मिस यू पापा...बदनसीब पिता को इंसाफ दिलाने के लिए 10 साल के बेटे ने लिखी इमोशनल चिट्ठी
'मुझे अपने पिता के लिए इंसाफ चाहिए':बच्चे ने छेड़ी 'हत्यारे' के खिलाफ जंग
नई दिल्ली, 12 जनवरी: कोरोना से पिता, नौकरी और फिर एक पुलिसवाले की कार से जिंदगी खोने वाली जोमेटो के डिलीवरी बॉय की भावुक दास्तान आपको भावुक कर देगी। 38 साल के सलिल त्रिपाठी की शनिवार को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। सलिल पहले एक रेस्टोरेंट मैनेजर के पद पर थे, लेकिन कोरोना वायरस के समय नौकरी चली गई थी, तब से वह अपने परिवार का पेट भरने के लिए फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। 8 जनवरी को देर रात नशे में धुत तेज रफ्तार कार चला रहे दिल्ली पुलिसकर्मी ने सलिल को जोर से टक्कर मार दी थी। जिसमें उनकी मौत हो गई।
अब अपने पिता को इंसाफ दिलाने के लिए 10 साल के बेटे दिव्यांश ने इमोशनल चिट्ठी लिखी है जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है।

वायरल हुआ दिव्यांश का खत
वायरल हो रही चिट्ठी में दिव्यांश ने लिखा कि, 'मुझे अपने पिता के लिए इंसाफ चाहिए। नशे में ब्रीजा कार चला रहे पुलिसवाले ने उन्हें टक्कर मार दी थी। इस मामले मे एक्शन लें। प्लीज मदद करें। मैं सलिल त्रिपाठी का बेटा हूं। वह होटल में मैनेजर थे। कोविड के कारण उन्हें जोमैटो में डिलीवरी बॉय का काम करना पड़ रहा था। उनके पिता जंग बहादुर की कोविड से जान चली गई थी। इसलिए प्लीज न्याय के लिए मेरे परिवार की मदद कीजिए। टीओआई की खबर के मुताबिक, सलिल के परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस वाले आरोपी कॉन्स्टेबल को बचाने के लिए दबाव बनाए हुए हैं।

बदनसीबी लेकर आया कोरोना
उन्होंने सीएम केजरीवाल से मिलने की मांग की है। उधर दिल्ली पुलिस के मुताबिक आरोपी कॉन्स्टेबल के ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, इसे पता चल जाएगा कि उसने शराब पी हुई थी या नहीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सलिल के परिवार ने बताया कि वो दिन में करीब 7 से 8 घंटे काम करते थे और काम के हिसाब से महीने का करीब 8 से 10 हजार रुपये कमा रहे थे।कोविड से पहले, रेस्टोरेंट में सलिल हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक कमा रहे थे। होटल मैनेजनेंट में ग्रेजुएट, सलिल त्रिपाठी होटल इंडस्ट्री में करीब 15 सालों से काम कर रहे थे। वो एक रेस्टोरेंट में मैनेजर थे, लेकिन कोविड लॉकडाउन के दौरान उनकी नौकरी चली गई।

पिता की भी कोविड से मौत हो गई
इस दौरान उनके पिता की भी कोविड से मौत हो गई। घर चलाने के लिए, वो जोमैटो में बतौर डिलीवरी एग्जीक्यूटिव काम करने लगे। पत्नी सुचेता बताती हैं कि सलिल दिव्यांश को एक अच्छा भविष्य देना चाहते थे। वह कहती हैं, 'हमने 2016 में रोहिणी के एक स्कूल में दिव्यांश का ऐडमिशन करवाया था। लेकिन कोरोना में नौकरी जाने के बाद उसे स्कूल ने काफी प्रेशर बनाया। फीस के 8 हजार रुपये जमा करने थे। स्कूल की तरफ से लगातार पेडिंग फीस भरने के लिए रिमांइडर भेजे जा रहे थे। मजबूरी में हमें दिव्यांश को दूसरे स्कूल में भर्ती करवाना पड़ा।

मदद के लिए उठे कई हाथ
सलिल की इस भावुक कहानी सामने आने के बाद लोग उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। मंगलवार रात तक सलिल की पत्नी सुचेता के खाते में 2 लाख तक की मदद आ चुकी थी। कुछ लोगों के मदद के लिए फोन भी आ रहे हैं। कुछ क्राउड फंडिंग के जरिए पैसे जुटाने का ऑफर दे रहे हैं। फिल्म निर्माता मनीष मुंद्रा पीड़ित परिवार की मदद के लिए सामने आए हैं। फिल्ममेकर मनीष मुंद्रा ने त्रिपाठी की पत्नी, सुचेता के अकाउंट में 4 लाख रुपये ट्रांसफर किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोग देश के अलग-अलग कोनों से परिवार के लिए आर्थिक मदद भेज रहे हैं।












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