जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने किया co-education का विरोध, मदनी बोले- गैर-मुसलमान भी करें परहेज

नई दिल्ली, 31 अगस्त: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने लड़कियों के लिए अलग स्कूल और कॉलेज स्थापित करने की वकालत की है। साथ ही कहा कि गैर-मुसलमानों को भी अपनी बेटियों को अनैतिकता और दुर्व्यवहार से दूर रखने के लिए सह-शिक्षा देने से बचना चाहिए। दिल्ली में हुई कार्यसमिति की बैठक के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने सोमवार को कही। उन्होंने गैर मुसलमानों को भी सलाह दे दी कि उन्हें भी बेटियों को सह-शिक्षा देने से बचना चाहिए।

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    Maulana Arshad Madani का बयान, कहा- बेटियों को Co-Education देने से परहेज करें | वनइंडिया हिंदी
    'मुसलमानों को अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए'

    'मुसलमानों को अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए'

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की बैठक में लड़के-लड़कियों के लिए स्कूल-कालेजों की स्थापना, विशेष रूप से लड़कियों के लिए धार्मिक वातावरण में अलग-अलग शिक्षण संस्थान और समाज में सुधार के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज ऐसे स्कूलों और कॉलेजों की सख्त जरूरत है, जहां हमारे बच्चे, खासकर लड़कियां बिना किसी बाधा या भेदभाव के उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।

    'गैर-मुस्लिम भी बेटियों को सह-शिक्षा देने से परहेज करें'

    'गैर-मुस्लिम भी बेटियों को सह-शिक्षा देने से परहेज करें'

    मदनी ने कहा कि दुनिया के हर धर्म में अनैतिकता और अश्लीलता की निंदा की गई है। अपने गैर-मुस्लिम भाइयों से भी कहेंगे कि वे अपनी बेटियों को अनैतिकता और दु‌र्व्यवहार से दूर रखने के लिए सह-शिक्षा देने से परहेज करें और उनके लिए अलग शिक्षण संस्थान स्थापित करें।

    विहिप ने मदनी के बयान की निंदा की

    विहिप ने मदनी के बयान की निंदा की

    मदनी के इस बयान की विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने निंदा की है। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, अरशद मदनी का इस तरह का बयान गैर मुसलमानों, महिलाओं और बच्चियों के प्रति अमानवीय सोच को दर्शाता है। पहले से ही इनका नारी व हिंदू विरोधी व्यवहार पूरी दुनिया देख रही है, ऐसे में ये कहीं गैर मुसलमानों को चेतावनी तो नहीं है? विनोद बंसल ने कहा कि मुस्लिम समाज को तय करना होगा कि वह ऐसे सोच के लोगों को अपना आदर्श व नेता कब तक मानेंगे? उन्होंने कहा कि देश में जहां बच्चियों, बेटियों को सैनिक स्कूलों में दाखिले देने के फैसले हो रहे हैं, वहां ऐसे सोच से तालिबानी मानसिकता प्रदर्शित हो रही है। बंसल ने कहा कि तालिबान का चेहरा दुनिया देख रही है, वही चेहरा इनका सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों कतई आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।

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