DUSU President: कितनी सैलरी मिलती है, कितना फंड और क्या-क्या सुविधाएं?
DUSU Election Result 2025: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इस बार चार में से तीन पदों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कब्ज़ा जमाया, जबकि उपाध्यक्ष की सीट कांग्रेस समर्थित NSUI के खाते में गई। अध्यक्ष पद पर ABVP के आर्यन मान ने 28,841 वोट हासिल कर रिकॉर्डतोड़ जीत दर्ज की, वहीं NSUI की जोश्लिन नंदिता चौधरी को मात्र 12,645 वोट ही मिले।
उपाध्यक्ष पद पर NSUI के राहुल झांसला ने 8,792 वोटों से जीत दर्ज की। सचिव पद ABVP के कुणाल चौधरी के पास गया, जबकि संयुक्त सचिव की कुर्सी दीपिका झा ने अपने नाम की। इस रिपोर्ट में हम समझेंगे कि DUSU अध्यक्ष को कौन-कौन से अधिकार और शक्तियां मिलती हैं, इस पद की प्रमुख जिम्मेदारियां क्या होती हैं, कितना मानदेय तय है और क्यों यह पद छात्रों से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक के लिए अहम माना जाता है।

अध्यक्ष पद क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) का अध्यक्ष पद छात्रों के बीच सबसे प्रतिष्ठा और प्रभाव वाला माना जाता है। इसे भारतीय राजनीति की "नर्सरी" भी कहा जाता है, जहाँ से कई नामी-गिरामी नेताओं ने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। आज भी देश के कई दिग्गज नेता इसी पद से निकलकर आगे बढ़े हैं।
राजधानी दिल्ली में स्थित यह विश्वविद्यालय देशभर से आए छात्रों का केंद्र है। ऐसे में DUSU अध्यक्ष केवल कॉलेजों में कार्यक्रमों की देखरेख ही नहीं करता, बल्कि छात्रों की परेशानियों को प्रशासन तक पहुँचाता है और शिक्षा, हॉस्टल, फीस से लेकर सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर अपनी राय मजबूती से रखता है। यही कारण है कि यह पद युवाओं के लिए राजनीति और नेतृत्व का एक सशक्त मंच साबित होता है।
छात्र राजनीति और DUSU चुनाव की मारामारी
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव हर साल बेहद कड़े मुकाबले के लिए जाने जाते हैं। उम्मीदवार अपनी पहचान बनाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं चाहे वो पोस्टरबाजी हो, अनोखी प्रचार तकनीकें हों या फिर सोशल मीडिया कैम्पेन। इन चुनावों में पैसा, बाहरी राजनीतिक समर्थन और व्यक्तिगत लोकप्रियता अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि मुकाबला अक्सर इतना तीखा हो जाता है कि बहसें आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाती हैं और कभी-कभी झड़प और मारामारी जैसी घटनाएँ भी देखने को मिलती हैं।
अध्यक्ष को क्या-क्या मिलता है?
DUSU अध्यक्ष के पास विश्वविद्यालय और छात्र राजनीति में काफी अहम अधिकार होते हैं। विजयी उम्मीदवार को न सिर्फ एक अलग दफ़्तर आवंटित किया जाता है, बल्कि उसे विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ विभिन्न मुद्दों पर सीधे चर्चा करने का विशेषाधिकार भी मिलता है। अध्यक्ष हॉस्टल सुविधाओं, फीस ढांचे, शिक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर छात्रों की आवाज़ बनता है। साथ ही यदि किसी फैसले पर असहमति हो, तो वह उसका विरोध दर्ज कर सकता है और छात्रों का पक्ष मजबूती से रख सकता है। यही वजह है कि यह पद छात्रों के लिए प्रभावशाली होने के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
DUSU अध्यक्ष की सैलरी और बजट
दिल्ली यूनिवर्सिटी में DUSU अध्यक्ष को व्यक्तिगत सैलरी नहीं दी जाती। हालांकि, जीतने वाली पार्टी को कुल 20 लाख रुपये का बजट मिलता है, जिसमें चारों पदाधिकारी (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव) के लिए 5-5 लाख रुपये निर्धारित होते हैं। यह पैसा सीधे किसी के खाते में नहीं जाता, बल्कि खर्च के लिए एक समिति का गठन किया जाता है। समिति खर्च का पूरा हिसाब रखती है और यह तय करती है कि पैसा किस उद्देश्य के लिए उपयोग होगा।
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वो बड़े नेता जो DUSU से राजनीति में छाए
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) से निकलकर कई छात्र नेता राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति में पहुँचे। कुछ प्रमुख नाम:
- अरुण जेटली (1974-75, ABVP) - पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री
- विजय गोयल (1977-78, ABVP) - पूर्व केंद्रीय मंत्री, दिल्ली BJP नेता
- अजय माकन (1985-86, NSUI) - पूर्व केंद्रीय मंत्री, दिल्ली कांग्रेस
- अलका लांबा (1995-96, NSUI) - पूर्व विधायक, कांग्रेस
- रेखा गुप्ता (1996-97, ABVP) - वर्तमान में दिल्ली की सीएम
- अनिल झा वत्स (1997-98, ABVP) - AAP विधायक और दिल्ली विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष
- नूपुर शर्मा (2008-09, ABVP) - भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता
- रागिनी नायक (2005-06, NSUI) - कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता
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