Delhi में जासूसी मॉड्यूल का पर्दाफाश, नेपाली नागरिक ISI को सप्लाई कर रहा था भारतीय सिम कार्ड, कैसे हुआ खुलासा?
Delhi Police Special Operation: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया। जांच में सामने आया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए नेपाल का एक नागरिक भारतीय सिम कार्ड खरीदकर पाकिस्तान तक पहुंचा रहा था। इन सिम कार्ड का इस्तेमाल बहावलपुर और लाहौर जैसे इलाकों से किया जा रहा था, जहां से भारतीय सेना और डिफेंस से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही थी।
पकड़ा गया शख्स, प्रभात कुमार चौरसिया, कभी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव रह चुका है और बाद में कारोबार में हुए भारी घाटे ने उसे ISI के झांसे में ला दिया। अमेरिका में वीजा और नौकरी के सपनों का लालच देकर उसे इस गुप्त ऑपरेशन में शामिल किया गया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के दौरान डिजिटल डिवाइस और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं और अब उसके नेटवर्क और विदेशी हैंडलर्स की तलाश तेज हो गई है।

सिम कार्ड की जांच से खुला राज
पुलिस की जांच तब शुरू हुई जब बहावलपुर (पाकिस्तान) में भारतीय सिम कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि चौरसिया ने आधार कार्ड, जो महाराष्ट्र के लातूर में रजिस्टर्ड था, का इस्तेमाल कर बिहार और महाराष्ट्र से 16 सिम कार्ड खरीदे।
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इन सिम कार्ड को एक्टिवेट करने के बाद नेपाल के काठमांडू भेजा गया और वहां से ISI एजेंट्स को सौंपा गया। अधिकारियों के अनुसार, इनमे से 11 सिम पाकिस्तान के लाहौर, बहावलपुर और अन्य जगहों से व्हाट्सएप पर इस्तेमाल किए जा रहे थे। इनका मकसद भारतीय सेना के जवानों से संपर्क बनाना और संवेदनशील जानकारी हासिल करना था।
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा बहावलपुर का कनेक्शन
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वही बहावलपुर, जहां ये सिम चल रहे थे, वहीं जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय था जिसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तबाह किया था।
नेपाल का कारोबारी बना हैंडलर
जांच में सामने आया कि चौरसिया का सीधा संपर्क नेपाल के एक बड़े व्यापारी से था। यह व्यापारी ISI का अहम एजेंट है। वही चौरसिया को टास्क देता था और कई अन्य जासूसों को भी संभाल रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह व्यापारी नेपाल में चल रहे जेन-जेड नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों से भी जुड़ा है।
अमेरिकी वीजा का लालच देकर फंसाया
जांचकर्ताओं के अनुसार, 2024 में चौरसिया को नेपाल के एक बिचौलिए ने ISI एजेंट्स से मिलवाया। उन्हें वादा किया गया कि उसके लिए अमेरिकी वीजा और विदेश में पत्रकारिता के मौके तैयार किए जाएंगे। इसी लालच में चौरसिया ने काम शुरू किया। उसे सिम कार्ड सप्लाई करने के साथ-साथ DRDO और सेना से जुड़ी जानकारी जुटाने का भी टास्क दिया गया था।
कारोबारी घाटे के बाद टूटा मनोबल
चौरसिया पहले मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर काम कर चुका है। बाद में उसने काठमांडू में खुद की कंपनी शुरू की, लेकिन भारी घाटा होने के बाद उसका कारोबार बंद हो गया। विदेश जाने की बेचैनी और आर्थिक दिक्कतों के कारण उसने ISI का ऑफर मान लिया।
चौरसिया को दिल्ली के लक्ष्मी नगर, विजय ब्लॉक से पकड़ा गया। पुलिस ने उसके पास से कई डिजिटल डिवाइस, आपत्तिजनक सामग्री और सिम कार्ड के लिफाफे बरामद किए। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। यह ऑपरेशन ACP कैलाश बिष्ट और इंस्पेक्टर राहुल कुमार के साथ विनीत तेवतिया की टीम ने मिलकर किया। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय मोबाइल नंबरों के पाकिस्तान में इस्तेमाल की सूचना मिलने के बाद यह जांच शुरू हुई थी।
केस दर्ज, जांच जारी
चौरसिया पर भारतीय न्याय संहिता (भारतीय दंड संहिता के स्थान पर लागू नया कानून) की धारा 61(2)/152 के तहत केस दर्ज किया गया है। अब पुलिस उसके नेटवर्क, सहयोगियों और विदेश में मौजूद ISI हैंडलर्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
कौन है प्रभात चौरसिया?
प्रभात कुमार चौरसिया का जन्म 1982 में नेपाल के बिरगंज में हुआ था। उसने नेपाल से मैट्रिक की पढ़ाई की, फिर बिहार के मोतिहारी से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उसने बीएससी डिग्री और कंप्यूटर हार्डवेयर व नेटवर्किंग में डिप्लोमा हासिल किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई में भी काम कर चुका है।
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