दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने TMC MP डेरेक ओ'ब्रायन समेत 10 नेताओं को किया बरी, जानिए क्यों लगे थे आरोप?
Delhi Rouse Avenue Court: अप्रैल 2024 में भारत निर्वाचन आयोग के बाहर हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का मामला आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार, 10 जुलाई को इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन समेत सभी 10 आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया।
कोर्ट के इस फैसले ने उस समय सुर्खियां बटोरीं जब विपक्षी दलों ने ईसीआई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया था। आखिर क्या थे आरोप, और क्यों हुआ यह फैसला?

क्या था पूरा मामला?
यह मामला 8 अप्रैल 2024 को हुआ था, जब तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लेकर किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में डेरेक ओ'ब्रायन समेत 10 नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इन पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने, बिना अनुमति प्रदर्शन करने और कानून-व्यवस्था में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।
इन नेताओं को भेजा गया था समन:
इस मामले में अदालत ने जिन 10 नेताओं को समन जारी किया था, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- डेरेक ओ'ब्रायन (TMC सांसद)
- मोहम्मद नदीमुल हक
- डोला सेन
- साकेत गोखले
- सागरिका घोष
- विवेक गुप्ता
- अर्पिता घोष
- डॉ. शांतनु सेन
- अबीर रंजन विश्वास
- सुदीप राहा
इन सभी पर अप्रैल 2024 में निर्वाचन आयोग कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने और धारा 144 के उल्लंघन का आरोप था।
कोर्ट ने क्या कहा?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी भी आरोपी के खिलाफ ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने किसी आपराधिक इरादे से प्रदर्शन किया था। अदालत ने यह भी माना कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा है और जब तक यह शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में हो, तब तक उसे अपराध नहीं माना जा सकता।
इसके साथ ही अदालत ने सभी 10 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया और कहा कि इस मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है। टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे लोकतंत्र की जीत बताया। पार्टी की तरफ से कहा गया कि यह निर्णय दर्शाता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया नहीं जा सकता।
इस मामले में अदालत के फैसले को विपक्षी दलों ने भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में एक अहम कदम बताया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला उन सभी नेताओं के लिए राहत लेकर आया है जो पिछले वर्ष निर्वाचन आयोग की काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
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