दिल्ली की सड़कों पर खर्च होंगे ₹658 करोड़! रेखा सरकार का मेगा प्लान, 270 किमी रोड नेटवर्क की बदलेगी तस्वीर
Delhi Road Project: दिल्ली की टूटी सड़कों, गड्ढों और बार-बार होने वाली मरम्मत की शिकायतों के बीच राजधानी सरकार ने एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान मंजूर किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में 270 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 658 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई।
सरकार का दावा है कि यह केवल सड़क मरम्मत का काम नहीं होगा, बल्कि राजधानी के प्रमुख मार्गों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की कोशिश है। बैठक में लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

Delhi Road News: किन इलाकों में होगा सबसे बड़ा काम?
इस परियोजना के तहत दिल्ली को तीन जोन में बांटा गया है। पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली की प्रमुख सड़कों को नए सिरे से मजबूत किया जाएगा। पूर्वी दिल्ली में 58.29 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर काम होगा, जिसके लिए 147.08 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
उत्तरी दिल्ली में 104.42 किलोमीटर सड़कों के लिए 247.31 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं दक्षिणी दिल्ली में सबसे बड़ा काम होगा, जहां 107.92 किलोमीटर सड़कें 263.61 करोड़ रुपये की लागत से सुदृढ़ की जाएंगी। सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
New Technology in Road Construction: इस बार क्या होगा अलग?
लोक निर्माण विभाग इस बार सड़क निर्माण में नई तकनीक का इस्तेमाल करेगा। पहले पुरानी और क्षतिग्रस्त सड़क की ऊपरी परत को मशीनों से हटाया जाएगा। इसके बाद नई और अधिक मजबूत सतह बिछाई जाएगी, जिससे सड़क की उम्र बढ़े और बार-बार मरम्मत की जरूरत कम पड़े। इसके साथ सड़कों पर नई लेन मार्किंग, आधुनिक साइन बोर्ड और बेहतर जल निकासी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इसका मकसद सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना भी है।
Composite Tender System: पहली बार लागू होगी नई व्यवस्था
इस परियोजना की एक और खास बात टेंडर प्रक्रिया में किया गया बदलाव है। अब हर सड़क के लिए अलग-अलग टेंडर जारी नहीं किए जाएंगे। पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर सिस्टम लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे काम की निगरानी आसान होगी और जवाबदेही भी तय होगी। एक ही एजेंसी को पूरे जोन की जिम्मेदारी मिलने से परियोजना के क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय की उम्मीद है।
Five-Year Accountability: पांच साल तक ठेकेदार रहेगा जिम्मेदार
नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों को केवल सड़क बनाकर काम खत्म नहीं करना होगा। उन्हें पांच साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि के तहत सड़क की गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। अगर सड़क में कोई खराबी आती है या गड्ढे बनते हैं तो उनकी मरम्मत तय समय सीमा में करनी होगी। सरकार ने गड्ढों की मरम्मत 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने की बात कही है।
Independent Quality Audit: गुणवत्ता पर रहेगी बाहरी निगरानी
परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट भी कराया जाएगा। इसके लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) जैसी संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो सकेगी और परियोजना की पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
Environment Standards: धूल और प्रदूषण पर भी फोकस
दिल्ली में सड़क निर्माण के दौरान धूल प्रदूषण एक बड़ी चुनौती रहती है। इस बार सरकार ने साफ किया है कि निर्माण कार्य के दौरान वायु गुणवत्ता से जुड़े सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Management) के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। धूल नियंत्रण के उपायों को अनिवार्य बनाया गया है ताकि विकास कार्यों का असर पर्यावरण पर कम से कम पड़े।
दिल्ली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब राजधानी में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 657.99 करोड़ रुपये की यह परियोजना केवल सड़क सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही, तकनीक, गुणवत्ता ऑडिट और पर्यावरणीय मानकों को एक साथ जोड़ने का प्रयास भी है।














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