने का आरोप है। यह भी माना जा रहा है इस इन धमाकों का मास्टरमाइंड तारिक है जो लश्कर का ऑपरेटिव था। कोर्ट ने इस मामले में तीनों आरोपियों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे। दिल्ली पुलिस ने तारिक के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। READ ALSO: भ्रष्टाचारियों के लिए हानिकारक है ये स्वामी, पढ़िए किस-किस को लिया निशाने पर

पुलिस ने पेश की कॉल डीटेल
पुलिस ने कोर्ट में तारिक की कॉल डीटेल भी पेश की, जिसमें दावा किया गया कि वह लश्कर-ए-तोएबा के अपने हैंडलर से बातचीत करता था। पुलिस ने अक्टूबर 2005 में सीरियल ब्लास्ट में तीन एफआईआर दर्ज की थीं और मामले की तहकीकात शुरू की थी। दिवाली से एक दिन पहले हुए धमाकों में पहला धमाका पहाड़गंज इलाके में शाम करीब 5:38 बजे हुआ। दूसरा धमाका गोविंदपुरी इलाके में 6 बजे और तीसरा धमाका सरोजनी नगर इलाके में शाम 6:05 बजे हुआ। READ ALSO: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या होगा असर?

हो सकती है मौत की सजा
सीरियल धमाकों में पहाड़गंज में 9 लोगों की मौत हुई जबकि 60 लोग घायल हुए। वहीं गोविंद पुरी में चार लोग घायल हुए। भीड़भाड़ वाले सरोजनी नगर में हुए धमाके में 50 लोगों की मौत हुई और करीब 130 लोग घायल हुए। 12 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट में पहले 13 फरवरी को फैसला आना था लेकिन बाद में 16 फरवरी की तारीख तय की गई। मामले में फैसला दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में सुनाया जाएगा। अगर आरोपी दोषी ठहराए जाते हैं तो उन्हें फांसी की सजा होगी।

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